पाकिस्तान में नौ साल की लड़कियों की होगी शादी!

पाकिस्तान की एक धार्मिक संस्था ने बाल विवाह को जायज ठहराया है।
उन्होंने कहा है कि लड़कियों में यौवन के लक्षण दिखने और नौ साल की उम्र होने पर शादी करा दी जानी चाहिए।
काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडोलॉजी (सीआईआई) चेयरमैन मौलाना मोहम्मद खान शेरानी ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि समाज के कई धड़े काउंसिल के फैसलों को गंभीरता से नहीं लेते हैं।
उन्होंने कहा है कि कानून में शादी की न्यूनतम उम्र इस्लामिक कानून के हिसाब से नहीं है। इसे बदलना होगा। काउसिंल ने संसद से इस्लामिक मान्यता के अनुसार इस कानून में बदलाव करने मांग की है।
शेरानी ने सिंध असेंबली द्वारा बाल विवाह के खिलाफ कानून की भी आलोचना की। सीआईआई प्रमुख ने बताया कि पिता और दादा के शादी के लिए हामी भरने के बाद दो नाबालिगों की शादी करवाई जा सकती है। यदि यह शादी दादा या पिता के बाहर के व्यक्ति द्वारा करवाई जाती है तो दोनों नाबालिग, बालिग होने तक शादी से इनकार कर सकते हैं।
शेरानी ने अपने फैसले के बारे में बताया कि निकाह किसी भी उम्र में किया जा सकता है, लेकिन दुल्हन सिर्फ यौवन अवस्था में आने के बाद ही दूल्हे के साथ रह सकती है। उन्होंने बताया मुस्लिम मैरिज लॉ 1961 में कई अनुच्छेद गैर-इस्लामिक हैं। कानून के सेक्शन-6 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि पुरुष द्वारा अपनी पत्नी से दूसरी शादी की इजाजत लेना भी गैर इस्लामिक माना जाता है। यह हक महिलाओं को नहीं है।
हालांकि पाकिस्तान की सिविल सोसाइटी ने इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। ह्यूमन राइट कमीशन ऑफ पाकिस्तान प्रमुख जोहरा यूसुफ ने कहा है कि महिलाएं और लड़कियों को इस देश में आसानी से निशाना बनाया जाता है। इस तरह के दकियानूसी फैसलों से सिर्फ महिलाओं और बच्चों पर अत्याचार ही होगा।












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