पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में मामूली इजाफा, देश को आर्थिक मुसीबत से निकाल पाएंगे शहबाज?
विदेशी सामान खरीदने के लिए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की इजाजत लेना जरूरी कर दिया गया है, लिहाजा पाकिस्तान के फैक्ट्री संचालक और दूसरे कारोबारी विदेशी सामान नहीं खरीद पा रहे हैं।

Pakistan News: पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार होती कमी के बीच मामूली इजाफा दर्ज किया गया है। हालांकि, विदेशी मुद्रा भंडार में होने वाली ये बढ़ोतरी उस वक्त हुई है, जब देश ने तमाम जरूरी और गैर-जरूरी सामानों की खरीददारी पर रोक लगा दी है, ताकि डॉलर बचाया जा सके, फिर भी पाकिस्तान के पास दो हफ्तों तक का ही आयात क्षमता बचा है। दूसरी तरफ शहबाज शरीफ की सरकार ने आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए देश पर टैक्स बम फोड़ दिया है, जिसको लेकर पूरे देश में भारी गुस्सा है और लोग पूछ रहे हैं, कि क्या शहबाज शरीफ देश को इस बड़ी मुसीबत से बाहर निकाल पाएंगे?

विदेशी मुद्रा भंडार में मामूली इजाफा
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने गुरुवार को कहा है, कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 10 फरवरी को खत्म हुए सप्ताह में 27.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 3.2 अरब डॉलर हो गया है। स्टेट बैंक के मुताबिक, पाकिस्तान के कॉमर्शिलय बैंकों के पास शुद्ध विदेशी मुद्रा भंडार 5.5 अरब डॉलर बचा है, जिससे देश का कुल तरल विदेशी भंडार 8.7 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, आरिफ हबीब लिमिटेड ने काउंट करते हुए कहा है, कि देश का मौजूदा विदेशी डॉलर भंडार दो सप्ताह के आयात से थोड़ा ज्यादा कवर करेगा। आपको बता दें, कि पिछले हफ्ते पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर से भी नीचे चला गया था और 2.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया था।
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आईएमएफ के साथ डील होगा फाइनल?
आईएमएफ से 1.1 अरब डॉलर की कर्ज की हासिल करने के लिए पाकिस्तान सरकार लगातार हाथ पैर मार रही है, लेकिन आईएमएफ प्रोग्राम को लेकर अभी तक सस्पेंस बरकरार है और आईएमएफ ने साफ कर दिया है, कि जब तक उसकी सभी शर्तों को नहीं माना जाता है, तब तक पाकिस्तान को लोन की किश्त नहीं दी जाएगी। वहीं, पाकिस्तान के दोस्त देश चीन और सऊदी अरब भी आईएमएफ प्रोग्राम के फाइनल होने का ही इंतजार कर रहे हैं। डिप्लोमेटिक सूत्रों के मुताबिक, आईएमएफ प्रोग्राम पर बात बनने के बाद ही पाकिस्तान को ये दोनों देश मदद करने की सोच सकते हैं। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में आईएमएफ प्रतिनिधिमंडल के साथ 31 जनवरी से 9 फरवरी तक 10 दिनों की गहन बैठक की, लेकिन ये वार्ता अंतिम समझौते पर नहीं पहुंच सका।

पाकिस्तान की रेटिंग डाउनग्रेड
वहीं, रेटिंग एजेंसी फिच के एक बयान में मंगलवार को कहा है, कि फिच रेटिंग्स ने पाकिस्तान की Long-Term Foreign-Currency Issuer Default Rating (आईडीआर) को "CCC+" से घटाकर "CCC-" कर दिया है। रेटिंग में डाउनग्रेड, देश की बाहरी तरलता और फंडिंग की स्थिति में और तेज गिरावट और विदेशी मुद्रा भंडार के गंभीर रूप से निम्न स्तर तक पहुंचने को दर्शाता है। आपको बता दें, कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार अब गिरकर 3 अरब डॉलर के नीचे चला गया था और देश के पास विदेशी सामान खरीदने की क्षमता करीब करीब खत्म हो चुकी है। हालांकि, रेटिंग एजेंसी फिच ने इस बात की उम्मीद जताई है, कि आईएमएफ के साथ पाकिस्तान की कर्ज की किश्त को लेकर डील सफल होगी, लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है, कि क्या पाकिस्तान आईएमएफ की शर्तों को मानता है या नहीं?












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