पार्किंसंस की बीमारी का अब नहीं सताएगा डर! घर बैठे खास डिवाइस का राडार कर लेगा 'डिटेक्ट'
नई दिल्ली, 27 सितंबर। मेडिकल साइंस के क्षेत्र के साइंटिस्ट्स ने एक खास डिवाइस तैयार की है जिससे एक गंभीर बीमारी का पताया लगाया जा सकता है। ये डिवाइस यूएस की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इंजीनियर्स ने तैयार किया है। ये घर पर पार्किंसंस बीमारी को ट्रैक किया जा सकता है।

राउटर के आकार की डिवाइस
ये खास डिवासइस विशेष सिग्नल के आधार पर कार्य करती है। ये साइज में बेहद छोटी है। इसके कहीं भी रखा जा सकता है। डिवाइस का आकार वाई-फाई राउटर की साइज का है। ये डिवाइस रेडियो सिग्नल का उपयोग करके रोगी के शरीर में बीमारी से जुड़े डेटा जुटाती है।

50 रोगियों पर हुआ टेस्ट
पार्किंसंस को डिटेक्ट करने वाली डिवाइस मशीन- लर्निंग एल्गोरिदम का इस्तेमाल करती है। डिवाइस बनाने वाले शोधकर्ताओं की टीम ने 50 प्रतिभागियों के साथ एक साल का घर पर अध्ययन किया, जिनमें से 34 को पार्किंसंस था। डिवाइस में एकत्र डेटा के विश्लेषण से पता चला के इसके रिजल्ट सही थे। पाया गया कि ये डिवाइस पार्किसंस को अधिक प्रभावी ढंग से ट्रैक कर सकती है।

रेडियो सिग्नल के आधार पर करती है काम
शोधकर्ताओं के अनुसार डिवाइस रेडियो सिग्नल का उपयोग करती है। ये घर में अन्य वायरलेस उपकरणों के सिग्नल को प्रभावित नहीं करती। साइंटिस्ट्स ने कहा कि जब रेडियो सिग्नल दीवारों और अन्य ठोस वस्तुओं से गुजरते हैं, तो वे हमारे शरीर में पानी के कारण प्रवेश करते हैं। डिवाइस कमरे में घूम रहे रोगी के गति का भी पता लगा लेती है। स्टडी के असिस्टेंट चीफ गुओ झांग के अनुसार, डिवाइस ये सभी डेटा डिवाइस में फीड होते हैं। डिवाइस के डेटा एनालिसिस करने से पता चला कि ये वास्तवित डेटा के बिल्कुल नजदीक है यानी बहुत कम अंतर है।

पार्किंसन दुनिया में तेजी बढने वाला रोग
विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ने वाली न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में से एक है। इसकी पहचान कर पाना दुनिया भर में एक कठिन चुनौती बनी हुई है। ऐसे में अमेरिका की मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के इंजीनियरों ने इसे ट्रैक करने का एक तरीका खोजा है। इस नए डेवलपमेंट के साथ बीमारी का इलाज समय पर किया जा सकेगा। ये डिवाइस खासकर उनके लिए सबसे अधिक उपयोगी होगी जो शहरों और अस्पतालों से दूर रहते हैं।

क्या है पार्किंसन?
पार्किंसंस रोग एक मस्तिष्क विकार है। इसमें मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तन, नींद की समस्या, अवसाद, स्मृति कठिनाइयों और थकान जैसी समस्या होती है। इस रोग की पहचान करने के लिए बनाई गई डिवाइस से जुड़ी स्टडी के लेखक दीना काताबी के अनुसार, " ये डिवाइस घर में मरीज की निगरानी कर सकता है। इससे बीमारी की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। जो पार्किंसन के रोगी रूटीन चेकअप कराना मुश्किल होता है उनके लिए ये डिवाइस अहम है।"












Click it and Unblock the Notifications