नवाज की पलट दी सत्ता, पाकिस्तानियों को ही मरवाया, जानिए क्यों मुशर्रफ को मिली थी फांसी की सजा?
मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को दिल्ली में हुआ था और उन्होंने 19 अप्रैल 1961 को पाकिस्तान सैन्य अकादमी काकुल से अपना कमीशन प्राप्त किया था।

Pervez Musharraf News: पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का रविवार को 79 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका काफी समय से दुबई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। 1999 के कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड रहे मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को सत्ता से बेदखल कर पाकिस्तान के शासन पर कंट्रोल कर लिया था। साल 2001 में, उन्होंने खुद को राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया और 2008 तक इस्लामिक गणराज्य पर शासन किया। आईये जानते हैं, कि आखिर जनरल परवेज मुशर्रफ को क्यों फांसी की सजा मिली थी?

कारगिल युद्ध का मास्टरमाइंड
जनरल मुशर्रफ कारगिल युद्ध के वास्तुकार थे और पाकस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ कई बार ये कबूल कर चुके हैं, कि कारगिल में मुशर्रफ पाकिस्तानी सैनिकों को भेज रहे हैं, इस बात की जानकारी उन्हें नहीं थी। कारगिल युद्ध भारतीय और पाकिस्तानी सेना ने 1999 में लड़ा था और अंत में पाकिस्तान की सेना को भागना पड़ा था। जनरल मुशर्रफ ने अपने सैन्य कार्यकाल के दौरान मार्च से मई तक, कारगिल में रणनीतिक चौकियों पर कब्जा करने के लिए पाकिस्तानी सेना की नॉर्दर्न लाइट इन्फैंट्री को घुसपैठ करने का आदेश दिया था। घुसपैठ का पता चलने पर, भारतीय सेना ने पाकिस्तानी नियंत्रण से चौकियों को फिर से छीनने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया था।

नवाज शरीफ का तख्तापलट
अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण, तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को सेना को नाराज करते हुए कारगिल की पहाड़ियों से पाकिस्तानी सेना को वापस बुलाने का आदेश देना पड़ा। 12 अक्टूबर 1999 को, नवाज शरीफ ने मुशर्रफ को सेना प्रमुख के पद से बर्खास्त कर दिया, लेकिन मुशर्रफ के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना ने एक नवाज शरीफ की सरकार का ही तख्तापलट कर दिया। पाकिस्तानी सेना ने शरीफ की सत्ता पलटने के बाद देश के हवाई अड्डों और रेडियो स्टेशन पर नियंत्रण कर लिया था। सेना प्रमुख मुशर्रफ ने पाकिस्तान के मुख्य कार्यकारी के रूप में पदभार संभाला और शरीफ को अपदस्थ कर दिया। रफीक तरार के इस्तीफे के बाद, मुशर्रफ ने 2001 में खुद को पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में नियुक्त किया और 2008 तक इस पद पर रहे।

मुशर्रफ को मिली थी फांसी की सजा
पाकिस्तान में नेताओं को पहले भी मौत की सजा मिल चुकी हैं और राजनीतिक दलों के नेतृत्व में हुए एक आंदोलन के बाद मुशर्रफ ने 18 अगस्त 2008 को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था। जिसके बाद जनरल परवेज मुशर्रफ के खिलाफ पाकिस्तान की एक विशेष अदालत में मुकदमा शुरू हुआ था। पूर्व सैन्य शासक को पाकिस्तान की एक विशेष अदालत ने 17 दिसंबर 2019 को संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत मौत की सजा सुनाई थी। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के कार्यकाल में उनके खिलाफ उच्च राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था। मुशर्रफ 31 मार्च 2016 को अदालत में मौजूद थे, जब उन्हें आरोपों पर आरोपित किया गया था। हालांकि, बाद में लाहौर हाई कोर्ट के जस्टिस सैयद मजहर अली अकबर नकवी, जस्टिस मुहम्मद अमीर भट्टी और जस्टिस चौधरी मसूद जहांगीर की तीन सदस्यीय पूर्ण पीठ ने सर्वसम्मति से मुशर्रफ के खिलाफ मामले की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत के फैसले को असंवैधानिक घोषित कर दिया था और मुशर्रफ की फांसी की सजा माफ हो गई थी।

पाकिस्तान के नेताओं ने जताया शोक
वहीं, अब जब जनरल परवेज मुशर्रफ की मौत हो गई है, तो इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने कहा है, कि सैन्य प्रमुख, संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी (सीजेसीएससी) जनरल साहिर शमशाद, और तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने पूर्व सेना प्रमुख के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग ने कहा, कि "सीजेसीएससी और सेना प्रमुख, जनरल परवेज मुशर्रफ के निधन पर हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं। अल्लाह, दिवंगत आत्मा को शांति दे और शोक संतप्त परिवार को शक्ति दे।" वहीं, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष फवाद चौधरी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा, कि "मुशर्रफ एक महान व्यक्ति थे और उनकी सोच 'पाकिस्तान पहले' की थी।"

पाकिस्तानियों को ही मरवाने का इल्जाम
पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स ने हमेशा से इल्जाम लगाया है, कि परवेज मुशर्रफ की वजह से हजारों पाकिस्तानी बेमौत मारे गये, क्योंकि उन्होंने ही अमेरिकी सेना को पाकिस्तान से ऑपरेशंस को अंजाम देने की इजाजत दी थी। अपने कार्यकाल के दौरान, जनरल परवेज मुशर्रफ ने 9/11 की घटना के बाद पाकिस्तान को अग्रिम पंक्ति का सहयोगी बनाने के अमेरिकी प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। इसके बाद अमेरिका ने पाकिस्तानी सैन्य बेस से ना सिर्फ तालिबान के आतंकियों पर सैकड़ों हमले किए, बल्कि अमेरिकी सैनिकों पर पाकिस्तान की नागरिकों पर भी हमले करने के आरोप लगे।












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