पाकिस्तान की सियासी पिच पर नवाज शरीफ की बैटिंग शुरू, बिलावल के विदेश मंत्री बनने से पहले जारी हुआ वीजा
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। पाकिस्तानी (Pakistan) की सियासी पिच अब पीएमएल-एन (PML-N) नेता व पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (Nawaz Sharif) का खेल शुरू हो गया है। और हो भी क्यों ना क्योंकि अब तो उनकी ही पार्टी की सरकार पाकिस्तान में चल रही है और छोटा भाई प्रधानमंत्री है। ऐसे में अब वे अपने मुल्क से दूर कैसे रह सकते हैं।लंदन में बिलवाल भुट्टो (Bilawal Bhutto Zardari) की नवाज शरीफ से मुलाकात के बाद विदेश मंत्री की कुर्सी तय होना और उसके ठीक बाद पाकिस्तान के लिए वीजा जारी होना इस बात के स्पष्ट संकेत हैं।

पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री के रुप में पीपीपी चीफ बिलावल भुट्टो जरदारी ने अब तक शपथ भी नहीं ली कि नवाज शरीफ के लिए पाकिस्तान का वीजा जारी हो गया। पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) कभी प्रबल प्रतिद्वंदी पार्टियां थी लेकिन इमरान सरकार को गिराने के ले कई दल पीएमएल-एन के साथ आए। इसमें पीपीपी ने बड़ी भूमिका निभाई। जिसके बाद अब पीएमएल- एन के नेता पीपीपी की सरकार में बड़ी भूमिका देने के लिए बाध्य हो रहे हैं। पाकिस्तान की राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों लंदन में हुई अहम बैठक ने कई सारे नए राजनीतिक आयाम के संकेत दिए। इस बीच नई सरकार बनने के बाद पाकिस्तान विदेश मंत्री को लेकर संशय दूर होता दिखाई दे रहा है।
पीएमएल-एन (PML-N) नेता और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान सरकार ने नया पासपोर्ट जारी किया है, जिससे वह पाकिस्तान की यात्रा कर सकेंगे। कहा जा रहा है कि यह वीजा 10 साल के लिए वैध होगा। पाकिस्तान के न्यूज चैनल जियो न्यूज के हवाले से यह कहा गया है। यह खबर तब आती जब इससे पहले पाकिस्तान के भावी विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी लंदन में पीएमएल-एन नेता नवाज शरीफ से मिल चुके होते हैं।
दरअसल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी के बीच गुरुवार को लंदन में एक बैठक हुई थी। जिसे पाकिस्तान की राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह भी है कि पीपीपी और पीएमएल- एन कभी प्रतिद्वंद्वी पार्टियां थी लेकिन अब पाकिस्ता सरकार में दोनों का गठबंधन है। पीपीपी प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान की मौजूदा गठबंधन सरकार में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है।












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