Pakistan Toshakhana: नवाज, जरदारी, इमरान खान... हर किसी ने लूटा पाकिस्तान, पहली बार रिकॉर्ड सार्वजनिक
इमरान खान के चुनाव लड़ने पर पाकिस्तान चुनाव आयोग रोक लगा चुका है, वहीं अदालतों में इमरान के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं। वहीं, अब सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या लिस्ट में जिन नेताओं के नाम हैं, उनके खिलाफ भी मुकदमा चलेगा?

Pakistan Toshakhana record Reveal: पाकिस्तानी कोर्ट के आदेश के बाद पहली हार पाकिस्तान सरकार ने उस रिकॉर्ड को सार्वजनिक किया है, जिसने बड़े-बड़े नेताओं को एक्सपोज कर दिया है। लाहौर हाईकोर्ड के सख्त आदेश के बाद आखिरकार शहबाज शरीफ की सरकार ने तोशाखाना रिकॉर्ड को सार्वजनिक कर दिया है और इस रिकॉर्ड से पता चलता है, कि बड़े बड़े नेताओं ने देश के साथ किस हद तक बेइमानी की है और किस तरह से देश को लूटा है। इस रिकॉर्ड को देखने के बाद आसानी से समझा जा सकता है, कि आखिर पाकिस्तान भीषण आर्थिक संकट में क्यों फंसा रहता है। लाहौर हाइकोर्ट के आदेश के बाद शहबाज शरीफ की सरकार ने साल 2002 से 2022 तक देश के राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, संघीय कैबिनेट सदस्यों, राजनेताओं, नौकरशाहों, सेवानिवृत्त जनरलों, न्यायाधीशों और पत्रकारों को विदेशों से मिले गिफ्ट का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया है। इस रिकॉर्ड को देखने के बाद चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं और हर किसी की बेइमानी सार्वजनिक हो गई है।
तोशाखाना रिकॉर्ड में सबे एक्सपोज
पाकिस्तान के बड़े बड़े नेता कैसे एक्सपोज हुए हैं, इसे बताने से पहले जान लीजिए, आखिर तोशाखाना मामला क्या है। दरअसल, सार्वजनिक जीवन में रहने वाले किसी भी सरकारी अधिकारी या मंत्रियों या देश के प्रमुखों को जो भी उपहार मिलते हैं, उन उपहारों को सरकार के खजाने में रिकॉर्ड करवाना होता है और उसे ही तोशाखाना कहा जाता है। भारत में भी तोशाखाना डिपार्टमेंट है और पाकिस्तान में भी। अगर किसी नेता को मिला हुआ गिफ्ट अपने घर ले जाना है, तो फिर उसे उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। लेकिन, पाकिस्तान के दर्जनों बड़े नेताओं ने बिना कोई कीमत चुकाए, या काफी कम कीमत चुकाकर वो गिफ्ट ले लिया। इससे सरकरी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। इमरान खान का मामला पिछले एक साल से काफी गरमाया हुआ है, क्योंकि तोशाखाना केस में फंसने के बाद पाकिस्तानी चुनाव आयोग, उनके चुनाव लड़ने पर भी प्रतिबंध लगा चुका है। वहीं, अब लाहौर हाईकोर्ट ने एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार को आदेश दिया था, कि वो तोशाखाना के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करे। पहले तो शहबाज शरीफ ने काफी बहाने बनाए और तोशाखाना को 'गोपनीय डिपार्टमेंट' बताने की कोशिश की, लेकिन हाईकोर्ट की फटकार के बाद मजबूरन उन्हें तोशाखाना रिकॉर्ड सार्वजनिक करना पड़ा।

कौन कौन से नेता निकले बेइमान?
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, तोशाखाना रिकॉर्ड से पता चला है, कि देश के मौजूदा राष्ट्रपति डॉ आरिफ अल्वी, मौजूदा प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी, दिवंगत सैन्य तानाशाह परवेज मुशर्रफ, पूर्व प्रधानमंत्री शौकत अजीज, पूर्व पीएम यूसुफ रजा गिलानी, पूर्व पीएम शाहिद खाकान अब्बासी, पूर्व पीएम राजा परवेज अशरफ, पूर्व पीएम जफरुल्ला खान जमाली, सीनेट के अध्यक्ष सादिक संजरानी, वित्त मंत्री इशाक डार, विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो-जरदारी, पूर्व गृहमंत्री शेख राशिद अहमद, खुर्शीद कसूरी, अब्दुल हफीज शेख, पूर्व वित्तमंत्री जहांगीर तरीन, पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बेइमानी की है और सरकारी खजाने को चूना लगाया है। यानि, हमाम में सब नंगे निकले हैं और कोई भी ऐसा नेता नहीं है, जो बेदाग निकला हो।
तोशाखाना रिकॉर्ड से क्या पता चलता है?
दस्तावेजों के मुताबिक, कुछ उपहारों को छोड़कर ज्यादातर उपहार पाकिस्तान के नेताओं ने बिना कोई कीमत चुकाए अपने घर में रख लिए। रिकॉर्ड से पता चलता है, कि पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और पूर्व पीएम नवाज शरीफ को विदेश यात्रा के दौरान एक-एक बुलेटप्रूफ गाड़ी मिली थी और उन्होंने उन गाड़ियों की काफी कम कीमत चुकाकर अपने पास रख ली। वहीं, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष इमरान खान और उनकी पत्नी को पांच बेशकीमती कलाई घड़ियां, गहने और अन्य सामान मिले थे, जिसे उन्होंने जमा नहीं कराया। वहीं, परवेज मुशर्रफ और शौकत अजीज ने बिना एक पैसा चुकाए सैकड़ों विदेशी उपहार अपने पास रख लिए। यानि, सिर्फ इमरान खान अकेले ही गुनहगार नहीं हैं, बल्कि जिस नेता और जिन अधिकारियों को जहां भी मौका मिला, उन्होंने पाकिस्तान को लूटा।
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आसिफ अली जरदारी
तोशाखाना रिकॉर्ड से पता चला है, कि पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 26 जनवरी 2009 को एक बीएमडब्ल्यू 760 ली-व्हाइट को तोशाखाना में जमा कराने के बजाए अपने ही पास रखा था। इस गाड़ी की तत्कालीन कीमत 2 करोड़ 73 लाख रुपये के करीब थी, जबकि इसके लिए आसिफ अली जरदारी ने तोशाखाना को सिर्फ 40 लाख रुपये ही दिए। वहीं, मार्च 2011 में, उन्होंने घड़ी और कुछ अन्य वस्तुओं के लिए सिर्फ 158,250 रुपये का भुगतान किया है और लाखों रुपये डकार लिए। वहीं, जून 2011 में उन्होंने 12 लाख 50 हजार रुपये की एक घढ़ी के लिए तोशाखाना को सिर्फ 1 लाख 80 हजार रुपये ही दिए। वहीं, आसिफ अली जरदारही ने अक्टूबर 2011 में एक घड़ी और एक बंदूक के लिए 321,000 रुपये का भुगतान किया था और 10 लाख रुपये की कार्टियर कलाई घड़ी अपने पास रख ली थी।

नवाज शरीफ की बेइमानी
पीएमएल-एन के सर्वोच्च नेता नवाज शफीफ को 20 अप्रैल 2008 को एक मर्सिडीज बेंज कार गिफ्ट में मिली थी, जिसकी कीमत उस समय 4.25 मिलियन रुपये थी। लेकिन, दस्तावेज़ के अनुसार, पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने सिर्फ 60 लाख रुपये देकर कार को अपने पास रख लिया। वहीं, दस्तावेज में इस बात का जिक्र नहीं किया गया है, कि नवाज शरीफ ने किस हैसियत से वो कार अपने पास काफी कम कीमत पर रख लिया था। अगर वो कार तोशाखाना के जरिए बेची जाती, तो खजाने को कम से कम 4 करोड़ रुपये या नीलामी में उससे भी कहीं ज्यादा रुपये मिल सकते थे।

इमरान खान निकले सबके गुरू
इमरान खान को 38 लाख रुपये मूल्य की ग्रेफ घड़ी के साथ साथ पांच कीमती कलाई घड़ियां मिली थीं। लेकिन, अक्टूबर 2018 में उन्होंने सिर्फ साढ़े सात लाख रुपये में सभी घड़ियां ले लीं। आश्चर्य तो इस बात को लेकर है, कि उन्होंने इन सभी घड़ियों को बाद में नीलाम कर दिया और उससे 2 करोड़ रुपये कमा लिए। इमरान खान साल 2018 में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद वे अलग-अलग देशों की यात्रा पर गए। यूरोप और अरब देशों की यात्रा करने के दौरान उन्हें कई कीमती उपहार मिले थे। इन गिफ्ट्स में एक Graff घड़ी, कफलिंक का एक जोड़ा, एक महंगा पेन, एक अंगूठी और चार रोलेक्स घड़ियां सहित कई अन्य उपहार भी थे। इमरान खान ने इन उपहारों को तो तोशेखान में जमा करा दिया था, लेकिन बाद में इन्हें सस्ते दामों पर खुद खरीद लिया और उन्हें खूब मुनाफे में बेचा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए उनकी सरकार ने बाकायदा कानूनी अनुमति दी थी। लेकिन, जब मामला प्रकाश में आया, और इमरान खान पर दबाव बढ़ा, तो उन्होंने कुबूल किया कि तोशाखान से इन सभी गिफ्ट्स को 2.15 करोड़ रुपए में खरीदा था, बेचने पर उन्हें 5.8 करोड़ रुपए मिले थे। बाद में खुलासा हुआ, कि इमरान खान ने ये गिफ्ट्स बेचकर 20 करोड़ से भी अधिक पाकिस्तानी रुपये कमाए थे।
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