PM Modi के दौरे से पहले नेतन्याहू ने Hexagon Alliance लांच किया, भारत को बनाया पार्टनर, क्या हैं इसके मायने?
PM Modi Israel visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार (25 फरवरी) से इजरायल के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। पीएम मोदी की इजरायल यात्रा से ठीक पहले पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नई हलचल तेज हो गई है। यरुशलम से उभरी इस रणनीतिक पहल ने क्षेत्रीय समीकरणों को लेकर नई अटकलों को जन्म दे दिया है। इजरायल में एक नए क्षेत्रीय गठबंधन की आहट सुनाई दे रही है।
दरअसल, 24 फरवरी को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हेक्सागन गठबंधन का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने मिडिल ईस्ट में कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला करने के लिए इसे 'जरूरी' कदम बताया है। नेतन्याहू ने भारत के साथ-साथ इजरायल, ग्रीस और साइप्रस को इस गठबंधन के मुख्य पार्टनर बनाया है।

बेंजामिन नेतन्याहू के अनुसार, इस प्रस्तावित समूह में भारत, इजरायल, ग्रीस और साइप्रस मुख्य स्तंभ होंगे। यह पहल ऐसे समय आई है जब इजरायल-ईरान तनाव, सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण नई करवट ले रहे हैं।
क्या है हेक्सागन गठबंधन?
इजरायली विदेश मंत्रालय के 22 फरवरी के बयान के अनुसार, नेतन्याहू ने कैबिनेट बैठक में इस नई अवधारणा की रूपरेखा पेश की। उन्होंने कहा कि उनका दृष्टिकोण मध्य पूर्व के भीतर और उसके आसपास गठबंधनों की एक पूरी संरचना खड़ी करना है, जिसे उन्होंने "षट्कोण" की संज्ञा दी। इस प्रस्तावित ढांचे में भारत, इजरायल, ग्रीस, साइप्रस, कुछ अरब देश, अफ्रीकी देश और एशिया के अन्य संभावित साझेदार शामिल हो सकते हैं। नेतन्याहू ने इसे संगठित और चरणबद्ध तरीके से पेश करने की बात कही है।
किनके खिलाफ है यह रणनीतिक धुरी?
नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इस गठबंधन का उद्देश्य "कट्टरपंथी शिया धुरी" और "उभरती हुई कट्टरपंथी सुन्नी धुरी" का मुकाबला करना है। "कट्टरपंथी शिया धुरी" से आशय ईरान और उसके सहयोगी संगठनों से है। "कट्टरपंथी सुन्नी धुरी" में आईएसआईएस जैसे आतंकी नेटवर्कों के अवशेषों और अन्य उग्रवादी समूहों को शामिल माना जा रहा है। इस प्रस्तावित गुट का फोकस सुरक्षा, रक्षा सहयोग और खुफिया साझाकरण को मजबूत करना होगा।
भारत की क्या होगी भूमिका?
प्रधानमंत्री मोदी 25-26 फरवरी को इजरायल की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह उनकी दूसरी इजरायल यात्रा होगी। यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेता क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
नेतन्याहू ने भारत को इस हेक्सागन गठबंधन का एक प्रमुख स्तंभ बताया है। भारत पहले से ही पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है और इजरायल, यूएई, सऊदी अरब तथा अन्य देशों के साथ समानांतर संबंध बनाए हुए है। ऐसे में यह नया प्रस्ताव भारत की क्षेत्रीय भूमिका को और व्यापक बना सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
यह प्रस्ताव इसलिए अहम है क्योंकि यह अब तक चल रहे बहुपक्षीय सहयोग को एक औपचारिक सुरक्षा ढांचे में बदलने का संकेत देता है। अब तक भारत, इजरायल और अन्य देशों के बीच सहयोग आर्थिक, तकनीकी और सामरिक स्तर पर रहा है, लेकिन कोई औपचारिक सामूहिक सुरक्षा संरचना अस्तित्व में नहीं थी। "षट्कोण" की अवधारणा उस खाली स्थान को भरने का प्रयास मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन को नया आकार दे सकती है और पश्चिमी तथा दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में नई रेखाएं खींच सकती है।
बदलती क्षेत्रीय राजनीति का संकेत
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक रक्षा समझौते की चर्चा तेज है और तुर्की की संभावित भागीदारी की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। ऐसे माहौल में नेतन्याहू का "गठबंधन का प्रस्ताव स्पष्ट रूप से एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में देखा जा रहा है।












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