Operation Sindoor: जहां 26/11 के आतंकी कसाब की हुई थी ट्रेनिंग, वो 'मुरीदके कैंप' इंडियन एयरफोर्स ने फोड़ दिया
Operation Sindoor: 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले जिसमें 26 मासूम लोगों की जान चली गई थी, उसका बदला पाकिस्तान से ले लिया है। भारतीय सेना ने मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात में पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले कश्मीर में नौ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर नाम के इस अभियान में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के जिहादी ढांचो नेस्तनाबूद कर दिया। पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कोटली, मुरीदके और बहावलपुर में हुए हमलों की पुष्टि की। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा मुरीदके की हो रही है।
मुरीदके को क्यों निपटा दिया?
मुरीदके का आतंकियों का गढ़ रहा है। यह लश्कर-ए-तैयबा का हैडक्वार्टर है जोकि ग्रैंड ट्रंक रोड पर लाहौर से लगभग 33 किलोमीटर दूर स्थित इस जगह को 'मरकज़-ए-तैयबा' के नाम से भी जाना जाता है। यह आतंकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान और कश्मीर से भर्ती होने वाले लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए कुख्यात है। 1980 के दशक में आतंकवादी हाफ़िज़ सईद द्वारा ISI के समर्थन से इसे तैयार किया गया था। ये कैंप लगभग 200 एकड़ में फैला हुआ है।

लाहौर से 33 किलोमीटर दूर है मुरीदके
मरकज़-ए-तैयबा सिर्फ़ एक ट्रेनिंग सेंटर नहीं है, बल्कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एक बस्ती है। सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि इसके बीच में एक मस्जिद है, जिसके चारों ओर स्कूल, ट्रेनिंग सेंटर और जंग की तैयारी के लिए खुले मैदान हैं। इस परिसर में अस्पताल, कार्यालय, बैंक और तमाम व्यावसायिक यूनिट भी हैं। लाहौर से मात्र 33 किलोमीटर की दूरी पर इसका होना बताता है कि यह सुविधाओं के लिहाज से कितना जरूरी अड्डा है आतंकियों के लिए।
अलकायदा की फंडिंग से बना था मुरीदके
लश्कर-ए-तैयबा की शुरुआत 1980 के दशक में अफ़गानिस्तान में सोवियत सेना के खिलाफ़ लड़ने के लिए हुई थी। समय के साथ, यह भारत विरोधी आतंकवाद का अड्डा बन गया। 9/11 के बाद पाकिस्तान ने इसे दुनिया को दिखाने के लिए बैन कर दिया था। लेकिन इसे मदरसे के रूप में पुनः ब्रांड किए जाने के बावजूद, इसकी गतिविधियां आतंकवाद से जुड़ी रहीं। अजमल कसाब से पूछताछ में पता चला कि 2008 के मुंबई हमलों के लिए कई आतंकवादियों ने यहां ट्रेनिंग ली। ऐसा भी कहा जाता है कि इसे बनाने में अलकायदा आतंकी संगठन के सरगना ओसामा बिन लादेन ने उस वक्त एक करोड़ रुपए की मदद की थी।
आतंकियों का अड्डा मुरीदके
लश्कर-ए-तैयबा ने अफ़गानिस्तान और चेचन्या जैसे क्षेत्रों के तमाम जिहादी समूहों के साथ सहयोग करके अपना बनाया। ये आतंकी संगठन शिक्षा की आड़ में अलग-अलग जगहों से अपना फंड जुटाते रहे हैं। 2008 में, जमात-उद-दावा को आतंकवादी संगठन घोषित किया गया और FATF की ग्रे सूची में डाल दिया गया। जिसके बाद भी ये पाकिस्तान में पनपते रहे जमात-उद-दावा एक धार्मिक संगठन के रूप में काम करता है जो पाकिस्तान भर में 2500 से ज़्यादा दफ़्तरों और कई मदरसों के ज़रिए कट्टरपंथी विचारधारा फैलाता है। हालांकि पाकिस्तान ने जमात पर प्रतिबंध लगाने और सईद को गिरफ़्तार करने का दावा किया है, लेकिन भारत ने इन कार्रवाइयों को फॉर्मेलिटी बताते हुए हमेशा खारिज किया है। बावजूद इसेक पाकिस्तान ने कोई ठोस कार्रवाई ना तो आतंकवादियों पर की और ना ही इन ठिकानों पर
हाफिज सईद का पूरा खाका
हाफ़िज़ सईद का जन्म 1950 में पाकिस्तान के सरगोधा में हुआ था। उसे अमेरिका समेत कई देशों ने ग्लोबल टेररिस्ट घोषित किया है। सऊदी अरब में सईद की पढ़ाई होने के कारण वह वहाबी विचारधारा से प्रभावित था। भारतीय संसद पर हमले के बाद से कई बार जेल जाने के बावजूद, रिपोर्ट्स बताती हैं कि 2020 में सज़ा सुनाए जाने के बाद भी वह लाहौर में ISI की सुरक्षा में है और जेल के नाम पर उसे फाइव स्टार फेसिलिटी में रखा गया है।
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