भारत के खिलाफ चीन से परमाणु पनडुब्बी बनवा रहा पाकिस्तान, Indian Navy से मुकाबले की तैयारी, जानें पूरा प्लान
Pakistan Nuclear Submarine: नरेन्द्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने के बाद नवाज शरीफ ने बधाई संदेश भेजकर शांति का कबूतर उड़ाने की कोशिश की है, लेकिन उनके शांति संदेश के पीछे खतरनाक धोखा छिपा हो सकता है और नई रिपोर्ट से पता चलता है, कि पाकिस्तान समंदर में परमाणु पनडुब्बी तैनात करने की प्लानिंग कर रहा है।
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट से पता चलता है, कि पाकिस्तान के लिए चीन जिस हंगोर-क्लास पनुडुब्बी का निर्माण कर रहा है, पाकिस्तान की सेना उस पनडुब्बी को परमाणु मिसाइल से लैस करना चाहती है, ताकि भारत के खिलाफ उसकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत हो।

पाकिस्तान की सेना चाहती है, कि पनडुब्बी का निर्माण कुछ इस तरह से किया जाए, जिसमें परमाणु मिसाइलों की तैनाती की जा सके।
चीन, पाकिस्तान के लिए S-26 हंगोर क्लास पनडुब्बी का निर्माण कर रहा है, लेकिन आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान के लिए उस प्रोजेक्ट को फंड करना मुश्किल हो गया, लिहाजा पनडुब्बी के निर्माण में देरी हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, चीन पिछले साल के अंत तक पाकिस्तान को यूआन क्लास की पनडुब्बी की डिलीवरी देने वाला था और उस प्रोजेक्ट में भी देरी आई और पिछले महीने चीन ने पाकिस्तान को इस पनडुब्बी की डिलीवरी दी है।
ऐसी रिपोर्ट है, कि चीन पाकिस्तान के लिए 8 हंगोर क्लास पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है और ये सभी पनडुब्बियां एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानि AIP टेक्नोलॉजी से लैस होंगी, जिससे पाकिस्तान की नेवी शक्तिशाली होगी। माना जा रहा है, कि चीन इन आठ पनडुब्बियों को 2030 के अंत तक पाकिस्तान को सौंप देगा, जिससे पाकिस्तान के पास AIP टेक्नोलॉजी से लैस 11 पनडुब्बियां हो जाएंगी, जो भारत के लिए बड़ा खतरा होगा।
रिपोर्ट्स से पता चलता है, कि हंगोर क्लास की पनडुब्बियां शायद पूरी तरह से पारंपरिक पनडुब्बी नहीं होगी, बल्कि वो पाकिस्तान की सेकंड स्ट्राइक कैपिबिलिटी के लिए होगी। पाकिस्तानी नौसेना के रिटायर्ड अधिकारियों ने पाकिस्तान की सरकारी टेलीविजन नेटवर्क को बताया है, कि "पाकिस्तान की कोशिश सेकंड स्ट्राइक कैपिबिलिटी" को विकसित करना है।
डिफेंस मैग्जीन कुवा, जो पाकिस्तान डिफेंस को लेकर रिपोर्ट्स करती है, उसकी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान के रिटायर्ट वाइस एडमिरल अहमद सईद और रिटायर्ड रियर एडमिरल सलीम अख्तर ने हंगोर क्लास पनडुब्बियों के अधिग्रहण पर चर्चा की है, जो पाकिस्तान चीन से खरीदने वाला है। वाइस एडमिरल सईद ने चर्चा के दौरान संकेत दिया है, कि ये पनडुब्बियां पाकिस्तान की आक्रामक क्षमता में एक 'हाइब्रिड' हिस्सा होंगी।
कुवा की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि ये पनडुब्बी विशुद्ध रूप से पारंपरिक हमलावर पनडुब्बी होगी, जो परमाणु ऊर्जा से संचालित होगी, जैसे की परमाणु ऊर्जा से संचालित होने वाली दूसरी पनडुब्बियां होती हैं। इसे एक तरह से न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन (SSN) या फिर न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक सबमरीन (SSBN) की तरह से डिजाइन किए जाने प्लान है।
हालांकि, डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है, कि हंगोर क्लास की पनडुब्बियों में परमाणु रिएक्टर लैस करना असंभव है, लेकिन पाकिस्तान नौसेना इन भूमिगत जहाजों में सामरिक परमाणु वारहेड (TNWs) तैनात कर सकती है।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारत के रिटायर्ड एयर कमोडोर अनिल जय सिंह कहते हैं, कि "इसे (पनडुब्बी को) परमाणु नाव बनने के लिए रेट्रोफिट नहीं किया जा सकता है। पनडुब्बी रिएक्टर बनाना काफी जटिल होता है। और यहां तक कि चीन के पास भी इतना छोटा रिएक्टर नहीं होगा, जिसे हंगोर (श्रेणी की पनडुब्बी) पर फिट किया जा सके। अगर चीन इसे टीएनडब्लू से लैस करने का इरादा रखता है, तो यह एक अलग मामला है।"
पूर्व भारतीय नौसेना पनडुब्बी चालक ने संकेत दिया, कि परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी बनाना एक महंगा प्रयास है, और भारत ने भी इस पर काम शुरू नहीं किया है।

TNW टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान ने साल 1998 परमाणु क्षमता हासिल की थी और उसके बाद से ही वो लगातार भारत के खिलाफ मजबूती हासिल करने के लिए TNW टेक्नोलॉजी पर काम कर रहा है। TNW छोटे और ज्यादा आसानी से पोर्टेबल होते हैं, और स्ट्रैटजिक डेटरेंट के बजाय युद्ध के मैदान में उपयोग करने के लिए आसान होते हैं। पाकिस्तान का इरादा TNW का इस्तेमाल भारतीय सेना के आक्रमण करने को काउंटर करने के लिए है, ताकि ताकि पूर्ण पैमाने पर रणनीतिक परमाणु युद्ध शुरू किए बिना, भारतीय सेना को जल्दी से हराया जा सके।
हंगोर-क्लास SSP को लेकर माना जाता है, कि ये बाबर-3 SLCM मिसाइल के एक वेरिएंट का उपयोग करेगा, जिसका पाकिस्तान ने पहली बार 2018 में परीक्षण किया था। बाबर-3 को लेकर पाकिस्तान कहता है, कि उसकी मार करने की क्षमता 450 किलोमीटर है।
बाबर-3 मिसाइल टेस्ट के बाद पाकिस्तानी सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इस बात पर जोर दिया था, कि समुद्र से प्रक्षेपित क्रूज मिसाइल "विश्वसनीय सेकंड-स्ट्राइक क्षमता" का एक प्रमुख घटक है। वहीं, कुवा में चर्चा के दौरान वाइस एडमिरल सईद का तर्क ये था, कि हंगोर क्लास पूरी तरह से समर्पित एक परमाणु प्लेटफॉर्म नहीं है।
समुद्र में पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता क्या है?
पाकिस्तानी नौसेना का लंबे वक्त से समुद्र के अंदर से परमाणु हथियार दागने की क्षमता हासिल करने का इरादा रहा है, लेकिन पाकिस्तान के पास ऐसे प्लेटफॉर्म नहीं हैं, जिसके जरिए वो समुद्र के अंदर से परमाणु हथियार का इस्तेमाल कर सके।
कुवा रिपोर्ट में कहा गया है, कि "पाकिस्तानी नौसेना को समंदर के अंदर से परमाणु हथियार चलाने की क्षमता हासिल करने के लिए एक से दो पेटफॉर्म की जरूरत होगी और हंगोर क्लास, कुछ समय के लिए इस भूमिका को संभाल सकता है, जबकि पारंपरिक ए2/एडी मिशन इसकी फर्स्ट स्ट्राइक भूमिका के लिए होगी।"
वाइस एडमिरल सईद ने जोर देकर कहा, कि इस्लामाबाद को हंगोर-क्लास पनडुब्बी पर जाकर ही नहीं रुकना चाहिए, बल्कि एक समर्पित रणनीतिक प्लेटफॉर्म की तलाश करनी चाहिए। पाकिस्तान के लिए समर्पित समुद्र-आधारित परमाणु क्षमता के लिए संभावित ढांचे के लिए बड़ी संख्या में इकाइयों की जरूरत नहीं है। पाकिस्तानी नौसेना के लिए केवल दो नावें पर्याप्त हो सकती हैं, क्योंकि पाकिस्तान का समुद्री इलाका भारत की तरह विशाल नहीं है।
हालांकि, कमोडोर अनिल जयसिंह को पाकिस्तानी नौसेना के पास सिर्फ एक प्लेटफॉर्म होने से कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि एक नाव की क्षमता काफी सीमित होती है और भारत को इसकी जानकारी होती रहेगी, कि इकलौता प्लेटफॉर्म कब रखरखाव और मरम्मत के लिए अपने बेस को छोड़ रहा है या फिर इस प्लेटफॉर्म का मरम्मत किस बंदरगाह पर हो रहा है। और अगर चीन की पीएलएएन (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी-नेवी) को लगता है, कि पाकिस्तान भविष्य में इस क्षमता को विकसित कर सकता है या वहन कर सकता है, तो वह पाकिस्तान को एक नाव लीज पर दे सकता है। हालांकि इस समय, यह बहुत ही असंभव लगता है।"
क्या भारतीय नौसेना को चिंता करनी चाहिए?
पाकिस्तान के पास फिलहाल इतनी क्षमता नहीं है, कि वो परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी का डिजाइन और डेवलपमेंट कर सके, लेकिन वाइस एडमिरल सईद के बयानों से संकेत मिलता है, कि पाकिस्तान की नौसेना इस विचार का स्टडी कर रही है। और इस्लामाबाद दीर्घकालिक रणनीति के तहत परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रम को आगे बढ़ा सकता है।
पाकिस्तान को परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बी से लैस करने से चीन को भी लाभ हो सकता है, जो चाहता है, कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में पाकिस्तान, भारत को ज्यादा से ज्यादा चुनौती दे सके। अब तक चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान और म्यांमार को पनडुब्बियों की सप्लाई करता रहा है, जिससे IOR में पानी के नीचे की जगहें बहुत ही विवादित क्षेत्र बन गई हैं।
वहीं, TNW टेक्नोलॉजी से लैस पाकिस्तानी पनडुब्बियां, किस तरह से भारत के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं, कैप्टन अनुराग बिसेन (रिटायर्ड) ने कहा, कि "भारतीय नौसेना तब तक अपने (विमान) वाहक को तैनात नहीं कर पाएगी, जब तक कि पाकिस्तानी परमाणु पनडुब्बी का पता नहीं चल जाता।"
भारत अपने दो आक्रामक परमाणु क्षमता वाले देशों चीन और पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा लचीला निरोधक क्षमत अपना ररहा है। 11 मार्च को नई दिल्ली ने मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल (MIRV) तकनीक से लैस अग्नि-V नामक लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का कामयाब परीक्षण किया था। विशेषज्ञों का तर्क है, कि MIRV तकनीक, जो परमाणु हथियार युक्त मिसाइलों की उत्तरजीविता को बढ़ाती है, वो पहले हमलों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।
कमोडोर सिंह का मानना है, कि "परमाणु हथियार से लैस टारपीडो या मिसाइल का खतरा भारत के लिए चिंता पैदा करता है, लेकिन TNW का इस्तेमाल करने की बात कहना जितना आसान है, वो करना उतना आसान नहीं है। पाकिस्तान अपने TNW का इस्तेमाल करने की धमकी देता रहता है, लेकिन वो इस बात का भी आकलन कर रहा होगा, कि भारत की तरफ से प्रतिक्रिया क्या हो सकती है? भारत का परमाणु सिद्धांत ये कहता है, कि अगर कोई पहला हमला करता है, तो भारत जवाबी कार्रवाई करेगा, लिहाजा पाकिस्तान आग में हाथ डालने की कोशिश नहीं करेगा।
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