शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान पर कसा शिकंजा, सेना के खिलाफ बोलने पर नया कानून, इमरान फसेंगे!

पाकिस्तानी मीडिया पर नये बिल पर रिपोर्ट आने के बाद शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।

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Pakistan News: भीषण आर्थिक संकट में पाकिस्तान फंसा हुआ है, लेकिन शहबाज शरीफ की सरकार देश को आर्थिक दलदल से बाहर निकालने की बजाए, लोगों से बोलने का अधिकार भी छीन रही है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सरकार ने एक नया विधेयक तैयार किया है, जिसमें पाकिस्तान के आपराधिक कानून में बदलाव का प्रस्ताव लाया गया है। इस नये प्रस्ताव में कहा गया है, कि जो कोई भी, किसी भी माध्यम से देश की शक्तिशाली सेना और न्यायपालिका का मजाक उड़ाएगा या उसे बदनाम करेगा, उसे पांच साल की जेल की सजा या 10 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों भरना होगा।

बोलने के अधिकारी पर हमला?

बोलने के अधिकारी पर हमला?

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नये कानून के इस प्रस्ताव को पाकिस्तान के कानून मंत्रालय ने तैयार किया है और इसे आंतरिक मंत्रालय ने इसकी देखरेख की है, जिसका मकसद पाकिस्तान की दंड संहिता (पीपीसी) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन करना है। डॉन के मुताबिक, जल्द ही शहबाज सरकार की कैबिनेट इस प्रस्ताव को विधेयक के तौक पर देश की नेशनल असेंबली में पेश कर सकती है, या फिर कैबिनेट प्रस्ताव के जरिए पहले ही इसे कानून का रूप दे दिया जा सकता है और बाद में सरकार इसे नेशनल असेंबली में पेश कर सकती है। इस कानून को खासतौर ऐसा डिजाइन किया गया है, ताकि इससे सेना के खिलाफ लगातार आक्रामक रहे इमरान खान पर नकेल कसी जाए।

सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर कड़ी प्रतिक्रिया

पाकिस्तानी मीडिया पर नये बिल पर रिपोर्ट आने के बाद शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और लोग काफी कड़ी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हाल में पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर सेना की भरपूर आलोचना की गई है, खासकर इमरान खान के समर्थकों ने देश की बर्बाद स्थिति के लिए सीधे तौर पर सेना को जिम्मेदार ठहराया है। इमरान खान खुद पाकिस्तान की विदेश नीति की भारतीय विदेश नीति से तुलना कर, पाकिस्तान की सेना को कटघरे में खड़ा करते आए हैं, वहीं, इमरान खान देश की अदालतों को भी नहीं बख्स रहे हैं, लिहाजा शहबाज शरीफ सरकार के इस नये प्रस्ताव का मुख्य मकसद इमरान खान के मुंह को बंद करना है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि आंतरिक मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, सारांश और विधेयक जल्द ही संघीय कैबिनेट को भेज दिया जाएगा।

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    नये प्रस्ताव में क्या कहा गया है?

    नये प्रस्ताव में क्या कहा गया है?

    पाकिस्तान सरकार का "क्रिमिनल लॉ (अमेडमेंट) एक्ट, 2023" शीर्षक वाला विधेयक, एक नई धारा 500A का सुझाव देता है। नए खंड का शीर्षक है 'राज्य संस्थानों का जानबूझकर उपहास उड़ाना या बदनाम करना।' इसमें कहा गया है, कि जो कोई भी न्यायपालिका, सशस्त्र बलों का जान बूझकर या किसी अन्य इरादे से उहास उड़ाता है, या फिर उसका अपमान करता है, या उसके खिलाफ किसी भी तरह का कोई बयान देता है, या फिर उसे प्रकाशित करता है, प्रसारित करता है या सूचना प्रसारित करता है, तो उसके खिलाफ नये कानून के तहत मुकदमा चलेगा। इस तरह का कृत्य करने वाला कोई भी शख्स दोषी होगा और उसे 5 साल की जेल की सजा या 10 लाख रुपये जुर्माना या फिर उसे दोनों सजा दी जा सकती है। इसमें यह भी कहा गया है, कि अपराधी को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जाएगा और ये अपराध गैर-जमानती और गैर-शमनीय होगा, जिसे केवल सत्र अदालत में ही चुनौती दी जा सकती है। कैबिनेट सारांश में कहा गया है, कि हाल ही में देश ने न्यायपालिका और सशस्त्र बलों सहित राज्य के कुछ संस्थानों पर निंदनीय, अपमानजनक और वीभत्स हमलों की बाढ़ देखी है।

    शहबाज सरकार का क्या कहना है?

    शहबाज सरकार का क्या कहना है?

    रिपोर्ट में कहा गया है, कि यह सर्वविदित है कि महत्वपूर्ण राज्य संस्थानों और उनके अधिकारियों के खिलाफ नफरत फैलाने के उद्देश्य से कुछ स्वार्थी तत्व जान-बूझकर साइबर अभियान शुरू करते हैं। इसमें यह भी कहा गया है, कि इस तरह के हमले देश के राज्य संस्थानों की अखंडता, स्थिरता और स्वतंत्रता पर चोट करते हैं। कैबिनेट सारांश में कहा गया है, कि ज्यूडिशरी और सेना के अधिकारी, मीडिया में नहीं आते हैं, ताकि वो अपने ऊपर लगे अपमानजनक आरोपों को काउंटर कर सकें, लिहाजा, उनके खिलाफ नफरत भरे शब्द और नफरत भरी टिप्पणियां आगे बढ़ती रहती हैं, जिससे उनकी व्यवस्था कमजोर होती है। वहीं, इस नये प्रस्ताव पर शहबाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने डॉन को बताया, कि उन्होंने मसौदा नहीं देखा है, लेकिन किसी को बदनाम करने की "कुछ सीमा" होनी चाहिए।

    सरकार के नये प्रस्ताव पर विवाद

    सरकार के नये प्रस्ताव पर विवाद

    शाहिद खाकान अब्बासी ने पहले तो ये कहा, कि "दुनिया में हर जगह मानहानि का कानून है और ऐसा नहीं होता है, कि कोई अपनी मर्जी से सामने आए और जो मन चाहे, वो कह दे।" हालांकि, बाद में उन्होंने शहबाज शरीफ के इस नये प्रस्ताव से खुद को अलग कर लिया और एक ट्वीट में उन्होंने कहा, कि वह "किसी भी क्रूर कानून का समर्थन नहीं कर सकते हैं"। उन्होंने ट्वीट में कहा, कि "मेरा मानना ​​है, कि सभी को निराधार आरोपों से बचाने के लिए पाकिस्तान को वित्तीय सहायता के साथ मानहानि कानूनों की आवश्यकता है।" आपको बता दें, कि इसी तरह के एक मसौदा बिल को अप्रैल 2021 में नेशनल असेंबली (एनए) की स्थायी समिति द्वारा अनुमोदित किया गया था, जब इमरान खान की सरकार थी और उन्होंने भी इसी तरह का कानून बनाकर, अपने विरोधियों का मुंह बंद करने की कोशिश की थी। इमरान खान के प्रस्ताव में दो सालों की कैद और जुर्माना का प्रस्ताव किया गया था, जिसका विरोध उस वक्त खुद शहबाज शरीफ ने किया था। यानि, पाकिस्तान में सत्ता में आने के बाद पार्टियों का मुख्य मकसद अपने विरोधियों के मुंह पर टेप बांधना ही होता है।

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