जो बाइडेन ने इमरान खान को अब तक नहीं किया टेलीफोन तो पाकिस्तान ने दी धमकी, ब्लैकमेलिंग पर उतरा

पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मोइद यूसुफ ने अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में कहा है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान की टॉप लीडरशिप को ऐसे ही नजर अंदाज करता रहेगा तो पाकिस्तान भी दूसरे विकल्पों की तलाश करेगा।

वॉशिंगटन, इस्लामाबाद, अगस्त 04: राष्ट्रपति बनने के बाद जो बाइडेन ने अभी तक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को फोन नहीं किया है और ना ही उन्होंने इमरान खान से अब तक कोई बात की है, जिससे पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। 20 जनवरी को जो बाइडेन ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी और तब से इमरान खान फोन की तरफ टकटकी लगाकर देखते रहते हैं, लेकिन अमेरिका से इस्लामाबाद में अभी तक घंटी नहीं बजी है, जिसके बाद अब इमरान खान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मोइद यूसुफ ने अमेरिका को ब्लैकमेल करने की धमकी दे दी है।

अमेरिका को पाकिस्तान की धमकी

अमेरिका को पाकिस्तान की धमकी

पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर मोइद यूसुफ ने अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में कहा है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान की टॉप लीडरशिप को ऐसे ही नजर अंदाज करता रहेगा तो पाकिस्तान भी दूसरे विकल्पों की तलाश करेगा। पाकिस्तानी एनएसए का ये बयान अमेरिका को ब्लैकमेल करने की धमकी की तरह देखा जा रहा है। पाकिस्तान के एनएसए ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि ''अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अभी तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से बात नहीं की है, जो कि अपने आप में इतना महत्वपूर्ण देश है, जो अफगानिस्तान के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है। हम अमेरिका के संकेतों को समझ नहीं पा रहे हैं''।

पाकिस्तान देखेगा दूसरा विकल्प

पाकिस्तान देखेगा दूसरा विकल्प

पाकिस्तान के एनएसए ने कहा कि ''हमें अमेरिका की तरफ से बार बार कहा जाता है कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को फोन किया जाएगा, और फोन नहीं करने के पीछे टेक्निकल वजहें हैं, या जो भी वजह है, लेकिन सच कहूं तो लोगों को इसपर विश्वास नहीं है।'' पाकिस्तान के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने एक तरह से अमेरिका को ब्लैकमेल करने के अंदाज में फाइनेंशियल टाइम्स को कहा कि ''अगर एक फोन कॉल रियायत है, अगर सिक्योरिटी के संबंध में रियायत चाहिए, तो फिर पाकिस्तान के पास दूसरे ऑप्शन्स हैं''। हालांकि, पाकिस्तानी एनएसए ने इस वाक्य का मतलब विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। लेकिन, अर्थ निकाला जा रहा है कि अफगानिस्तान और अपनी रणनीतिक जमीन को लेकर पाकिस्तान ने एक तरह से अमेरिका को धमकी दी है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान को नजर अंदाज करता है तो वो खुलकर तालिबान का पक्ष लेगा और अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया को खराब कर देगा।

पाकिस्तान को है अलग-थलग

पाकिस्तान को है अलग-थलग

दरअसल, अफगानिस्तान में पाकिस्तान के डबल रोल को अब अमेरिका जान चुका है। अमेरिका ये भी जानता है कि पाकिस्तान की मदद से ही तालिबान अफगानिस्तान में लगातार हिंसा कर रहा है, लिहाजा पाकिस्तान की जमीन का अफगानिस्तान के लिए रणनीतिक महत्व मानते हुए भी अमेरिका ने पाकिस्तान को पूरी तरह से नजर अंदाज कर रखा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने जो बाइडेन ने पदभार संभालने के बाद अब तक इमरान खान को फोन नहीं किया है, जिससे इमरान खान गुस्से में हैं और पिछले महीने वो अमेरिका के खिलाफ काफी जहर उगल चुके हैं। यहां तक कि उन्होंने अफगानिस्तान में बर्बादी के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहरा दिया था।

विकल्प का खुलासा नहीं

विकल्प का खुलासा नहीं

फाइनेंशियल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान के एनएसए ने ये नहीं बताया कि पाकिस्तान के पास दूसरे विकल्प क्या हैं। लेकिन, रिपोर्ट में कहा गया है कि ''पाकिस्तान के अपने 'भाई' चीन के साथ काफी ज्यादा गहरे संबंध हो चुके हैं, जिसने पाकिस्तान में इन्फ्रांस्ट्रक्चर पर (बीआरआई प्रोजेक्ट-सीपीईसी) अरबों डॉलर का निवेश किया है''। वहीं, जो बाइडेन टीम के एक अधिकारी ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा कि ''विश्व में अभी कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष हैं, जिन्हें अभी तक राष्ट्रपति जो बाइडेन ने फोन नहीं किया है और जब सही वक्त आएगा, तब राष्ट्रपति जो बाइडेन भी इमरान खान को फोन कर लेंगे''

ट्रंप ने पाकिस्तान को कहा था ''झूठा''

ट्रंप ने पाकिस्तान को कहा था ''झूठा''

आपको बता दें कि अमेरिका का रवैया पाकिस्तान के प्रति पिछले कई सालों से बदल रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंर ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 2 अरब डॉलर की मदद को कैंसिल कर दिया था। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को ''किसी काम का नहीं और झूठा'' देश बताया था। वहीं, जो बाइडेन भी ट्रंप के नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं। दरअसल, अमेरिका में राष्ट्रपति का चेहरा भले ही बदल जाता है, लेकिन प्रशासन ही तय करता है कि किस देश के साथ अमेरिका के क्या संबंध होंगे। लिहाजा, ऐसा माना जा रहा है कि पाकिस्तान अब अमेरिका के गुड लिस्ट में कहीं नहीं है और ब्लैकमेलिंग के बाद भी वॉशिंगटन से इस्लामाबाद में फोन नहीं जाएगा।

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