तेल की कीमतों के लेकर वियना में OPEC की मीटिंग शुरू, जानिए भारत पर क्या पड़ेगा इसका असर
हवाना। कच्चे तेल के उत्पादन और कीमतों को लेकर वियना की राजधानी हवाना में शुक्रवार से ओपेक की मीटिंग शुरू हो चुकी है। इस मीटिंग में तेल उत्पादन पर फोकस किया जाएगा। सूत्रों की मुताबिक, इस मीटिंग में ओपेक देश तेल उत्पादन बढ़ाने के फैसला ले सकते हैं। हालांकि, तेल उत्पादन बढ़ाने के लेकर ओपेक सदस्य फिलहाल एकमत भी नहीं दिखाई दे रहे हैं। सऊदी अरब चाहता है कि तेल का उत्पादन बढ़ाया जाया, क्योंकि यह बाजार और ग्राहकों के हक में फैसला है। वहीं, ईराक, ईरान और वेनेजुएला तेल उत्पादन बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। बता दें कि ओपेक की मीटिंग में अगर तेल उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया जाता है, तो अतंरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों में गिरावट देखने को मिल सकती है।

10 लाख बैरल प्रति दिन बढ़ाने की मांग
रूस भले ही ओपेक का सदस्य नहीं है, लेकिन एक बड़ा तेल उत्पादक मु्ल्क होने के नाते इस मीटिंग में रूस और अन्य देश भी शामिल हुए हैं। रूस चाहता है कि अतंरराष्ट्रीय बाजार में तेल किल्लत को देखते हुए प्रति दिन 10 लाख बैरल क्रूड ऑयल की सप्लाई की जरूरत है। सऊदी अरब पहले पिछले एक माह से ही 5 लाख प्रति बैरल क्रूड ऑयल को बढ़ा चुका है, वहीं कुवैत ने भी अपने क्रूड ऑयल की सप्लाई पहले से ही बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि ईरान भी क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ाने के लिए राजी हो चुका है। इस मीटिंग में क्रूड ऑयल के उत्पादन का बढ़ना तय है, लेकिन कितना बढ़ेगा यह मीटिंग के बाद ही पता चलेगा।

भारत के लिए क्यों है यह मीटिंग इंपॉर्टेंट
चीन और अमेरिका के बाद भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। पिछले कुछ महीनों में भारत में तेल की कीमतों में इजाफा होने से केंद्र सरकार भी बैकफुट पर आ गई है। भारत में विपक्ष से लेकर आम जनता बढ़ती तेल कीमतों से परेशान सरकार को कई बार घेर चुकी है। तेल की कीमते बढ़ने से भारत को व्यापार में घाटा हो रहा है। उधर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी कई तेल कंपनियों से मीटिंग कर चुके हैं। अगर ओपेक की मीटिंग में क्रूड ऑयल प्रोडक्शन को लेकर फैसला लिया जाता है, तो ब्रेंट की कीमतें 65 डॉलर प्रति बैरल तक गिर सकती है और इससे तेल की कीमतों में कटौती हो सकती है। वहीं, अगर यही प्रवृत्ति जारी रही, तो सरकार को उत्पाद शुल्क में कटौती करने के लिए मजबूर किया जाएगा, जिससे भारत के राजकोषीय घाटे में वृद्धि होगी।

ओपेक पर अमेरिका और रूस का दबाव
अमेरिका में इस साल सितंबर में चुनाव होने और डोनाल्ड ट्रंप लगातार सऊदी अरब पर क्रूड ऑयल प्रोडक्शन को लेकर दबाव डाल रहा है। अमेरिका में भी तेल की कीमतों से लोग परेशान है और ट्रंप नहीं चाहते कि इसका आने वाले चुनाव पर असर पड़े। उधर रूस पहले ही इंटरनेशनल मार्केट को ध्यान में रखते हुए ओपेक से क्रूड ऑयल प्रोडक्शन को बढ़ाने की मांग कर चुका है। रूस नहीं चाहता कि तेल की कीमतों में बहुत अधिक इजाफा हो।
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