भारत-अमेरिका के बीच हुए डिफेंस डील से घबराया पाकिस्तान.. शहबाज सरकार ने उठाया बड़ा कदम

Pakistan on India-US Defence Deal: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच हुए रक्षा संबंधों को लेकर पाकिस्तान ने गहरी आपत्ति जताई है और अपनी सुरक्षा के लिए दोनों देशों के बीच किए गये रक्षा डील को खतरा बताया है।

पाकिस्तान ने भारत के साथ अपने रक्षा सहयोग को गहरा करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के सामने अपनी कड़ी आपत्तियां दर्ज करवाई हैं और कहा है, कि ये डील कुछ ऐसा है, जो सीधे तौर पर उसके सुरक्षा हितों को खतरे में डाल देगा। आपको बता दें, कि भारत और अमेरिका के बीच पीएम मोदी की यात्रा के दौरान कई अहम रक्षा समझौते किए गये हैं, जिसको लेकर पाकिस्तान लगातार डरा हुआ है।

Pakistan on India-US Defence Deal

रक्षा डील से डर गया पाकिस्तान

पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्रों के हवाले से द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने बताया है, कि पाकिस्तान ने अमेरिका को राजनयिक चैनलों के माध्यम से सूचित किया है, कि पाकिस्तान की वैध चिंताओं को ध्यान में रखे बिना भारत को एडवांस सैन्य प्रौद्योगिकियों का ट्रांसफर करना, दक्षिण एशियाई क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता और पारंपरिक संतुलन को कमजोर कर देगा।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटनाक्रम से परिचित सूत्रों ने कहा है, कि पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा है, कि भारत इन अधिग्रहणों से उत्साहित महसूस करेगा और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को खतरे में डाल देगा। इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने पाकिस्तानी संसद में कहा था, कि "भारत और अमेरिका के रिश्ते से पाकिस्तान को चिंतित नहीं होना चाहिए।"

लेकिन, अब शहबाज शरीफ की सरकार जिस तरह से भारत-अमेरिका डिफेंस डील पर चिंता जता रही है, उससे उसकी घबराहट का पता चलता है।

भारत-अमेरिका डिफेंस डील

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका के बीच कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौते किए गये हैं।

उदाहरण के लिए, समझौते के तहत अब अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक और भारत की सरकारी स्वामित्व वाली हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड देश के स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों के लिए उन्नत लड़ाकू जेट इंजन भारत में बनाएगी।

अमेरिका भारत में ड्रोन के निर्माण के लिए तैयार हो गया है। इसके तहत अमेरिका के घातक प्रीडेटर समुद्री ड्रोन का निर्माण भारत में होगा। दशकों तक, रूस 65 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत को हथियारों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना रहा है, लेकिन अब माना जा रहा है, कि भारत दूसरे विकल्पों की तलाश कर रहा है।

भारत और रूस के बीच रक्षा साझेदारी 65 प्रतिशत से कम होकर 45 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि अमेरिका की साझेदारी बढ़कर 11 प्रतिशत हो गया है।

इसके लिए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा के दौरान लिया गया दूसरा बड़ा फैसला यह था, कि अमेरिकी मेमोरी चिप की दिग्गज कंपनी माइक्रोन टेक्नोलॉजी भारत में सेमीकंडक्टर असेंबली और परीक्षण सुविधा बनाने के लिए 825 मिलियन डॉलर तक का निवेश करेगी, जिससे हजारों नौकरियां पैदा होंगी। पाकिस्तान इससे भी घबराया हुआ है।

पाकिस्तान सरकार का मानना है, कि भारत और अमेरिका के बीच हो रहे रक्षा समझौते इस बात का संकेत देती हैं, अमेरिका ना सिर्फ भारत को हथियार बेच रहा है, बल्कि टेक्नोलॉजी भी ट्रंसफर कर रहा है, जिसने पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

पाकिस्तानी मीडिया कहना है, कि पाकिस्तान सरकार का मानना है, कि अमेरिका और भारत के बीच जो डिफेंस डील हो रहे हैं, भले ही वो चीन को ध्यान में रखकर हो सकते हैं, लेकिन यह विकास निश्चित रूप से दक्षिण एशिया में सैन्य संतुलन को बिगाड़ देगा। पाकिस्तान को लगता है, कि अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों को गहरा करना उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।

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