ना बैनर पोस्टर्स, ना दिखते हैं उम्मीदवार.. पाकिस्तान चुनाव से पहले जानें इमरान खान के संसदीय क्षेत्र का हाल

Imran Khan News: पाकिस्तानी क्रिकेट के दिग्गज से नेता बने इमरान खान अपने निर्वाचन क्षेत्र और पैतृक मातृभूमि मियांवाली में बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन सड़कों पर लगे राजनीतिक पोस्टरों में उनका चेहरा इस बार नजर नहीं आ रहा है। मियांवली की सड़कों पर उनकी पार्टी के झंडे भी नहीं दिख रहे हैं।

इमरान खान की पार्टी का नाम है, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), लेकिन 8 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले, पाकिस्तान में PTI के बैनर पोस्टर खोजने वाले के लिए आप इनाम का भी घोषणा कर सकते हैं और यकीनन आप जीत जाएंगे, क्योंकि कहीं पर भी पीटीआई का कोई भी नामोनिशान आपको नहीं मिलेगा।

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चुनाव से पहले ही इमरान खान साफ

यानि, जिस पार्टी ने पिछली बार देश में सरकार बनाई थी, उस पार्टी का पाकिस्तान में इस बार नामोनिशान तक मिटा दिया गया है।

इमरान खान ने दो जगहों से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया था, लेकिन उनके नामांकन को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया। वहीं, इमरान खान की पार्टी पीटीआई की चुनाव चिन्ह बैट भी छीन लिया गया, लिहाजा पीटीआई के सभी उम्मीदवार निर्दलीय उम्मीदवार की तरफ चुनावी मैदान में हैं।

इमरान खान से सेना किस हद तक नाराज है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि पीटीआई के 80 प्रतिशत उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गये हैं। कुछ वही उम्मीदवार बचे हैं, जिनके चुनाव जीतने की संभावना काफी कम या नहीं के बराबर है।

मियांवाली में अपने नेता इमरान खान की जगह पीटीआई की तरफ से उम्मीदवारी जताने वाले 61 साल के जमाल अहसान खान कहते हैं, "हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, और मुझे व्यक्तिगत रूप से मौत की धमकियां मिली हैं।"

कुल मिलाकर कहा जा सकता है, कि पाकिस्तान की सेना ने इमरान खान और उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी को मतदान से पहले चुनाव अभियान से लगभग साफ कर दिया है।

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मियांवली है इमरान खान का चुनाव क्षेत्र

इमरान खान, जो इस समय जेल में बंद हैं और दर्जनों कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप के कारण 8 फरवरी को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। उनका दावा है, कि ये मामले राजनीति से प्रेरित हैं।

देश भर में, पीटीआई को रैलियां आयोजित करने से रोक दिया गया है और पाकिस्तानी मीडिया को एडवाइजरी जारी की गई है, कि इमरान खान टीवी पर दिखने नहीं चाहिए। पाकिस्तानी मीडिया को इमरान खान के कवरेज से प्रतिबंधित कर दिया गया है, जिससे पार्टी का अभियान लगभग पूरी तरह से ऑनलाइन हो गया है।

इसके अलावा, चुन-चुनकर उन सभी उम्मीदवारों को धमकियां दी जा रही हैं, जो किसी ना किसी तरह से इमरान खान से जुड़े हुए हैं। लिहाजा, 24 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में चुनावी उत्साह नहीं के बराबर है। पाकिस्तान के लोगों का कहना है, कि उन्हें महसूस ही नहीं हो रहा है, कि देश में चुनाव हो रहे हैं।

पंजाब के मध्य प्रांत में स्थित ग्रामीण जिले मियांवाली से इमरान खान ने अपना राजनीतिक करियर बनाया था और तीन बार सांसद चुने गए।

साल 2018 में हुए चुनाव में इमरान खान की पार्टी ने सबसे ज्यादा सीटें जीती, जिसमें इमरान खान ने देश की जनता से वादा किया था, कि वो वंशवाद की राजनीति और भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर देंगे। जिसकी वजह से इमरान खान के कैम्पेन को भारी समर्थन भी मिला।

मियांवाली में, जहां इमरान खान ने एक अस्पताल और एक विश्वविद्यालय का निर्माण किया है, वहां के स्थानीय समचार पत्र वा-ए-शरर के प्रधान संपादक राणा अमजद इकबाल ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा, कि "इमरान खान, सिर्फ एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं, वह एक नायक हैं।"

उन्होंने कहा, कि "उनका सत्ता विरोधी रूख स्थानीय राजनीति को काफी प्रभावित करता है।"

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इमरान खान को चुनाव से कैसे हटाया गया?

माना जाता है, कि इमरान खान को सत्ता में आने के लिए सेना का समर्थन प्राप्त था, लेकिन उनके नेतृत्व के दौरान उनका साहस बढ़ गया और उन्होंने शक्तिशाली जनरलों के नियंत्रण के खिलाफ जोर देना शुरू कर दिया। लिहाजा, सेना ने अपना समर्थन इमरान खान से छीन लिया और उनके दर्जनों सांसदों के दलबदल करने के बाद 2022 में संसदीय अविश्वास मत में उन्हें बाहर कर दिया गया।

फिर मई 2023 में इमरान खान को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद सेना के खिलाफ पूरे पाकिस्तान में जोरदार हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गये।

जिसके बाद इमरान खान के हजारों समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया गया और लगभग 100, जिनमें से आधे मियांवाली से थे, वो फिलहाल सैन्य अदालतों में मुकदमे का इंतजार कर रहे हैं, जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में लिया गया और दर्जनों नेताओं को पार्टी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया।

रिटायर्ड स्कूल शिक्षक इजाज खान ने कहा, इमरान खान "जनता के बीच अभी भी लोकप्रिय हैं, लेकिन सेना के लिए वह अस्वीकार्य हैं"।

इस महीने की शुरुआत में, पीटीआई को एक महत्वपूर्ण झटका तब लगा, जब सुप्रीम कोर्ट ने उनके चुनाव चिन्ह: क्रिकेट बैट के साथ चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया। ये एक बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि, ऐसे देश में, जहां लाखों लोग पढ़-लिख नहीं सकते, मतदाताओं के लिए अपनी पसंदीदा पार्टी और उम्मीदवार की पहचान करने के लिए चुनाव चिन्ह पर ही निर्भर रहते हैं और इमरान खान का बैट चुनाव चिन्ह, पाकिस्तान में बच्चा-बच्चा जानता था।

वहीं, चुनाव आयोग ने इमरान खान के उम्मीदवारों के साथ एक और गेम खेला। उनके कई उम्मीदवार को शराब का बोतल चुनाव चिन्ह दिया, जाहिर तौर पर शराब की बोतल चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव प्रचार करना भारत और पाकिस्तान जैसे देश में किसी भी उम्मीदवार के लिए अजीब ही होगा।

वहीं, मियांवाली में इमरान खान के प्रतिद्वंद्वी ओबैद उल्लाह खान अपने प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दल को मिली सजा को लेकर कहते हैं, कि "अभी नहीं तो कब उचित होगा?"

पीटीआई उम्मीदवारों के विपरीत, ओबैद उल्ला खान, जो पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल-एन) की तरफ से उम्मीदवार हैं, वो ग्रामीणों से खुले तौर पर मिलते हैं, लेकिन इमरान खान की पार्टी के उम्मीदवार छुप-छुपकर चुनाव प्रचार करते हैं।

पीएमएल-एन एक अन्य पूर्व प्रधान मंत्री नवाज शरीफ की पार्टी है, जिन्हें 2018 के चुनाव से पहले जेल में डाल दिया गया था और बाद में आत्म-निर्वासन के लिए मजबूर किया गया था।

विश्लेषकों का कहना है, कि जैसे ही इमरान खान का पतन हुआ है, शरीफ उठ खड़े हुए हैं और अपने देश लौटकर सेना की गोदी में आकर बैठ गये हैं। चुनाव प्रचार से दरकिनार किए जाने के बावजूद मतदाताओं की खान के प्रति लालसा कम नहीं हुई है।

23 साल की कंप्यूटर साइंस की छात्रा हंजला बिन शकील पहली बार मतदान करेंगी और उन्होंने कहा है, कि उनका वोट इमरान खान को ही जाएगा। उन्होंने कहा, कि "मैं (इमरान खान) को वोट दूंगी, क्योंकि वह एकमात्र व्यक्ति हैं जो वास्तव में इस देश की परवाह करते हैं। बाकी लोग अपने निजी हितों को प्राथमिकता देते हैं।"

कुल मिलाकर, सेना ने ऐसी व्यवस्था कर दी है, कि इमरान खान के लिए एक सीट पर भी जीत हासिल करना करीब करीब नामुमकिन है। लिहाजा, अब इमरान खान को अगले चुनाव की तरफ देखना चाहिए, लेकिन उससे पहले सेना की कदमों में सजदा करना चाहिए, ताकि कम से कम जेल से बाहर आए।

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