तालिबान से यारी पड़ेगी महंगी, अमेरिका में पाकिस्तान को सजा देने के लिए उठाए जा रहे कदम

अमेरिका में अफगानिस्तान हार पर संसदीय समिति के सामने रक्षा अधिकारी अपनी बात रख रहे हैं, जिसमें बार-बार पाकिस्तान का नाम तालिबान के आतंकियों की मदद करने के लिए सामने आ चुका है।

वॉशिंगटन, अक्टूबर 01: यूनाइटेड नेशंस द्वारा प्रतिबंधित 12 वैश्विक आतंकवादी संगठनों के लिए पनाहगार बने पाकिस्तान पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है। पिछले एक हफ्ते में अमेरिका में लगातार पाकिस्तान पर बात हो रही है और अमेरिका के सैन्य प्रमुख अमेरिका के संसदीय कमेटी के सामने अफगानिस्तान में मिली हार को लेकर अपनी बात रख रहे हैं। वहीं, अब अमेरिका की तरह से कहा गया है कि, पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए सुरक्षित जन्नत है।

आतंकियों का पनाहगार पाकिस्तान

आतंकियों का पनाहगार पाकिस्तान

पेंटागन ने गुरुवार को कहा है कि, अमेरिका को "ईमानदार चिंता" है कि पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह रहा है और लंबे समय से बनी उसकी आशंकाएं अभी भी वैध हैं। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, पेंटागन के प्रेस सचिव जॉन किर्बी ने कहा कि पाकिस्तान को "दुनिया के उस हिस्से" में आतंकवाद के संबंध में अपनी समानता और जिम्मेदारियों को बनाए रखना याद रखना चाहिए। किर्बी ने कहा कि, संयुक्त राज्य अमेरिका अफगानिस्तान में आतंकवादी खतरे को रोकने के लिए हवाई हमले करने के अपने अधिकारों को बनाए हुए है, भले ही उसके जमीनी सैनिकों ने 20 साल के युद्ध को समाप्त करते हुए एक महीने पहले देश छोड़ दिया हो।

''पाकिस्तान को लेकर चिंता''

''पाकिस्तान को लेकर चिंता''

पेंटागन के प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा कि, ''हम आतंकवाद को लेकर लंबे समय से पाकिस्तान के साथ अपनी चिंताओं को लेकर बहुत ईमानदार रहे हैं, जो पाकिस्तान की सीमा के अंदर मौजूद हैं, और जिन्हें मजबूत किया गया है''। पेंटागन ने कहा कि, पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की चिंताएं आज भी मौजूद हैं। पेंटागन प्रवक्ता जॉन किर्बी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को कहा कि, ''अमेरिका के नेता पाकिस्तान के साथ अपनी चिंताएं साझा कर रहे हैं और 'स्पष्ट बातचीत' कर रहे हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकते कि अफगानिस्तान के पड़ोसी के तौर पर पाकिस्तान अपनी समानता और जिम्मेदारियों को बनाए रखे।

''पाकिस्तानी भी बना शिकार''

''पाकिस्तानी भी बना शिकार''

पेंटागन के प्रेस सचिव ने कहा कि, "मुझे लगता है कि यह याद दिलाना जारी रखना महत्वपूर्ण है कि पाकिस्तानी लोग, उसी तरह, उन समूहों से और उसी सीमा पर आतंकवादी खतरों का शिकार हुए हैं।" पेंटागन ने कहा कि, ''उदाहरण के तौर पर दुनियाभर के कई सरकारों ने, राजनीतिक पार्टियों ने हमेशा से कहा है कि पाकिस्तान कई आतंकवादी संगठनों के लिए पनाहगार बना हुआ है, यहां तक कि अलकायदा को भी पाकिस्तान समर्थन देता है।'' उन्होंने कहा कि, ''अफगानिस्तान की पिछली अशरफ गनी सरकार, जिसे अमेरिका का समर्थन प्राप्त था, उन्होंने खुले तौर पर कई बार कहा कि तालिबान को पाकिस्तान मदद दे रहा है, तालिबान के आतंकवादियों के लिए सुरक्षित जन्नत बना हुआ है और उन्हें मेडिकल सुविधाएं भी उपलब्ध करवाता है''।

पाकिस्तान पर कसता शिकंजा

पाकिस्तान पर कसता शिकंजा

पिछले एक हफ्ते से अमेरिका में लगातार पाकिस्तान को लेकर बात हो रही है, जिसमें अफगानिस्तान पर बिजली की गति से तालिबान के कब्जे के पीछे पाकिस्तान का बड़ा हाथ बताया जा रहा है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के फौरन बाद पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख फैज हमीद ने काबुल की गोपनीय यात्रा की थी और तालिबान के नेताओं के साथ बैठकें की थीं, जिसको लेकर कई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों के साथ साथ अमेरिका का भी मानना है कि काबुल में तालिबान के कब्जे के पीछे इस्लामाबाद की बहुत बड़ी भूमिका है। अमेरिका के कई खुफिया अधिकारियों ने जमा की गई अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ''अफगानिस्तान पतन के पीछे पाकिस्तान का बहुत बड़ा हाथ है और उसके पीछे का एक बड़ा मकसद भारत को असहज करना भी है''।

''पाकिस्तान के लिए भी घातक''

''पाकिस्तान के लिए भी घातक''

सुरक्षा अधिकारियों की तरफ से कहा गया है कि, अफगानिस्तान में पाकिस्तान ने तालिबान को सत्ता तक पहुंचाने में मदद कर अपने लिए बहुत बड़ी मुसीबत मोल ले ली है और पाकिस्तान का ये खेल उसके लिए घातक हो सकता है। पिछले हफ्ते आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, अफगानिस्तान की युद्धग्रस्त भूमि से अमेरिकी सेना के हटने और तालिबान द्वारा सत्ता पर कब्जा करने के बाद पाकिस्तान में आतंकी हमले चार साल में अधिकतम स्तर तक पहुंच गये हैं।

पाकिस्तान में उच्चतम स्तर पर आतंकवाद

पाकिस्तान में उच्चतम स्तर पर आतंकवाद

दक्षिण एशिया आतंकवाद पोर्टल द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जा होने के बाद कम से कम 35 आतंकवादी हमले पिछले करीब डेढ़ महीने में हुए हैं, जिनमें करीब 52 नागरिक मारे गये हैं, जो फरवरी 2017 के बाद सबसे ज्यादा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अब आरोप लगाया है कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान विरोधी तत्वों को पनाह देता है। जिसमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जिसे पाकिस्तानी तालिबान भी कहते हैं और अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी भी शामिल है, लेकिन इसी इमरान खान ने तालिबान की तारीफ करते हुए कहा था कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियों को तोड़ दिया है।

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