पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री को धक्का मारते हुए जेल ले गई पुलिस, जमानत के बाद भी कुरैशी गिरफ्तार
Shah Mahmood Qureshi arrested: पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी, जो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के काफी करीबी रहे हैं, उन्हें धक्का मारते हुए पाकिस्तान की पुलिस जेल लेकर गई है।
शाह महमूद कुरैशी को जेल ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा रहा है, कि शाह महमूद कुरैशी को धक्का मारते हुए पुलिस जेल लेकर जा रही है। पाकिस्तान में 9 मई के हिंसक विरोध प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में बुधवार को रावलपिंडी पुलिस ने अदियाला जेल से उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया।

सबसे हैरानी की बात ये है, शाह महमूद कुरैशी को उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब सुप्रीम कोर्ट से साइफर मामले में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन जेल से रिहा होते ही 9 मई को हिंसा मामले में जेल के बाहर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जेल के बाहर मीडिया से बात करते हुए कुरैशी ने कहा, कि उन्हें फर्जी मामले में गिरफ्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''मैं निर्दोष हूं और मुझे राजनीतिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।''
आपको बता दें, कि पाकिस्तान में इमरान खान के करीबी नेताओं को इसी तरह से गिरफ्तार किया गया है और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के करीब करीब सभी बड़े नेता इस वक्त जेल में हैं, जबकि 8 फरवरी को पाकिस्तान में आम चुनाव होने वाले हैं।
शाह महमूद कुरैशी का गिरफ्तारी का वीडियो
अदियाला जेल से बाहर निकलने के बाद शाह महमूद कुरैशी ने मीडिया से कहा, कि यह "उत्पीड़न, अन्याय है, यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का मजाक है।" उन्होंने कहा, ''मुझे बिना किसी कारण के राजनीतिक उत्पीड़न का शिकार बनाया जा रहा है।''
इस साल की शुरुआत में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के परिसर से भ्रष्टाचार के एक मामले में पीटीआई के संस्थापक इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद 9 मई को हुए दंगों से संबंधित मामलों में कुरैशी को जेल में रखा गया है।
सूत्रों के मुताबिक, शाह महमूद कुरैशी को जीएचक्यू हमले के मामले में गिरफ्तार किया गया था और उन्हें आतंकवाद विरोधी अदालत (एटीसी) में पेश किया जाएगा।
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाह महमूद कुरैशी को रावलपिंडी के डिप्टी कमिश्नर द्वारा जारी किए गये 3-एमपीओ हिरासक आदेश को रद्द किए जाने के बाद रावलपिंडी पुलिस ने फिर से उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
पीटीआई नेता को आरए बाजार और सदर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों द्वारा एक बख्तरबंद वाहन में रावलपिंडी के एक पुलिस स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया गया है।
रावलपिंडी के उपायुक्त हसन वकार चीमा ने 9 मई के हिंसक विरोध प्रदर्शन में कथित संलिप्तता को लेकर एक दिन पहले ही कुरेशी की हिरासत का आदेश जारी किया था।
साइफर मामले (गोपनीय दस्तावेज लीक) में विशेष अदालत के न्यायाधीश अबुअल हसनत ज़ुल्कारनैन द्वारा उनकी रिहाई के आदेश जारी करने के कुछ समय बाद ही कुरैशी को हिरासत में लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह साइफर मामले में उनकी जमानत को मंजूरी दे दी थी।
एक बयान में, रावलपिंडी पुलिस ने कहा, कि उन्हें 9 मई के मामलों के संबंध में कुरैशी से पूछताछ करने के लिए कहा गया था, उन्होंने कहा कि पीटीआई नेता पर हिंसक विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामलों में मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस ने कहा कि क़ुरैशी को साइफर मामले में जमानत दे दी गई थी लेकिन उसकी 15 दिन की हिरासत का आदेश जारी किया गया था।
कुरैशी के हिरासत आदेश में कहा गया है, कि रावलपिंडी के पुलिस अधिकारी (सीपीओ) ने एक पत्र के माध्यम से सूचित किया था, कि कुरैशी एक राजनीतिक दल का सदस्य हैं, जो राज्य विरोधी गतिविधियों में शामिल थे और सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे।
पत्र में कहा गया हैस कि "संभावना है कि जेल से रिहा होने के बाद, वह फिर से अपनी गतिविधियां जारी रखेंगे, जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है, जो आम जनता के जीवन और संपत्ति के लिए हानिकारक हो सकती है।"
पत्र में कहा गया है, कि रावलपिंडी सीपीओ ने सिफारिश की है, कि कुरैशी को उसकी गैरकानूनी गतिविधियों से रोकने के लिए 45 दिनों के लिए हिरासत में लिया जाए।
यानि, कुरैशी को अगले 45 दिनों तक और जेल में रखने की कोशिश है, जबतक कि पाकिस्तान में चुनाव खत्म ना हो जाए। पाकिस्तान में 8 फरवरी को आम चुनाव होने हैं।
आपको बता दें, कि इस साल की शुरुआत में 9 मई को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पूरे पाकिस्तान में सेना के खिलाफ प्रदर्शन किए गये थे और सेना की संपत्तियों पर हमला किया गया था। इसके बाद से ही इमरान खान के बुरे दिन शुरू हो गये थे।
इमरान खान की सरकार में विदेश मंत्री रहे कुरैशी के खिलाफ इस साल अगस्त में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत साइफर मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसमें उनके खिलाफ इमरान खान के साथ मिलकर गोपनीय दस्तावेजों को लीक करने का आरोप है।












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