Chahbahar vs Gwadar port: जानिए कुछ खास बातें और रणनीतिक महत्व
नई दिल्ली। पिछले दिनों भारत और ईरान के बीच हुई चाबहार बंदरगाह डील पर आखिरकार पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आ ही गई है। हर कोई हैरान था कि आखिर पाक की ओर से कहा गया है कि भारत और ईरान के बीच हुई डील पाक की सुरक्षा के लिए खतरा है।

भारत की चिंंता को कम करती डील
पाक की यह प्रतिक्रिया लाजमी भी है क्योंकि कहीं न कहीं इस डील के साथ भारत रणनीतिक तौर पर मजबूत हुआ है। चीन और पाक के बीच ग्वादर पोर्ट डील कहीं न कहीं भारत के लिए चिंता का विषय थी और विशेषज्ञों की मानें तो चाबहार डील इस चिंता को कुछ हद तक कम करती है। आखिर ऐसा क्या है इन दोनों डील में जो दुनिया की नजरें अब ग्वादर की जगह चाबहार पर ज्यादा टिक गई हैं।
आइए आज आपको चाबहार और ग्वादर पोर्ट की रणनीतिक अहमियत के बारे में बताते हैं।
एशिया में आ सकता है रणनीतिक संकट
- पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट और ईरान स्थित चाहबहार पोर्ट दोनों के बीच करीब 72 किमी की फासला है।
- दोनों ही कोई बहुत बड़े बंदरगाह नहीं हैं लेकिन भौगोलिक स्थिति की वजह से इनकी अहमियत काफी ज्यादा है।
- दोनों ही ऐसी स्थिति में हैं कि किसी भी समय एशिया में रणनीतिक संतुलन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।
- ग्वादर पोर्ट होरमुज जलमार्ग के काफी करीब है और इस वजह से यह चीन को भारतीय महासागर तक पहुंचने का आसान मार्ग मुहैया कराता है।
- ग्वादर पोर्ट से चीन न सिर्फ इंडियन नेवी बल्कि अमेरिकी नेवी की अरब सागर और पर्शियन गल्फ में होने वाली गतिविधियों पर भी आसानी से नजरें रख सकता है।
भारत के लिए अफगानिस्तान पर पकड़ बनाने का रास्ता
- ईरान का चाबहार बंदरगाह भारत के लिए एक ट्रंप कार्ड की तरह है।
- भारत के लिए अफगानिस्तान तक पहुंचने का रास्ता।
- अफगानिस्तान के अलावा रूस और मध्य एशिया में भी आसान पहुंच।
- भारत को पाकिस्तान और चीन की नेवी पर भी नजर रखने में मदद करेगा।
- पोर्ट प्रोजेक्ट भारत और ईरान के अलावा अफगानिस्तान के लिए भी काफी खास है।
- इस प्रोजेक्ट के बाद अफगानिस्तान मिडिल ईस्ट और यूरोप तक कई अहम वस्तुओं का निर्यात कर सकता है।
चाबहार वर्सेज ग्वादर
- चाबहार पोर्ट बलूचिस्तान के दक्षिण में और सिस्तान प्रांत में स्थित है।
- यह ईरान का अकेला ऐसा पोर्ट है जो भारत को ईरान तक सीधा रास्ता मुहैया कराता है।
- ओमान की खाड़ी और पर्शियन गल्फ के पास होने की वजह से यह पोर्ट हमेशा से एक एतिहासिक व्यापार केंद्र रहा है।
- चाबहार पोर्ट का मौसम अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित मियामी पोर्ट जैसा ही है।
- यह मीडिल ईस्ट का सबसे ठंडा पोर्ट है।
- इसका निर्माण वर्ष 1973 से हो रहा है लेकिन संसाधनों की कमी के अभाव में इसमें लगातार देरी होती गई।
ग्वादर पोर्ट और चीन
- वहीं ग्वादर पोर्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है।
- यह इलाका प्राकृतिक गैस और तेल का भंडार रहा है।
- यहां पाकिस्तान सबसे ज्यादा तेल और गैस का उत्पादन करता है।
- ग्वादर पोर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2002 में हुई थी।
- चीन और पाक के इनवेस्टर्स ने इस प्रोजेक्ट मे अब तक कई मिलियन डॉलर्स की रकम खर्च कर डाली है।
- चीन की ओर से अब 200 मिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट।
- इस प्रोजेक्ट का पहला फेज वर्ष 2005 में पूरा हो गया था।
- ग्वादर की जनसंख्या 2001 तक सिर्फ 5000 थी।
- चीन का प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद जनसंख्या 12,500 तक पार कर गई।
- यहां सेे चीन ऑयल सप्लाई रूट्स पर नजर रखना चाहता है।












Click it and Unblock the Notifications