सेना के खिलाफ विद्रोह कुचलने के लिए पाकिस्तान में नया बिल, आलोचना करने पर मिलेगी सख्त सजा

पाकिस्तान में सेना को लेकर नया बिल पास किया गया है जिसमें सेना की आलोचना करने वालों को 2 साल जेल और 50 हजार जुर्माने की सजा मिलेगी

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से सेना की तानाशाही रवैये के खिलाफ विपक्षी पार्टियां लगातार आवाज बुलंद कर रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने तो सेना पर अपनी बेटी मरियम नवाज के खिलाफ साजिश तक रचने का आरोप लगा दिया, लेकिन अब पाकिस्तान में सेना की आलोचना करने वालों को सीधा जेल भेज दिया जाएगा। पाकिस्तान की एक संसदीय समिति ने एक बिल पास किया है, जिसमें सेना की आलोचना करने वालों को 2 साल जेल की सजा हो सकती है।

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    सेना की आलोचना गुनाह

    सेना की आलोचना गुनाह

    पाकिस्तान की एक ससंदीय समिति ने सेना को लेकर एक नया बिल पास किया है। जिसके मुताबिक सेना की आलोचना करना कानूनन जुर्म ठहराया जाएगा और जो भी शख्स सेना की आलोचना करता पाया जाएगा उसे दो साल जेल की सजा हो सकती है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली स्टैंडिंग कमेटी ऑन इंटीरियर की तरफ से बुधवार को नया बिल पास किया गया है। स्टैंडिंग कमेटी ने नया आपराधिक कानून संशोधन बिल पास कर दिया है। जिसके बाद अब पाकिस्तान की अवाम पाकिस्तानी सेना का किसी भी हाल में ना आलोचना कर सकती है और ना ही सेना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा सकती है। इस कानून के मुताबिक अगर कोई शख्स सेना की आलोचना करता पाया जाएगा और उसके खिलाफ जुर्म साबित होता है, तो उसे दो साल जेल के साथ साथ उसपर 50 हजार रुपये का जुर्मना भी लगाया जाएगा।

    कानून में क्या है?

    कानून में क्या है?

    स्टैंडिंग कमेटी द्वारा पास किए गये इस संशोधित बिल के मुताबिक पाकिस्तान की आर्मी और किसी भी जवान के खिलाफ जानबूझकर मजाक, उनका अपमान या फिर उनका मानहानि नहीं किया जा सकता है। अगर कोई पाकिस्तानी सेना का मजाक उड़ाता हुआ या अपमान करता हुआ पाया जाता है तो ऐसा करने वालों को पाकिस्तान के पीनल कोड की धारा 500ए के तहत दो साल के लिए जेल भेजा जा सकता है साथ ही आरोपी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस बिल के मुताबिक सेना का अपमान करने वालों को सिविल कोर्ट के अलावा मिलिट्री कोर्ट में भी ट्रायल का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, अभी इस बिल को कानून बनने के लिए पाकिस्तानी संसद के निचने और उपरी सदनों में अलग अलग पास करवाया जाना बाकी है और सीनेट की मंजूरी भी इस बिल को लेकर मिलना जरूरी है। पाकिस्तान में अकसर देखा जाता है कि जिस बिल का विरोध विपक्षी पार्टियां करती हैं वो बिल सिनेट में पास नहीं हो पाते हैं।

    इमरान सरकार में फूट

    इमरान सरकार में फूट

    इमरान खान सरकार द्वारा बनाए गये इस बिल का विरोध विपक्षी नेताओ के साथ-साथ उनके मंत्रियों ने ही करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने इस बिल की आलोचना की है और सेना की आलोचना करने वालों को सजा सुनाए जाने वाले इस बिल को 'आले दर्जे का हास्यास्पद विचार' कहा है। हालांकि, पाकिस्तान के कैबिनेट मंत्री फवाद चौधरी ने अपने ट्वीट में सीधे सीधे इस बिल का जिक्र नहीं किया है लेकिन उन्होंने एक पत्रकार के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बात कही है।

    बिल का पाकिस्तान में विरोध

    बिल का पाकिस्तान में विरोध

    इमरान खान सरकार द्वारा लाए गये इस बिल का पूरे पाकिस्तान में विरोध किया जा रहा है। मजहर अब्बास नाम के इस पत्रकार ने इस बिल की जमकर आलोचना की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि 'आप अपने देश के लोकतंत्र की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं, आप देश की संसद की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं, आप नेताओं की आलोचना कर सकते हैं, आप मीडिया की आलोचना करने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन बाकी सब राष्ट्रहित में है'। पत्रकार मजहर अब्बास के इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए फवाद चौधरी ने इस बिल को हास्यास्पद करार दिया है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि सम्मान अर्जित किया जाता है, ना कि किसी पर सम्मान थोपा जाता है।

    कैबिनेट में फूट!

    कैबिनेट में फूट!

    फवाद चौधरी ने इस बिल को लेकर कहा है कि नये कानून को पारित करने के बजाए अदालत की अवमानना संबंधिक कानून को भी खारिज किया जाना चाहिए। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के मानवाधिकर मंत्री शिरीन मजारी ने भी फवाद चौधरी के विचार को सही ठहराया है और बिल का विरोध किया है। वहीं, पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने भी इस बिल का भारी विरोध किया है लेकिन पाकिस्तान की नेशनल असेंबली स्टैंडिंग कमेटी ऑन इंटीरियर ने इस बिल के प्रस्तावों पर अपनी मुहर लगा दी है। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने सेना की आलोचना पर सजा वाले बिल को पाकिस्तानियों के मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया है।

    बोलने की आजादी पर अंकुश

    बोलने की आजादी पर अंकुश

    पाकिस्तान में इस नये कानून को पाकिस्तान पीनल कोड में बदलाव करने के लिए पेश किया गया है। इस बिल को इमरान खान सरकार के एक मंत्री अमजद अली खान ने पेश किया था, जिसे स्टैंडिंग कमेटी की तरफ से मंजूरी दे दी गई है। वहीं पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां पाकिस्तान मुस्लिम लीक नवाज और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानि पीपीपी की तरफ से भारी विरोध किया गया और स्टैंडिंग कमेटी में एक वक्त ये बिल 5-5 के आधार पर फंस गया था। लेकिन, स्थायी समिति के चेयरमैन राजा खुर्रम शहजाद नवाज ने बिल के पक्ष में वोट कर दिया और फिर स्टैंडिंग कमेटी से ये बिल पास हो गया। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने कहा है कि सरकार इस बिल को इसलिए लेकर आई है ताकि बोलने की आजादी पर अंकुश लगाया जा सके। आपको बता दें कि पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां इमरान खान को पाकिस्तानी आर्मी का गोद लिया हुआ प्रधानमंत्री बताती है। वहीं, जब इमरान खान खुद विपक्ष में थे तो वो सेना की जमकर आलोचना किया करते थे। ट्वीटर पर कई ऐसे वीडियो अब पाकिस्तानी अवाम के द्वारा शेयर किए जा रहे हैं, जिसमें इमरान खान पाकिस्तानी सेना की जमकर आलोचना करते नजर आ रहे हैं।

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