Artificial rain: पाकिस्तान को लाहौर में क्यों करवानी पड़ी आर्टिफिशियल बारिश? UAE ने भेजे थे 2 स्पेशल विमान
artificial rain in pakistan, दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक लाहौर में शनिवार को पहली कृत्रिम बारिश की गई। पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार स्मॉग को साफ करने के लिए कृत्रिम बारिश का इस्तेमाल किया गया।
पाकिस्तान ने संयुक्त अरब से मिले बारिश का इस्तेमाल करते हुए लाहौर के धुंध को हटाने के लिए कृत्रिम बारिश की। इस कृत्रिम बारिश से लाहौर की आबोहवा में थोड़ा सुधार आया है। लाहौर पिछले कई दिनों से भीषण स्मॉग की चपेट में था।

जियो न्यूज के अनुसार, अंतरिम मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि क्लाउड सीडिंग उपकरण से लैस विमानों ने लाहौर के 10 क्षेत्रों में उड़ान भरी। लाहौर के 10 इलाकों में किया गया यह प्रयोग सफल रहा। हालांकि, खतरनाक स्तर से थोड़ा सुधार हुआ है। लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है।
बता दें कि, लाहौर अक्सर दुनिया के सबसे प्रदुषित शहरों की सूची में शामिल रहता है। आईक्यू एयर के अनुसार 18 दिसंबर तक लाहौर में एक्यूआई का स्तर 192 था जो अस्वस्थ्य श्रेणी में है। पिछले कुछ वर्षों में निम्न-श्रेणी के डीजल धुएं, मौसमी फसल जलने से निकलने वाले धुएं और ठंडे सर्दियों के तापमान के मिश्रण के कारण पाकिस्तान में वायु प्रदूषण बदतर हो गया है।
अक्टूबर में, पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार AQI के स्तर को नीचे लाने के लिए कृत्रिम बारिश का उपयोग करने के विचार पर विचार कर रही थी। यूएई से मिले तोहफे से पड़ोसी देश ने बारिश कराने के लिए 48 फ्लेयर्स वाले दो विमानों का इस्तेमाल किया। अंतरिम मुख्यमंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि, यूएई से टीमें करीब 10 से 12 दिन पहले दो विमानों के साथ यहां पहुंचीं। उन्होंने बारिश कराने के लिए 48 फ्लेयर्स का इस्तेमाल किया।
क्या है कृत्रिम वर्षा?
कृत्रिम बरिश को क्लाउड सीडिंग भी कहा जाता है। इसमें केमिकल के जरिए बारिश करायी जाती है। एक विमान से बादलों में रसायनों को छिड़ककर मौसम संशोधन किया जाता है। ये रसायन फिर बारिश की बूंदों या बर्फ के टुकड़ों के निर्माण को बढ़ावा देते हैं। बेहद प्रदूषित हवा होने की स्थिति में कई देशों ने जरूरत पड़ने पर कृत्रिम बारिश करवाई है।
चीन की राजधानी बीजिंग में भी कृत्रिम बारिश करवाई जा चुकी है। वहां होने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजन से पहले कृत्रिम बारिश कराने की खबरें आती रही हैं। चीन में 2008 में बीजिंग ओलंपिक में क्लाउड सीडिंग उपकरण से लैस 21 विमानों की मदद से कृत्रिम बारिश कराई गई थी। दुनिया में सबसे पहले कृत्रिम बारिश का कॉन्सेप्ट 1945 में विकसित किया गया था। आज दुनिया के 50 देशों में इस कॉन्सेप्त का इस्तेमाल किया जाता है।
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