सिंध को वापस क्यों नहीं ले सकते... CM योगी के बयान पर तिलमिलाया पाकिस्तान, अखंड भारत से जोड़ा
पाकिस्तान ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान की आलोचना की है। पड़ोसी मुल्क ने सीएम योगी के सिंध को वापस लेने पर की गई टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसे भड़काऊ टिप्पणी करार दिया है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ने सोमवार को सिंध के संबंध में भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री के हालिया बयान की आलोचना करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी बेहद गैर जिम्मेदाराना और उनकी विस्तारवादी मानसिकता को दर्शाती है।

विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज ज़हरा बलूच ने एक बयान में कहा, "हम लखनऊ में राष्ट्रीय सिंधी सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, भारत के सत्तारूढ़ दल के प्रमुख सदस्य और कट्टर हिंदुत्व विचारधारा के अनुयायी द्वारा की गई अत्यधिक गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणियों की निंदा करते हैं।"
बलूच ने कहा, "स्पष्ट रूप से, मुख्यमंत्री की भड़काऊ टिप्पणियां 'अखंड भारत' के अनावश्यक दावे से प्रेरित हैं। ये टिप्पणियाँ एक संशोधनवादी और विस्तारवादी मानसिकता को प्रकट करती हैं जो न केवल भारत के पड़ोसी देशों बल्कि अपने स्वयं के धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान और संस्कृति को भी अपने अधीन करना चाहती है।"
बलूच ने भारतीय नेताओं से "वर्चस्ववादी और विस्तारवादी महत्वाकांक्षाओं" को बढ़ावा देने के बजाय शांतिपूर्ण दक्षिण एशिया के निर्माण के लिए पड़ोसी देशों के साथ विवादों को सुलझाने का आग्रह किया।
आपको बता दें कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अगर राम जन्मभूमि 500 साल बाद बाबरी मस्जिद का स्थान ले सकता है तो हम सिंधु को भी वापस ले सकते हैं। रविवार को होटल हॉलिडे इन में सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सिंधी अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने ये बात कही।
सीएम योगी ने कहा कि सिंधी समाज को अपने इतिहास के बारे में अपनी वर्तमान पीढ़ी को बताने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ एक व्यक्ति की जिद की वजह से देश को विभाजन की त्रासदी से गुजरना पड़ा। देश के बंटवारे की वजह से लाखों लोगों का कत्लेआम हुआ। भारत का एक बड़ा भू-भाग पाकिस्तान के रूप में चला जाता है।
उन्होंने कहा कि सिंधी समाज ने उस दर्द को सबसे ज्यादा सहा है, उन्हें अपने मातृभूमि को छोड़ना पड़ा। सीएम योगी ने कहा कि आज भी आतंकवाद के रूप में हमें विभाजन की त्रासदी के दंश को झेलना पड़ता है।












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