पाकिस्तानी मौलानाओं ने आम को घोषित किया अहमदिया मुसलमान, तोड़े बोतल, मैंगो जूस हुआ हराम

Pakistan Mango: पाकिस्तान में अब आम को भी मजहब से जोड़ दिया गया है और कुछ मौलानाओं ने आम के जूस को हराम ठहरा दिया है। घोर कट्टरवादी पाकिस्तान में कोला और शीतल पेय का भी एक मजहब घोषित कर दिया गया है।

और, यदि कोई शीतल पेय पदार्थ, इस्लाम के प्रमुखों के मुताबिक नहीं है, प्यास बुझाने वाले, पेय पदार्थों को भी चरमपंथी इस्लामी कट्टरपंथियों का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, जैसा इस वक्त अभी पाकिस्तान में मैंगो जूस के साथ हो रहा है।

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अहमदिया घोषित किया गया आम

पाकिस्तान में अहमदिया मुसलमानों को मुसलमान ही नहीं माना जाता है और उनके खिलाफ पाकिस्तान में आए दिन हमले होते रहते हैं। पाकिस्तान के संविधान में भी अहमदिया को गैर-मुसलामन घोषित किया गया है और उनके तमाम बड़े अधिकार छीन लिए गये हैं।

वहीं अब, पाकिस्तान से सामने आए एक दिलचस्प और परेशान करने वाले वीडियो में अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय के स्वामित्व वाले एक शीतल पेय पर जुर्माना लगाया गया है। पाकिस्तान में पिछले एक दशक से ब्रांड बन चुके शीतल पेय कंपनी शेज़ान के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं और पाकिस्तानी मौलाना, मैंगो जूस को अहमदिया बताकर उसका बहिष्कार कर रहे हैं।

पाकिस्तान के कई हिस्सों में शेज़ान मैंगो जूस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जबकि कई जगहों पर उसका बहिष्कार किया जा रहा है, क्योंकि यह मैंगो जूस, एक अहमदी के स्वामित्व वाली कंपनी से है।

पाकिस्तान के मौलानाओं ने आम को ही अहमदी मुसलमान बताना शुरू कर दिया है। शेज़ान पेय का बहिष्कार केवल आस्था के आधार पर भेदभाव है।

आपको बता दें, कि शेज़ान, जिसकी स्थापवा 1964 में हुई थी, वो जूस, शीतल पेय, सिरप, स्क्वैश, जैम, सॉस, केचप, चटनी और अचार बनाती है, जिसमें एक लोकप्रिय आम के स्वाद वाला जूस भी शामिल है जो पाकिस्तानी बच्चों का पसंदीदा है।

पाकिस्तान में शेज़ान के ख़िलाफ़ अभियान अक्सर चलते रहते हैं और चरमपंथी, पेशावर में सामान रखने वाली निजी दुकानों और कंपनी के डिलीवरी वैनों और उनके ड्राइवरों को निशाना बनाते रहते हैं। वहीं, अब मैंगो जूस को ही अहमदी बता दिया गया है और उसका बहिष्कार किया जा रहा है।

अहमदी कौन हैं?

मिर्ज़ा गुलाम अहमद द्वारा 19वीं शताब्दी में स्थापित एक पुनरुत्थानवादी इस्लामी आंदोलन, अहमदियों को लंबे समय से पाकिस्तान और व्यापक क्षेत्र में उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। 1974 में जब ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो प्रधान मंत्री थे, तब पाकिस्तानी संसद द्वारा उन्हें गैर-मुस्लिम घोषित कर दिया गया था।

मई 2010 में, लाहौर की दो मस्जिदों पर हुए बम हमलों में 85 से अधिक अहमदी मारे गए थे।

25 जुलाई 2023 को, पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अल्पसंख्यक अहमदी समुदाय के एक पूजा स्थल की मीनारों को अज्ञात लोगों ने नष्ट कर दिया और इसकी दीवारों पर "घृणित" भित्तिचित्र बना दिए। पिछले दिनों भारत में भी अहमदी मुसलमानों को लेकर घृणा फैलाने की कोशिश की गई, लेकिन सरकार ने काफी सख्त एक्शन लिया है।

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