भारत से 100 सालों तक दुश्मनी नहीं करेगा पाकिस्तान, इमरान खान की नई सुरक्षा नीति से कश्मीर 'गायब'
पाकिस्तान सरकार ने नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति बनाई है, जिसमें भारत के साथ 100 सालों कर बैर नहीं करने की बात कही गई है।
इस्लामाबाद, जनवरी 12: ऐसा लगता है, कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार को अब समझ में आ चुका है कि, भारत से बैर कर पाकिस्तान रसातल में ही गया है और कश्मीर मुद्दे पर भारत से भिड़ना पाकिस्तान के लिए काफी महंगा सौदा साबित हुआ है, लिहाजा इमरान खान ने जो पाकिस्तान के लिए नई सुरक्षा नीति बनाई है, उसमें भारत के साथ 'शांति' रखने और कश्मीर मुद्दे को ठंडे बस्ते में डालने का फैसला लिया गया है।

पाकिस्तान की नई सुरक्षा नीति
पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने देश के लिए नई सुरक्षा नीति बनाई है, जिसमें कहा गया है कि, पाकिस्तान अगले 100 सालों तक भारत के साथ दुश्मनी नहीं करेगा और आने वाले दिनों में पाकिस्तान अपनी विदेश नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ शांति कायम करने और आर्थिक कूटनीति को बढ़ाने की तरफ ध्यान देगा। पाकिस्तान की सुरक्षा नीति के ऑरिजनल 100 पन्नों को गुप्त रखा जाएगा और पाकिस्तान के आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि, नई सुरक्षा नीति में भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को बहाल करने की बात कही गई है। यानि, आने वाले दिनों में पाकिस्तान भारत के साथ एक बार फिर से व्यापारिक रिश्ते कायम कर सकता है और उसमें कश्मीर मुद्दो को विवाद नहीं बनाया जाएगा।
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भारत के साथ बातचीत पर ध्यान
इमरान सरकार की नई सुरक्षा नीति में दोनों परमाणु संपन्न राष्ट्र, भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से बातचीत बहाल करने और शांति कायम करने के लिए बातचीत करने पर जोर दिया गया है। पाकस्तानी आधिकारिक सूत्र ने पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून से कहा कि, 'हम अगले 100 सालों तक भारत के साथ दुश्मनी के रास्ते पर नहीं जाएंगे और पाकिस्तान की नई सुरक्षा नीति में पड़ोसी देशों के साथ शांति संबंध स्थापित करने की बात है'। पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि, 'अगर भारत के साथ आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को सामान्य करने की कोशिश की जाएगी और उसके लिए कश्मीर को मसला नहीं बनाया जाएगा, जैसा की पहले भारत के साथ व्यापारिक संबंध था, वैसा ही संबंध फिर से बहाल किया जाएगा'।

2019 से भारत के साथ संबंध काफी खराब
आपको बता दें कि, मोदी सरकार ने 2019 में जब से कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को खत्म किया है, उसके बाद से पाकिस्तान भारत के साथ तमाम व्यापारिक संबंध भी खत्म कर चुका है और भारत से सिर्फ इमरजेंसी दवाओं की ही खरीददारी पाकिस्तान करता है। हालांकि, पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा पर सीजफायर होने के बाद संबंधों में सुधार होने की उम्मीद बढ़ी थी, लेकिन पाकिस्तान के अंदर जैसे ही भारत के साथ व्यापार बहाल करने की घोषणा की गई थी, इतना राजनीतिक विरोध हुआ, कि इमरान सरकार को यूटर्न लेना पड़ा था। लेकिन, इमरान सरकार की नई सुरक्षा नीति में भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को बहाल करने की बात की गई है।

जियोइकोनॉनिक्स की तरफ ध्यान
पिछले 70 सालों से अपनी रणनीतिक लिहाज से महत्वपूण जमीनी मार्गों का फायदा उठाकर कई देशों को ब्लैकमेल कर चुके पाकिस्तान का सिक्का अब भू-रणनीतिक जमीन से नहीं चल रहा है और इसका साफ जिक्र पाकिस्तान की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में किया गया है और अब पाकिस्तान जियो-इकोनॉमी के रास्ते आगे बढ़ेगा और अपने नजरिए में बदलाव करेगा और इसी के तहत भारत के साथ संबंधों को सामान्य करने की कोशिश की जाएगी। पाकिस्तानी अधिकारी ने खुलासा किया है कि, पाकिस्तान की नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में 'आर्थिक सुरक्षा, नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति' का विषय होगा। इसी तरह, आर्थिक कूटनीति और पड़ोसी देशों के साथ शांति स्थापित करना विदेश नीति का केंद्रीय विषय होगा।" हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी ने जोर देकर कहा कि, भारत के साथ लंबे समय से कश्मीर विवाद को पाकिस्तान के लिए एक 'महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीति' मुद्दे के रूप में पहचाना गया है।

मोदी सरकार के साथ तालमेल नहीं!
हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि नई दिल्ली में मौजूदा पीएम मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तहत भारत के साथ तालमेल की कोई संभावना नहीं है। अधिकारी ने कहा कि, नई नीति का औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री इमरान खान शुक्रवार को घोषणा करेंगे। अधिकारी के अनुसार, यह पहली बार संहिताबद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा नीति होगी, जो आंतरिक सुरक्षा के साथ-साथ विदेश नीति दोनों को कवर करेगी। अधिकारी ने कहा कि, "राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का केवल एक हिस्सा सार्वजनिक किया जाएगा," अधिकारी ने स्पष्ट किया, बाकी दुनिया में ऐसी नीतियों को अक्सर गोपनीय रखा जाता है।

भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई नीति
पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि, हालांकि पाकिस्तान के पास रक्षा, विदेश और आंतरिक नीतियां हैं, लेकिन, नई नीति भविष्य के लिए दिशा प्रदान करने वाले "अंब्रेला डॉक्यूमेंट्स" के रूप में कार्य करेगी। इस नीति को तैयार करने में सात साल का समय लगा है, जिसे तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने 2014 में शुरू किया था। अधिकारी ने कहा कि, नीति को तैयार करने में सभी संघीय, प्रांतीय संस्थानों के साथ-साथ सैन्य और अन्य विभागों से इनपुट लिए गए हैं"।

विश्लेषकों की नजर में कैसी है नीति?
भारतीय विश्लेषकों की नजर में पाकिस्तान ने जो विदेश नीति तैयार की है, वो देखने में तो ठीक है, लेकिन उसे प्रैक्टिकली अंजाम देना इमरान सरकार के लिए नामुमकिन होगा। भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि, पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति ऐसी है, कि भारत के साथ 'मिलाप' को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इमरान सरकार चाहकर भी भारत के साथ व्यापारिक संबंधो को सामान्य नहीं कर सकती है, क्योंकि अतीत में प्रधानमंत्री इमरान खान ने ही अपने बयानों से अपने देश की जनता को भारत के खिलाफ भड़काया है और उनसे वोट लिया है, लिहाजा अब वो जनता को ये संदेश कैसे देंगे, कि वो भारत के साथ संबंध सामान्य करना चाहते हैं। इसके अलावा भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि, कोई भी देश अपनी सुरक्षा नीति ये कहकर नहीं बना सकता है, कि किसी दूसरे देश में 'अमुक पार्टी' की सरकार होने पर ही संबंध सामान्य होंगे। इसके साथ ही विशेषज्ञों का कहना है कि, पाकिस्तानी नेताओं ने पाकिस्तानी अवाम को इस कदर कट्टर बना दिया है, कि अब पाकिस्तान की किसी भी पार्टी के लिए नई नीतियों को लागू करना नामुमकिन के समान होगा।












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