सुप्रीम कोर्ट में हारी पाकिस्तान सरकार, इमरान खान जीते, शहबाज के पास मॉर्शल लॉ लगाना ही अकेला विकल्प?
सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान ने पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा चुनाव पर पाकिस्तान के चुनाव आयोग के फैसले को अमान्य घोषित कर दिया है, जबकि सरकार का कहना है, कि वो तीन जजों के बेंच के फैसले को नहीं मानेगी।

Pakistan News: पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आज शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ फैसला सुनाकर देश में आपातकाल या मॉर्शल लॉ लगाने का रास्ता खोल दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की काफी तारीफ हो रही है और भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस काटजू ने भी सुप्रीम कोर्ट ऑफ पाकिस्तान को सख्त फैसले के लिए बधाई दी है, लेकिन इसके साथ ही पाकिस्तान का संकट और भी ज्यादा बढ़ गया है, क्योंकि शहबाज शरीफ की सरकार किसी भी हाल में पाकिस्तान में चुनाव कराने के इरादे में नहीं है। लिहाजा, पाकिस्तान के एक्सपर्ट्स अब ट्वीट करते हुए पूछ रहे हैं, कि अब देश में आपातकाल लगेगा या फिर मॉर्शल लॉ? वहीं, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के स्पेशल असिस्टेंट फहद हुसैने ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस्तीफा दे दिया है और अब माना जा रहा है, कि पाकिस्तान में आने वाले वक्त में स्थिति काफी खराब हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट में क्यों हारी पाकिस्तान सरकार?
शहबाज शरीफ की सरकार ने पिछले हफ्ते ही संसद में एक बिल पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के हाथों से स्वत: संज्ञान लेने का अधिकार छीन लिया था। उन्होंने बकायदा संसद में वोटिंग के जरिए चीफ जस्टिस के पर कतर दिए थे। यानि, अब पाकिस्तान के चीफ जस्टिस, किसी भी मामले पर स्वत: संज्ञान नहीं ले सकते हैं। इस बीच, इमरान खान, जो पिछले साल से ही देश में चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं, वो पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा में चुनाव टालने की याचिका लेकर पहुंच गये। इमरान खान की पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए अनुरोध किया, कि वो चुनाव आयोग को मई महीने में चुनाव करवाने के आदेश दें और सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की पार्टी के अनुरोध पर मुहर लगा दी है। दरअसल, 30 अप्रैल को पंजाब में चुनाव की तारीख निर्धारित की गई थी, लेकिन बाद में इसे 8 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया गया। इमरान खान ने आरोप लगाया, कि चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख बढ़ाने का फैसला शहबाज शरीफ के कहने पर लिया, लिहाजा उस फैसले को रद्द किया जाए और सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्शन कमीशन के फैसले को असंवैधानिक बताकर रद्द कर दिया है, जो शहबाज शरीफ के लिए बहुत बड़ा झटका है।
पाकिस्तान सरकार बनाम सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने इलेक्शन कमीशन के अक्टूबर में चुनाव कराने के फैसले को असंवैधानिक करार दिया है और शहबाज शरीफ की सरकार को आदेश दिया है, कि वो मई में चुनाव कराने के लिए 21 अरब रुपया जारी करे। दूसरी तरफ, शहबाज शरीफ की सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था, कि वो सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच के फैसले को स्वीकार नहीं करेगी। दिलचस्प बाद ये है, कि सरकार के इस ऐलान के बाद सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने पांच जजों की जिस बेंच को इस मामले पर सुनवाई के लिए तैयार किया था, उसके दो जजों ने इस्तीफा दे दिया और बेंच पांच जजों से घटकर तीन हो गया। शहबाज शरीफ के बड़े भाई नवाज शरीफ और देश के मौजूदा विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भी सार्वजनिक घोषणा कर दी, कि तीन जजों के बेंच को सरकार स्वीकार नहीं करेगी, भले ही देश में आपातकाल या मार्शल लॉ लगाने की नौबत ही क्यों ना आ जाए। खुद इमरान खान भी यही आशंका जता चुके हैं, लिहाजा अब सवाल उठ रहे हैं, कि शहबाज शरीफ के पास क्या विकल्प बचे हैं?
चुनाव क्यों नहीं करवाना चाहते हैं शहबाज शरीफ?
पिछले साल अप्रैल महीने में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए इमरान खान की सरकार गिरा दी गई थी, लेकिन पाकिस्तान में इमरान खान की जबरदस्त लोकप्रियता है। इमरान खान की रैलियों में लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है, जिसने शहबाज शरीफ समेत इमरान खान के तमाम विरोधियों को डरा रखा है। स्थिति ये है, कि पहली बार पाकिस्तान की आर्मी भी बैकफुट पर है। इमरान खान लगाकार आर्मी को निशाना बनाते आ रहे हैं और पाकिस्तान की सेना को भी नहीं सूझ रहा है, कि वो इमरान खान को कैसे रोके? अगर इस वक्त पाकिस्तान में आम चुनाव होते हैं, तो इमरान खान की पार्टी पीटीआई की एकतरफा जीत की संभवना जताई गई है, जो शहबाज शरीफ नहीं चाहते हैं, लिहाजा वो चुनाव कराने की इजाजत ही नहीं दे रहे हैं। वहीं, पंजाब और खैबर पख्तूख्वा में भी इसीलिए चुनाव नहीं करवाए जा रहे हैं, क्योंकि इन दोनों जगहों पर अगर इमरान खान को विशालकाय जीत मिलती है, तो पाकिस्तान सरकार तय समय में देश में भी आम चुनाव कराने का दबाव काफी बढ़ जाएगा, लिहाजा शहबाज शरीफ और विपक्षी पार्टियां, हर वो फैसले कर रही है, जिससे चुनाव टाला जा सके। पाकिस्तान में इसी साल आम चुनाव होने हैं और इस बात की काफी कम उम्मीद है, कि सरकार चुनाव कराने की इजाजत दे।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या होगा?
अब स्थिति ये है, कि सुप्रीम कोर्ट ने मई में चुनाव कराने के आदेश दिए हैं, जबकि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नहीं मानने का ऐलान कर रखा है। किसी भी देश के लिए ये काफी अजीब ही नहीं, बल्कि अराजकता की स्थिति है, कि देश की सरकार ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने से इनकार कर दे। पीटीआई के उपाध्यक्ष शाह महमूद कुरैशी ने शीर्ष अदालत के बाहर मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं पूरे देश को बधाई देना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट ने आज आवश्यकता के सिद्धांत को दफन कर दिया।" लिहाजा, अब शहबाज शरीफ पर निर्भर करता है, कि वो चुनाव में जाने का फैसला करते हैं, या सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना। बिलावल भुट्टो पहले ही कह चुके हैं, कि उनकी पार्टी खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब चुनावों पर तीन न्यायाधीशों के किसी भी फैसले को स्वीकार नहीं करेगी और संवैधानिक संकट के कारण देश को "आपात जैसी स्थिति" या "मार्शल लॉ" का सामना करना पड़ सकता है। यानि, माना जा रहा है, कि शहबाज शरीफ की सरकार आर्मी के साथ मिलकर देशष में मार्शल लॉ या आपातकाल का ऐलान कर सकती है, ताकि लंबे समय तक चुनाव से बचा जा सके।
आपातकाल का क्या बनेगा आधार?
पाकिस्तान पिछले कई महीनों से आर्थिक कंगाली से जूझ रहा है और देश में आतंकी घटनाओं में भारी इजाफा हुआ है और सरकार के लिए आपातकाल लगाने का इससे अच्छा विकल्प कुछ और हो नहीं सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को मानने के बजाए, शहबाज शरीफ की सरकार देश में आर्थिक आपातकाल का ऐलान कर सकती है और चुनाव से जब तक चाहे, बची रह सकती है। वहीं, बिलावल भुट्टो ने कहा है, कि देश में आतंकी घटनाओं में काफी बढ़ोतरी हुई है, लिहाजा देश की सेना, रेंजर्स, पुलिस और तमाम सुरक्षा एजेंसियां देश की सुरक्षा में व्यस्त हैं, लिहाजा सरकार के पास सुरक्षाकर्मियों का अभाव है। बिलावल ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान पर अफगानिस्तान से आमंत्रित करके आतंकवादियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है। विदेश मंत्री ने यह भी आरोप लगाया है, कि पीटीआई प्रमुख की नीतियों ने भी आतंकवादियों के नेटवर्क को मजबूत किया। लिहाजा, सरकार आपातकाल लगाने के पीछे आतंकी घटनाओं का भी हवाला दे सकती है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान अपनी बर्बादी की लिखी कहानी पर काफी तेजी से बढ़ रहा है और पाकिस्तान के लिए आने वाला वक्त और विकराल होने वाला है।












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