चीन से और पैसा ऐंठना चाहता है पाकिस्तान! आतंकी हमले का डर दिखाकर चीनी कंपनियों को किया बंद
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान चीन से अपना लोन माफ करवाना चाहता है या फिर दिवालिया होने से बचने के लिए समय सीमा बढ़वाना चाहता है। पाकिस्तान इस तरह के हथकंडे अपना कर ड्रैगन पर दबाव बनाना चाहता है।

पाकिस्तान में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई चीनी कंपनियों को बंद कर दिया गया है। कराची पुलिस ने चीनी नागरिकों द्वारा चलाए जा रहे कुछ बिजनेस को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। इसकी वजह चीनी नागरिकों को आतंकी हमलों से बचाना बताया जा रहा है।
निक्की एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक करांची में चीनी व्यापारियों द्वारा चलाए जा रहा एक रेस्टोरेंट, एक सुपरमार्केट और मरीन-प्रोडक्ट कंपनी को अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया है। पाकिस्तान को डर है कि चीनी नागरिकों पर हो रहे आतंकी हमलों से दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ सकती है।
पाकिस्तान में आतंकियों द्वारा चीनी नागरिकों और चीनी से जुड़े प्रोजेक्ट को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। पाकिस्तानी अवाम को डर है कि वाणिज्यिक परियोजनाओं, खनन कार्यों और अन्य वित्तीय निवेशों के माध्यम से उनकी आर्थिक स्थिति को बढ़ाने की आड़ में चीन धीरे-धीरे उनकी जमीन पर कब्जाता जा रहा है।
पाकिस्तान ने चीनी बिजनेस बंद करने के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाल दिया है लेकिन कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान की मंशा चीनी लोन को माफ करवाने की है। वह चीन पर दबाव बनाने के लिए चीनी बिजनेस बंद कराना चाहता है।
पाकिस्तान को अंदेशा है कि यदि चीन ने उसका लोन माफ नहीं किया तो वह दिवालिया हो सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान चीनी हितों की रक्षा नहीं कर सकता है क्योंकि उसके पास इतने पैसे ही नहीं हैं कि वह चीनी नागरिकों की रक्षा के लिए अलग से किसी मिलिट्री यूनिट को फाइनेंस कर सके।
पाकिस्तानी आबादी के बीच बढ़ती चीन विरोधी भावनाओं को स्थानीय सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लिए नियंत्रित कर पाना मुश्किल होता जा रहा है। इससे पहले शनिवार को पाकिस्तान में ईशनिंदा मामले में एक चीनी नागरिक को गिरफ्तार भी किया गया था। जिसे लेकर भारी बवाल मचा था।
इससे पहले पिछले महीने चीन ने पाकिस्तान में अपने कॉन्सुलर सेक्शन को बंद कर दिया था। चीन ने पाकिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए ये फैसला लिया था। बीजिंग मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था से असंतुष्ट है और उसने इस्लामाबाद के साथ बार-बार चिंता जताई है।












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