पाकिस्तान में बनने जा रही केयरटेकर सरकार, शहबाज शरीफ देंगे इस्तीफा, जानिए कैसी होगी सूरत, कैसे बनेगा PM?
Pakistan Caretaker Government: पाकिस्तान सरकार की तरफ से संकेत दे दिए गये हैं, कि देश में अगला लोकसभा चुनाव अक्टूबर में कराए जाएंगे और संविधान के मुताबिक, शहबाज शरीफ ने कहा है, कि वो अगले महीने, यानि अगस्त में अपना पद छोड़ देंगे।
पाकिस्तान में निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए संविधान के तहत एक केयरटेकर गवर्नमेंट की नियुक्ति की जाती है, जिसका काम चुनाव की देखभाल करना होता है। लिहाजा, देश में एक केयरटेकर सरकार की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है और शहबाज शरीफ मंथन कर रहे हैं, कि केयरटेकर प्रधानमंत्री किसे बनाया जाए।

पाकिस्तान में केयरटेकर सरकार
शनिवार को बिलावल भुट्टो जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और शहबाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज (पीएमएल-एन) की बैठक हुई है, जिसमें केयरटेकर सरकार बनाने पर बातचीत की गई है। पाकिस्तान की राजनीति में अब यही दोनों मुख्य पार्टियां बची हैं, क्योंकि इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी, करीब करीब खत्म कर दी गई है।
चुनाव के बाद भी बिलावल भुट्टो और शहबाज शरीफ की पार्टियों के बीच गठबंधन रहेगा, इसका ऐलान कर दिया गया है, यानि अगली सरकार भी इन्हीं दोनों पार्टियों की बनेगी।
जियो न्यूज के मुताबिक, शनिवार को हुई बैठक में दोनों पार्टियों के प्रमुख नेता, अंतरिम सरकार के गठन पर माथापच्ची करने करने के लिए जुटे थे, जिसमें आम चुनावों के लिए भी रणनीति बनाने को लेकर बातचीत की गई है।
पीपीपी के सह-अध्यक्ष आसिफ अली जरदारी ने प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ के साथ उनके मॉडल टाउन आवास पर एक बैठक की, जिसमें देश की समग्र राजनीतिक स्थिति, कार्यवाहक व्यवस्था और अन्य मुद्दों से संबंधित मामलों पर चर्चा की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक घंटे तक चली बैठक के दौरान पूर्व राष्ट्रपति जरदारी ने प्रधानमंत्री के सामने अगस्त के दूसरे हफ्ते में पाकिस्तान के सभी प्रांतों की विधानसभाओं को भंग करने का प्रस्ताव रखा है, जिसपर पीएम शहबाज ने आश्वासन दिया, कि वह इस प्रस्ताव पर सभी गठबंधन सहयोगियों को विश्वास में लेंगे।
वहीं, पाकिस्तानी संसद, जिसे नेशनल असेंबली कहा जाता है, उसका संवैधानिक कार्यकाल 12 अगस्त को पूरा हो रहा है, लेकिन शहबाज शरीफ ने कहा है, कि उनकी सरकार 14 अगस्त को कार्यकाल पूरा करेगी। पीएम शहबाज शरीफ ने देश की स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडा फहराने के लिए ऐसा किया है, क्योंकि पाकिस्तान 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
क्या तय समय पर हो पाएंगे चुनाव?
जियो न्यूज के मुताबिक, सूत्रों ने कहा है कि दोनों नेता अगला आम चुनाव समय पर कराने पर सहमत हुए और उन्होंने "चुनाव में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं करने" की कसम खाई है।
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई है, कि इस बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर किसी रिटायर नौकरशाह की जगह किसी राजनेता को नियुक्त किया जाएगा।
पीपीपी के सह-अध्यक्ष ने अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) सौदे पर भी प्रधानमंत्री की सराहना की।
आईएमएफ ने शुक्रवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) के खाते में 1.2 अरब डॉलर जमा किए, जिससे आर्थिक स्थिरता के लिए नकदी संकट से जूझ रहे देश की उम्मीद बढ़ गई, क्योंकि यह कई महीनों से डिफ़ॉल्ट के कगार पर था।
IMF के कार्यकारी बोर्ड ने नौ महीने के कार्यक्रम के तहत 3 अरब डॉलर के स्टैंड-बाय समझौते (एसबीए) को मंजूरी दे दी। पाकिस्तान ने पिछले महीने IMF के साथ एक कर्मचारी-स्तरीय समझौता किया था, जिससे एक अल्पकालिक समझौता हुआ, जिससे संकटग्रस्त देश को 230 मिलियन की उम्मीद से ज्यादा का ऋण मिला है।
माना जा रहा है, कि पाकिस्तान में इस साल नवंबर में चुनाव हो सकते हैं।
हालांकि, डॉन के मुताबिक सरकार इसे थोड़ा खींच भी सकती है। पाकिस्तान की संविधान के मुताबिक, अगर सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर लेती है, तो फिर 60 दिनों के अंदर चुनाव करवाना अनिवार्य हो जाता है, लेकिन एक दिन पहले भी अगर सरकार नेशनल असेंबली को भंग कर देती है, तो फिर सरकार के पास फिर से चुनाव कराने के लिए 90 दिनों का वक्त मिल जाता है, लिहाजा शहबाज सरकार इस विकल्प की तरफ भी देख रही है।
फिलहाल, नया केयरटकर प्रधानमंत्री कौन बनेगा, इसकी तलाश की जा रही है, लेकिन इस बार अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्री कोई नेता ही बनेगा, क्योंकि शहबाज शरीफ का मानना है, कि अगर किसी टेक्नोक्रेट को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाया जाता है, तो वो अपनी सत्ता को लंबा भी खींच सकता है और शहबाज शरीफ, ये रिस्क नहीं लेना चाहते हैं।
कैसे चुना जाता है केयरटेकर प्रधानमंत्री?
पाकिस्तान के संविधान के तहत, आम चुनाव एक तटस्थ कार्यवाहक सरकार की देखरेख में होने चाहिए, ताकि सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर उपलब्ध हो और चुनाव में किसी तरह की धांधली ना हो पाए।
कार्यवाहक प्रधान मंत्री की नियुक्ति निवर्तमान प्रधान मंत्री और नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता के बीच समझौते से की जाती है।
यदि वे किसी नाम पर सहमत होने में नाकाम रहते हैं, तो प्रधान मंत्री और विपक्ष के नेता एक निश्चित समय अवधि के भीतर एक नाम पर सहमति बनाने के लिए, कुछ नामों का चयन कर उनके नाम एक द्विदलीय समिति को भेजते हैं।
यदि समिति भी विफल हो जाती है, तो वही नाम पाकिस्तान के चुनाव आयोग को भेजे जाते हैं, जो उनमें से एक को प्रधान मंत्री नियुक्त करता है।
कार्यवाहक प्रधान मंत्री देश के मामलों को चलाने के लिए एक मंत्रिमंडल की नियुक्ति करता है, और चुनाव के बाद नए प्रधान मंत्री के शपथ लेते ही उसका कार्यकाल समाप्त हो जाता है।
अभी तक यह स्पष्ट नहीं है, कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री कौन होगा लेकिन राजनीतिक दल सर्वसम्मति से किसी को नियुक्त करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं।
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