Indian Citizenship: 12.5 वर्षों में 17.50 लाख से ज्यादा भारतीयों ने छोड़ी नागरिकता, परदेस को बनाया अपना ठिकाना
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि इस साल जून तक 87,026 भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है। एस जयशंकर ने एक लिखित उत्तर में कहा कि इसके साथ, 2011 से अब तक 17.50 लाख से अधिक लोगों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी है।
लोकसभा सांसद कार्ती पी चिंदबरम ने पूछा था कि पिछले 3 वर्षों में कितने लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी है? इसके साथ ही उन्होंने पूछा ये भारतीय किन देशों की नागरिकता हासिल कर रहे हैं। क्या नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या 12 वर्षों में सबसे ज्यादा है?

इसके जवाब में मंत्री ने कहा कि इसके साथ, 2011 से अब तक 17.50 लाख से अधिक लोगों ने अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ दी है।
एस जयशंकर ने कहा कि मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अपनी भारतीय नागरिकता त्यागने वाले भारतीयों की संख्या 2015 में 1,31,48, 2016 में 1,41,603, 2017 में 1,33,049, 2018 में 1,34,561, 2019 में 1,44,017, 2020 में 85,256, 2021 में 1,63,370 और 2022 में 2,25,620 है।
एस जयशंकर ने कहा कि पिछले दो दशकों में बड़ी संख्या में भारतीय ग्लोबल वर्कप्लेस की तलाश करते रहे हैं। इनमें से कई लोगों ने व्यक्तिगत सुविधा के कारण दूसरे देशों की नागरिकता लेने के विकल्प को चुना है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारतीयों ने कुल 130 देशों की नागरिकता हासिल की है जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, स्पेन, स्वीडन, स्विटजरलैंड, पुर्तगाल, इजरायल जैसे देश शामिल हैं।
भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि विदेश में रहने वाले भारतीय समुदाय इस देश के लिए एसेट हैं। ऐसे में सरकार ने इसका संज्ञान लिया है और मेक इन इंडिया के ईद-गिर्द ऐसे कई प्रयास किए हैं जिससे देशों में ही उनके प्रतिभा को निखारा जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्किल और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया है।
2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिक से अधिक संख्या में भारत के धनी लोग देश छोड़ने के इच्छुक हैं। दूसरे देशों की नागरिकता और वीजा दिलाने वाली ब्रिटेन स्थित अंतरराष्ट्रीय कंपनी हेनली ऐंड पार्टनर्स का कहना है कि गोल्डन वीजा यानी निवेश के जरिए किसी देश की नागरिकता चाहने वालों में भारतीयों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।












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