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Ozone Layer को लेकर बहुत ही अच्छी खबर, इतने समय में पूरी तरह से भरने की उम्मीद: UN Video

ओजोन स्तर में काफी सुधार हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र के एक एक्सपर्ट पैनल ने आशा जताई है कि अगले कुछ दशकों में यह समस्या पूरी तरह से खत्म होने वाली है।

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ओजोन स्तर लगातार सामान्य स्थिति में परिवर्तित होती जा रही है। पिछली शताब्दी के आखिरी दो दशकों में यह भयानक संकट के तौर पर उभरी थी। उसी तरह से जैसे आज दुनिया ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज से चिंतित है। लेकिन, तब इसी दुनिया ने एक फैसला लिया और उसपर ईमानदारी से अमल होने का परिणाम है कि ओजोन परत में जो भी खालीपन आई थी, वह अपने वास्तविक स्थिति में बदल रही है। संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट पैनल ने बताया है कि दुनिया के किन क्षेत्रों में कबतक यह पूरी तरह से सामान्य स्तर को प्राप्त कर लेगी।

ओजोन परत धीरे-धीरे भर रही है- वैज्ञानिक

ओजोन परत धीरे-धीरे भर रही है- वैज्ञानिक

पृथ्वी की सुरक्षा कवच यानि ओजोन परत तेजी से भर रही है और आने वाले चार दशकों में इसके पूरी तरह से भर जाने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र के एक एक्सपर्ट पैनल ने यह बताया है। प्रत्येक चार साल में जारी होने वाला यह निष्कर्ष 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के ही मुताबिक है। इसके तहत पृथ्वी की ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के निर्माण और उपभोग पर रोक लगाई जाती है। ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी विकिरण (ultraviolet radiation) से बचाती है, इसलिए यह सुरक्षा कवच का काम करती है।

कई सारी बीमारियों से जुड़ा है नाता

कई सारी बीमारियों से जुड़ा है नाता

गौरतलब है कि अल्ट्रावायलेट किरणों को कई तरह की समस्याओं से जोड़ा जाता है। इसमें त्वचा का कैंसर, आंखों का मोतियाबिंद, कमजोर इम्यून सिस्टम और यहां तक कि खेती वाली जमीन को भी क्षति पहुंचाने के लिए भी इसे जिम्मेदार माना जाता है। 1970 के दशक से ओजोन परत पतली होनी शुरू हो गई थी। इसका मुख्य कारण क्लोरोफ्रोरोकार्बन (CFCs) को माना जाता है, जो कि केन स्प्रे, रेफ्रिजरेटरों, एयर कंडीशनरों और फोम इंसुलेशन के उपयोग से निकलती है। मई 1985 में तब इसको लेकर हाहाकार मच गया, जब वैज्ञानिकों ने ओजोन परत में छेद होने का पता लगा लगाया।

आर्कटिक में 2045 तक स्थिति सामान्य- रिपोर्ट

आर्कटिक में 2045 तक स्थिति सामान्य- रिपोर्ट

दो साल बाद यानि 1987 में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल लागू हुआ, जिसपर 46 देशों की सहमति थी। इसके अनुसार धीरे-धीरे ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले खतरनाक पदार्थों का इस्तेमाल बंद करना था। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रोटोकॉल 'उम्मीदों के अनुसार काम कर रहा है।' अब वैज्ञानिकों का मानना है कि ओजोन परत की भरपाई होने का मौजूदा ट्रेंड बरकरार रहा तो साल 2040 तक यह 1980 वाली स्थिति में आ जाएगी। यही नहीं वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आर्कटिक में यह 2045 तक और अंटार्कटिका में 2066 तक पूरी तरह सामान्य स्थिति प्राप्त कर लेगी।

अंटार्कटिक में मौसम ने निभाई बड़ी भूमिका

अंटार्कटिक में मौसम ने निभाई बड़ी भूमिका

वैज्ञानिकों ने पाया है कि अंटार्कटिक के ओजोन छिद्र में साल 2019 से लेकर 2021 के बीच मौसम संबंधी परिस्थितियों ने इसके आकार में हुए बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। जबकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2000 से अंटार्कटिक ओजोन गैप के आकार और गहराई में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही थी। (तस्वीरें- प्रतीकात्मक)

क्लाइमेट ऐक्शन के लिए दिखा रहा है रास्ता- वैज्ञानिक

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव पेटेरी तालस ने एक बयान में कहा है, 'क्लाइमेट ऐक्शन के लिए ओजोन ऐक्शन ने एक उदाहरण पेश किया है।' उनके मुताबिक, 'ओजोन को तबाह करने वाले रसायनों को धीरे-धीरे हटाने में हमारी सफलता हमें दिखाता है कि आपातकालीन स्थिति में क्या हो सकता है और क्या होना ही चाहिए-जीवाश्म ईंधन से दूर हटने के लिए, ग्रीन हाउस गैसों को कम करने के लिए और इस तरह से तापमान में बढ़ोतरी को सीमित करने के लिए..... '


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