इमरान खान, समर्थकों को सजा देने के लिए बनाए जाएंगे 3 आर्मी कोर्ट, PAK में पहली बार आम नागरिकों का कोर्ट मार्शल
इमरान खान को गिरफ्तार करने के बाद 9 और 10 मई को पाकस्तान जलता रहा और प्रदर्शनकारियों ने सेना के मुख्यालय में भी तोड़फोड़ की थी और कई सार्वजनिक संपत्तियों को फूंक दिया था।

Pakistan News: पाकिस्तान की आर्मी इमरान खान के खिलाफ ऑल ऑउट एक्शन में उतर गई है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 9 और 10 मई को पाकिस्तान में हिंसा करने वाले इमरान खान के समर्थकों को सजा दिलाने के लिए तीन सैन्य अदालतों का गठन किया जाएगा।
जियो न्यूज के मुताबिक, सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला करने, जिन्ना हाउस को आग लगाने और सशस्त्र बलों को बदनाम करने में शामिल नागरिकों पर मुकदमा चलाने के लिए तीन सैन्य अदालतों का गठन किया जाएगा।
इन सैन्य अदालतों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आर्मी एक्ट और ऑफिसियल सीक्रेट एक्ट के तहत मुकदमे चलाए जाएंगे और इन धाराओं में उम्र कैद और फांसी की सजा का प्रावधान है। माना जा रहा है, कि इमरान खान और उनके समर्थकों को सबक सिखाने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को फांसी की सजा दी जा सकती है।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने खुद कहा है, कि 9 मई का दिन पाकिस्तान के इतिहास में 'काले दिन' के तौर पर याद रखा जाएगा और इसमें शामिल आरोपियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
जियो न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि पाकिस्तानी आर्मी, तीन सैन्य अदालतें स्थापित करने पर विचार कर रहा है।
इमरान खान का अब क्या होगा?
सूत्रों ने बताया है, कि पाकिस्तानी सेना अधिनियम के चैप्टर-9 के माध्यम से स्थापित सैन्य अदालतों को 21वें संशोधन के माध्यम से संशोधित किया गया है। आर्मी पब्लिक स्कूल नरसंहार के बाद 2015 में इस खंड को संशोधित किया गया था, और इस बिल को 6 जनवरी 2015 को पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में पास किया गया था।
जियो के मुताबिक, पाकिस्तान के स्पेशल प्रॉसीक्यूटर रिजवान अब्बासी ने कहा, कि "संविधान में किया गया ये संशोधन सेना को ये छूट देता है, कि वो स्पेशल मामलों में सैन्य अदालतों का गठन कर सके और आतंकवादी घटनाओं के आरोपियों को इस स्पेशल मिलिट्री कोर्ट में सुनवाई के लिए खड़ा कर सके"।
यानि, अगर सैन्य अदालतों का गठन होता है, तो इसका मतलब ये हुआ, कि उत्पात मचाने वाले इमरान समर्थकों के खिलाफ आतंकवादी धाराओं में मुकदमा चलेगा, जिसके लिए उन्हें फांसी तक दी जा सकती है।
पाकिस्तानी सेना ने, अपने आप को ताकतवर बनाने और आम नागरिकों को भी सजा देने के लिए 1977 और 1998 में भी संविधान में संशोधन करवाया था और इस तरह से पाकिस्तान की सेना, अपना सैन्य अदालत बनाकर, किसी भी नेता या किसी भी आम नागरिक के तकदीर का फैसला कर सकती है।
आर्मी कोर्ट में आम नागरिकों का कोर्ट मार्शल
अभी तक इमरान खान के 8 हजार समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है और उन्हें सजा दिलाने के लिए तीन सैन्य अदालतों के गठन की बात चल रही है। इसका मतलब ये हुआ, कि पाकिस्तान में पहली बार हजारों आम नागरिकों का कोर्ट मार्शल किया जाएगा।
बहुत साधारण शब्दों में समझें, तो पहली बात ये है, आर्मी कानून सेना के लिए होता है, जबकि सिविल कानून आम नागरिकों के लिए होता है। आम नागरिकों को आर्मी कानून के अंदर सुनवाई करने का मतलब ये हुआ, कि सिविल कोर्ट्स के पास इतनी ताकत नहीं बची है, कि वो किसी मामले की सुनवाई कर सके।
दूसरी बात, आम नागरिकों के खिलाफ आर्मी कोर्ट में मुकदमा चलने का मतलब है, कि देश की सरकार के पास ताकत नहीं है, कि वो किसी मामले की सुनवाई कर सके।
तीसरी बात ये, कि आर्मी कोर्ट में आम नागरिकों पर मुकदमा चलाने का मतलब ये है, कि आर्मी ने देश की कानून व्यवस्था को अपनी हाथों में ले लिया है, जो कि नागरिकों द्वारा चुनी गई सरकार के पास होता है।
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पाकिस्तान में सैन्य अदालत सीधे सेना के अधीन होती हैं और आर्मी कोर्ट के फैसले को, आम अदालतों में चुनौती नहीं दी जा सकती है। यानि, ऐसा हो सकता है, कि पाकिस्तान में अगले कुछ महीनों में सैकड़ों लोगों को फांसी और उम्रकैद की सजा सुनाई जाए, ताकि भविष्य में कोई भी आम नागरिक, सेना के खिलाफ मुंह खोलने की हिम्मत ना कर सके।
इसके साथ ही, अब इमरान खान का भविष्य भी अंधकारमय लग रहा है, क्योंकि उन्हें इस उपद्रव का मास्टरमाइंड बनाया जा सकता है और इमरान खान को भी फांसी या उम्र कैद की सजा सुनाई जा सकती है।












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