भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए पिघला पाकिस्तान का दिल, Pak हाई कमीशन ने जारी किए 96 वीजा
पाकिस्तान में हिंदुओं के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं जहां हर साल तीर्थयात्री यात्रा करने के लिए जाते हैं। वहीं सोमवार को पाक हाई कमीशन ने भारत के 96 तीर्थयात्रियों को वीजा जारी किया है।

पाकिस्तानी सरकार का भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए दिल पसीजता नजर आ रहा है। पाकिस्तान उच्चाआयोग ने भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए वीजा जारी किया है। पाकिस्तान ने भारतीय तीर्थयात्रियों के एक समूह को 20-25 दिसंबर के दौरान कटास राज मंदिर जाने के लिए सोमवार को 96 वीजा जारी किए।
बता दें भारत से बड़ी संख्या में सिख और हिंदू तीर्थयात्री पाकिस्तान में स्थित विभिन्न धार्मिक स्थलों पर त्योहारों और अन्य अवसरों में हिस्सा लेने के लिए
पाकिस्तान हाई कमीशन भारतीयों के लिए जारी करता है वीजा
पाकिस्तान जाते हैं। नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन ने सोमवार को एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने बताया कि भारत के सिख और हिंदू तीर्थयात्रियों को धार्मिक स्थलों की यात्रा की सुविधा के लिए पाकिस्तान सरकार के प्रयासों के बाद वीजा जारी किए जाते हैं। इसी के तहत "पाकिस्तान हाई कमीशन द्वारा बड़ी संख्या में भारतीय हिंदुओं को भी पाकिस्तान में रह रहे परिवारों और दोस्तों से मिलने के लिए वीजा जारी किया जाता है।"
पाकिस्तानी मिशन के वरिष्ठ राजनयिक, चार्ज डी अफेयर्स आफताब हसन खान ने कहा कि भारतीय तीर्थयात्रियों को पाकिस्तान पवित्र धार्मिक स्थलों पर उनकी सुरक्षा और सभी धर्मों के आने वाले तीर्थयात्रियों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
बता दें कटास राज मंदिर में भारतीय तीर्थयात्रियों की यात्रा 1974 के धार्मिक स्थलों के दौरे पर द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत कवर की गई है। कटास राज मंदिर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के चकवाल जिले में स्थित है।बता दें 5 जनवरी को पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि ETPB को "पूरे पाकिस्तान में सभी मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों की एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जो ETPB के दायरे में आते हैं।
ईटीपीबी ने सुप्रीम कोर्ट को जवाब देते हुए बताया कि उसे सौंपे गए 365 में से केवल 13 मंदिरों का मैनेजमेंट कर रहा है और इसने 65 मंदिरों को हिंदू कमांड के लिए छोड़ दिया है, बाकी 287 का भू-माफियाओं द्वारा शोषण किया जाता है, जो इसे आसानी से हड़पने वाला पाते हैं।
ईटीपीबी अपने बचाव में तर्क दिया था कि गैर-कार्यात्मक मंदिर और गुरुद्वारे क्षेत्र में हिंदुओं और सिखों की कमी के कारण हैं।
वन-मैन कमीशन का आरोप लगाया था कि ETPB केवल माइग्रेटेड समुदाय की मूल्यवान संपत्तियों पर कब्जा करने में रुचि रखता है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि ईटीपीबी ने खैबर पख्तूनवा के करक जिले के टेरी गांव में मंदिर के जीर्णोद्धार के नाम पर 3.8 करोड़ रुपये हड़प लिए। इस मंदिर को कट्टरपंथी जमीयत उलेमा ए-इस्लाम पार्टी (फ़ज़ल-उर रहमान समूह) के सदस्यों द्वारा आग लगा दी गई थी।तब आयोग ने कहा था कि "यह वास्तव में अजीब है कि टेक्टालॉजी के इस युग में भी ईटीपीबी को अभी तक विस्थापित संपत्तियों को जियो-टैग नहीं किया गया है। हिंदू पाकिस्तान में सबसे बड़ा समुदाय है।"












Click it and Unblock the Notifications