पाकिस्तान: इमरान लहर के बीच 'कॉमरेड' वजीर का 'लाल सलाम'

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पिछले सप्ताह हुए चुनाव में एकमात्र कॉमरेड को जीत हासिल हुई है। पश्तून तहफाज मूवमेंट (PTM) के क्रांतिकारी नेता अली वजीर अकेले मार्क्सवादी उम्मीदवार हैं, जिन्होंने चुनाव में जीत हासिल कर पाकिस्तान की नेशनल असेंबली पहुंचे हैं। अली वजीर ने पाकिस्तान के जनजातीय क्षेत्र एनए-50 से 23,530 वोट हासिल किए, वहीं धार्मिक पार्टी एमएमए के उम्मीदवार को सिर्फ 7,515 वोट हासिल हुए। हालांकि, इमरान खान ने चुनाव में वजीर को पीटीआई ज्वॉइन करने का ऑफर दिया था, लेकिन कॉमरेड ने विनम्रता से इस ऑफर को ठुकरा दिया। इसके बाद इमरान खान ने वजीर के सामने अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारने का निर्णय लिया था।

पाकिस्तान: मिलिए नेशनल असेंबली पहुंचने वाले अकेले कॉमरेड से

पाकिस्तान में मार्क्सवादी विचारों वाले वजीर एक बहुत ही खास शख्स है। वजीर के होमटाउन वाना में जिस वक्त वैश्विक तालिबान का मुख्य केंद्र और तालिबान की सहयोगी ग्रुप सक्रिय हो रहे थे, तब कॉमरेड ने अपनी कानून की पढ़ाई कर रहे थे। जब दक्षिणी वजीरिस्तान में आतंकवाद और कट्टरवाद पनप रहा था, तब वजीर के पिता और स्थानीय नेताओं ने इसकी शिकायत की थी, लेकिन पाकिस्तान की सरकारों ने उनकी आवाजों को हमेशा नजरअंदाज किया। यहां तक कि पाकिस्तान की सरकारों ने कभी नहीं माना कि उनकी जमीं पर अफगान, अरब और मध्य एशिया के आतंकी अपनी जड़ें मजबूत कर रहे हैं।

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वजीर का पूरा परिवार ही क्रांतिकारी और लोगों के हक के लिए लड़ते रहे हैं। 2005 में जब अली वजीर को वजीर फ्रंटियर क्राइम्स रेगुलेशन (FCR) के अंतर्गत जेल हुई, उसी दौरान आतंकियों ने उनके पिता, भाई, चचेरे भाई और चाचा को एक हमले में मार दिया था। इसके कुछ सालों के बाद वजीर ने अपने परिवार के छह और सदस्यों को खो दिया, लेकिन वहां की सरकार ने ना तो इस पर जांच की और ना ही किसी को जिम्मेदार ठहराया।

एक के बाद एक परिवार वालों को खोने के बाद वजीर की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई। परिवार का गुजारा करने के लिए जब वजीर ने अपना सेव का बागान डाला, तो उसे भी कट्टरपंथियों ने केमिकल डालकर राख कर दिया। वहीं, एक ट्यूबवेल को भी लोगों ने गंदगी से भरकर, उसे बंद कर दिया। 2016 में वाना में एक ब्लास्ट हुआ, जिसमें एक आर्मी ऑफिसर की मौत हुई। उसके बाद आर्मी ने वाना के पूरे मार्केट को ही बर्बाद कर दिया, जहां वजीर के परिवार की भी एक दूकान थी। तालिबान ने वजीर के परिवार के कुल 16 लोगों को मारा, जिसमें उनके पिता और दो भाई भी शामिल है।

अली वजीर पश्तून तहफाज आंदोलन के मुख्य नेताओं में से एक थे। उन्होंने हाल ही में देश का दौरा किया और लाहौर, कराची, पेशावर और स्वात घाटी में बड़े स्तर पर रैलियों का आयोजन किया। लाहौर लेफ्ट फ्रंट, लाहौर की सार्वजनिक बैठक का मेजबानी करता था, जिसे औपचारिक रूप से अधिकारियों ने अनुमति नहीं दी थी। वजीर कहते हैं, 'हमें अभियान की अनुमति नहीं थी, शहर में कोई पोस्टर या स्टिकर लगाने की इजाजत नहीं थी। यहां तक कि अली वजीर और 7 अन्य लोगों को एक सार्वजनिक बैठक से पहले की रात को गिरफ्तार कर लिया गया था। इस रैली में 10,000 से ज्यादा लोगों ने भाग लिया था।

इस साल जून में वजीर के पीटीएम पर सरकार की कुछ लोगों ने अटैक कर दिया, जिसमें कई लोग घायल हुए। एक इंटरव्यू में वजीर कहते हैं, 'पिछले कुछ महीनों में मेरे जीवन में काफी बदलाव आया है। मैंने जो पीड़ाएं सहन की हैं और जिन खतरों व आरोपों का सामना किया है, उनके बीच मुझे प्यार, समर्थन और सम्मान भी बहुत मिला है।'

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