Pakistan Terrorism: आतंक की नई राजधानी बना पाकिस्तान! अफगानिस्तान और नाइजीरिया को भी छोड़ा पीछे
Pakistan Terrorism: साल 2026 की शुरुआत पाकिस्तान के लिए सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक रही है। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (GTI) की ताजा रिपोर्ट में पाकिस्तान को दुनिया का सबसे ज्यादा आतंकवाद प्रभावित देश घोषित किया गया है। इसने बुर्किना फासो और माली जैसे देशों को भी पीछे छोड़ दिया है।
देश के अंदर बढ़ती हिंसा, नागरिक और सैनिकों की भारी क्षति और अस्थिर राजनीति ने सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे में पाकिस्तान को न सिर्फ आंतरिक बल्कि सीमावर्ती तनावों से भी जूझना पड़ रहा है।

Global Terrorism Index 2026: आतंकी हमलों में भारी बढ़त
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही पाकिस्तान में 245 से ज्यादा आतंकी हमले हुए हैं। ये आंकड़े डूरंड लाइन पर होने वाले छोटे संघर्षों को छोड़कर हैं। हमलों की इस तेजी ने सुरक्षा एजेंसियों को हिला कर रख दिया है। इन घटनाओं के पीछे मुख्य रूप से सीमा पार से सक्रिय संगठन और देश के भीतर पनप रहे उग्रवादी गुट जिम्मेदार माने जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि हर गुजरते दिन के साथ हमलों की संख्या बढ़ती जा रही है।
Pakistan internal security 2026: जान-माल का बड़ा नुकसान
इन आतंकी हमलों की सबसे बड़ी कीमत आम जनता और फौज को चुकानी पड़ रही है। अब तक लगभग 270 नागरिकों की जान जा चुकी है, जबकि 410 से अधिक सुरक्षा बल के जवान शहीद हुए हैं। यह पाकिस्तान की सैन्य ताकत के लिए एक बड़ा झटका है। इन हमलों में अफगान तालिबान और बलूच विद्रोहियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जो अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर देश की शांति भंग कर रहे हैं।
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Pakistan security crisis: साल के अंत तक का अनुमान
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हिंसा का यही सिलसिला जारी रहा, तो साल 2026 पाकिस्तान के इतिहास के सबसे खूनी सालों में से एक हो सकता है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि दिसंबर तक सुरक्षा बलों की मौतों का आंकड़ा 1600 से 1700 तक पहुंच सकता है। यह पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था के लिए एक खतरे की घंटी है, जो यह दर्शाती है कि मौजूदा रणनीतियां आतंकियों को रोकने में फिलहाल नाकाम साबित हो रही हैं।
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क्षेत्रीय तनाव और ईरान का रुख
आंतरिक कलह के साथ-साथ पाकिस्तान को विदेशी मोर्चे पर भी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ अफगानिस्तान सीमा पर तनाव है, तो दूसरी तरफ ईरान के साथ संभावित संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व इन क्षेत्रीय हालातों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। दोतरफा दबाव के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे आने वाले महीनों में स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।












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