ब्रिटिश स्टडी में दावा, अधिक संक्रामक लेकिन कम घातक है ओमिक्रॉन
नई दिल्ली, जनवरी 01। दुनियाभर में इस वक्त कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से हाहाकार मचा हुआ है। कई यूरोपिय और अफ्रीकी देशों के अलावा एशियाई देशों में भी ओमिक्रॉन वेरिएंट का कहर देखने को मिल रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और कई बड़े हेल्थ एक्सपर्ट ओमिक्रॉन को कोरोना का अभी तक का सबसे तेजी से फैलने वाला वेरिएंट बता चुके हैं, लेकिन एक बीच एक ब्रिटिश स्टडी में बहुत अच्छी खबर सामने आई है। दरअसल, ब्रिटिश स्टडी में सामने आया है कि कोरोना का ओमिक्रॉन वेरिएंट संक्रामक तो है, लेकिन ये कम घातक है।

ओमिक्रॉन पर किये गए दर्जनों शोध
स्टडी के मुताबिक, ओमिक्रॉन से गंभीर समस्या होने का खतरा काफी कम होता है। दक्षिण अफ्रीका में 24 नवंबर को इस वैरिएंट का पहला केस दर्ज होने के बाद से ही इस पर दर्जनों अध्ययन किए गए हैं और अभी भी किए जा रहे हैं। इनमें से आधी स्टडी में यही दावा किया गया कि कोविड 19 के पिछले वेरिएंट के मुकाबले ओमिक्रॉन कम खतरनाक है। हालांकि, ये संक्रामक अधिक है।
कई अन्य देशों ने भी किया यही दावा
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एक अमेरिकी स्टडी में भी यही पाया गया था कि ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा कम रहता है। वहीं, हॉन्गकॉन्ग से संबंधित एक लैब ने अपने अध्ययन में ये पाया कि ओमिक्रॉन वेरिएंट डेल्टा के मुकाबले ब्रांकाई में 70 गुना ज्यादा तेजी से फैला है। लेकिन, ये फेफड़ों में डेल्टा के मुकाबले 10 गुना धीमी रफ्तार से फैलता है, इसलिए इसे कम घातक माना जा रहा है।
वैक्सीन भी असरदार?
ताजा स्टडी में ये भी पाया गया है कि वैक्सीन भी ओमिक्रॉन पर असरदार है। ये अध्ययन यूके हेल्थ सेक्युरिटी एजेंसी ने पब्लिश की है। इसमें कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर 5,28,176 ओमिक्रोन और 5,73,012 डेल्टा के मामलों पर स्टडी की गई थी।












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