नेपाल दौरे पर PM मोदी, जानिए जानकी मंदिर से जुड़ी खास बातें

काठमांडू। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह पड़ोसी देश नेपाल रवाना हो गए हैं। प्रधानमंत्री का ये दौरा दो दिन का है। अपने इस दौरे की शुरुआत PM मोदी जनकपुर के जानकी मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ करेंगे, बतौर प्रधानमंत्री ये नरेंद्र मोदी का तीसरा नेपाल दौरा है। दोनों देशों के बीच सांस्‍कृतिक रिश्‍तों की डोर और मजबूत करने के मकसद से पीएम मोदी इस मंदिर में जाएंगे। इस शहर का न‍ सिर्फ नेपाल के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक अलग महत्‍व है। जनकपुरी का जिक्र रामायण में भी है और कहते हैं कि यह वही जगह है जहां पर राजा जनक को सीता माता एक नन्‍हीं बच्‍ची के तौर पर मिली थीं। इस शहर को जनकपुर धाम के तौर पर भी जानते हैं।

जनकपुर नेपाल के धार्मिक और सांस्‍कृतिक पर्यटन का केंद्र

जनकपुर नेपाल के धार्मिक और सांस्‍कृतिक पर्यटन का केंद्र

जनकपुर नेपाल के धार्मिक और सांस्‍कृतिक पर्यटन का केंद्र है। इस शहर को जनकपुरधाम के तौर पर भी जानते हैं और इसकी स्‍थापना 18वीं सदी में हुई थी। जनकपुरधाम विधेय राजवंश की राजधानी हुआ करता था जिसने प्राचीन समय में मिथिला पर राज किया था। जनकपुर काठमांडू से 123 किलोमीटर दूर है और यह नेपाल का सांतवा सबसे ज्‍यादा आबादी वाला शहर है। कई वर्षों पहले तक नेपाल रेलवे की ओर से जनकपुर और नेपाल के बीच ट्रेन का संचालन भी होता था

यहीं हुआ था राम-सीता का विवाह

यहीं हुआ था राम-सीता का विवाह

कहते हैं कि राजा जनक का महल यहीं जनकपुर में था और यह विधेय की राजधानी हुआ करता था। रामायण के अनुसार राजा जनक को यहीं पर एक छोटी बच्‍ची मिली थी जिनका नाम उन्‍होंने सीता रखा और फिर उसका पालन-पोषण अपनी बेटी की तरह किया। कहते हैं कि भगवान शिव के जिस धनुष को स्‍वंयवर में श्रीराम ने तोड़ा था उसे भी जनकपुर में ही छोड़ा गया था। जनकपुर में आज भी वह जगह मौजूद है जहां पर भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। सन् 1950 तक जनकपुर में कई गांव थे और यहां पर किसानों से लेकर कलाकार, पुजारी और मठों में काम करने वाले क्लर्क्‍स का अच्‍छा-खासा नियंत्रण था। बाद में इसे बढ़ाया गया और इसे एक कमर्शियल सेंटर बनाया गया। सन् 1960 में जनकपुर धनुष जिले की राजधानी बन गया। जनकपुर आज भारत और नेपाल के अलावा दुनिया के अलग-अलग देशों में फैले हिंदुओं के लिए अहम तीर्थस्‍थल में तब्‍दील हो चुका है। कहते हैं कि इस मंदिर को बनाने में उस समय 9 लाख रुपए लगे थे, इसीलिए इसे 'नौलखा मंदिर' भी कहा जाता है।

जनकपुर का धार्मिक महत्व

जनकपुर का धार्मिक महत्व

जनकपुर में पीएम मोदी के सम्‍मान के लिए नेपाल की सरकार की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद वह माता सीता के मंदिर में पूजा करेंगे। बारहबिघा मैदान पर पीएम मोदी का स्‍वागत किया जाएगा। माना जा रहा है कि पीएम मोदी कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित भी कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक काठमांडू की जगह जनकपुर से अपनी यात्रा की शुरुआत करके पीएम मोदी एक नई स्‍टाइल की डिप्‍लोमैसी की शुरुआत करना चाहते हैं। पीएम मोदी के साथ नेपाल के पीएम केपी ओली भी मंदिर जाएंगे। दोनों पीएम साथ में यहां पर रामायण सर्किट का उद्घाटन करेंगे।

मुक्तिनाथ मंदिर

मुक्तिनाथ मंदिर

नेपाल के गृह मंत्री राम बहादुर थापा का कहना है कि पीएम मोदी का यह नेपाल दौरा, नेपाल और भारत के बीच एतिहासिक, सांस्‍कृतिक और धार्मिक संबंधों को नई ऊंचाईयों पर लेकर जाएगा। पीएम मोदी मुक्तिनाथ मंदिर भी जाएंगे और पोखरा में भारतीय दूतावास के पेंशन कैंप का दौरा भी करेंगे। इसके साथ ही वह नेपाल की राष्‍ट्रपति बिद्या देवी भंडारी से भी मुलाकात करेंगे। अप्रैल में नेपाल के पीएम ओली भारत की यात्रा पर आए थे और उन्‍होंने कहा था, 'दोस्‍ती सबसे अहम है और दोस्‍ती के साथ किसी भी तरह की तुलना नहीं है। किसी भी तरह का समझौता या संधि, दोस्‍ती से ही शुरू होती है।'

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