पाकिस्तान में नागरिकों की प्राइवेसी खत्म! ISI को मिला किसी का भी फोन सुनने करने का अधिकार, समझिए मतलब
Pakistan News: पाकिस्तान में आज के बाद से लोगों की निजता यानि प्राइवेसी पूरी तरह से खत्म करते हुए शहबाज शरीफ की सरकार ने देश की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI को लोगों के फोन कॉल को ट्रैक करने और इंटरसेप्ट करने के अधिकार दे दिए हैं।
पाकिस्तान सरकार ने देश की सेना की जासूसी खुफिया एजेंसी को टेलीफोन कॉल के जरिए लोगों के बीच होने वाली बातचीत को सुनने का कानूनी अधिकार दे दिया है, जिसको लेकर एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पाकिस्तान की सरकार, जो पहले से ही आजादी के बाद से आधे समय तक सेना के नियंत्रण में रही है, उसे और घातक अधिकार दे दिया गया है।

पाकिस्तान के अंदर शक्तिशाली सेना, पाकिस्तान में सरकार बनाने और गिराने में एक बड़ी भूमिका निभाती है, जिसमें ISI ही सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) एजेंसी को नई शक्तियां दिए जाने पर विपक्ष और सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी जा रही है। कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने संसद को बताया है, कि सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार मंत्रालय को 8 जुलाई को एक नोटिस में इस बदलाव के बारे में सूचित कर दिया गया है।
पाकिस्तान में लोगों की आजादी खत्म!
पाकिस्तान के कानून मंत्री तरार ने मंगलवार को कहा है, कि "जो कोई भी कानून का दुरुपयोग करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।" उन्होंने कहा, कि यह उपाय आपराधिक और आतंकवादी गतिविधियों पर नज़र रखने तक सीमित रहेगा और सरकार यह सुनिश्चित करेगी, कि इससे लोगों के जीवन और निजता का उल्लंघन न हो।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने नोटिस देखने के बाद अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि"राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए किसी भी अपराध की आशंका में संघीय सरकार अधिकारियों को कॉल और संदेशों को इंटरसेप्ट करने या किसी भी दूरसंचार प्रणाली के माध्यम से कॉल के बारे में जानकारी लगाने का अधिकार दिया गया है।"
हालांकि इस कदम का जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने जोरदार विरोध किया है। हालांकि, जब इमरान खान प्रधानमंत्री थे, तो उन्होंने खुद लोगों के फोन कॉल को ट्रैक करने और सुनने का अधिकार ISI को देने की वकालत की थी।
लेकिन, अब पीटीआई के एक नेता उमर अयूब खान ने कहा है, कि ISI सरकारी सांसदों के खिलाफ भी अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करेगी और उन्होंने कसम खाई कि उनकी पार्टी अदालत में इस फैसले के खिलाफ चुनौती पेश करेगी। सेना की इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस विंग (आईएसपीआर) ने रॉयटर्स की टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया। वहीं, अधिकार वकालत समूह 'बोलो भी' की फरीहा अजीज ने एक्स पर पूछा है, कि "क्या जो कानूनी है, वह संवैधानिक या सही भी है?"












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