Omega-3 fatty acids: फेफड़ों की सेहत के लिए फायदेमंद, शोध में और क्या पता चला? जानिए

ओमेगा-3 फैटी एसिड फेफड़ों को स्वस्थ रखने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की ओर से कराई गई एक नई रिसर्च में यह नतीजा सामने आया है। इस शोध में ओमेगा-3 फैटी एसिड के उपभोग के आवश्यकता को उजागर किया गया है।

न्यूयॉर्क में इथाका स्थित कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के नूट्रिशनल साइंस डिविजन में पीएचडी डायरेक्टर और इस रिसर्च पेपर की एक लेखक पेट्रीसिया ए कैसानो ने कहा है, 'हम कैंसर और हृदय रोग में आहार की भूमिका के बारे में बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन फेफड़ों की पुरानी बीमारी में आहार की भूमिका के बारे में कम ही जानते हैं।'

omega-3 fatty acids benefits

'फेफड़ों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है'
उन्होंने कहा कि 'यह शोध इस बात के साक्ष्यों को आगे बढ़ाता है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड, जो स्वस्थ आहार का एक हिस्सा है, फेफड़ों की सेहत के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।' शोध में कहा गया है कि ओमेगा-3 फैटी एसिड को एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभावों की वजह से पहले भी फेपड़ों के लिए उपयोगी होने की संभावनाओं में शामिल किया गया था। लेकिन, हाल तक इसको लेकर कोई प्रामाणिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे।

इसके लिए शोधकर्ताओं ने खून में ओमेगा-3 फैटी एसिड के स्तर और समय के साथ फेफड़ों के कार्य करने की स्थिति की जांच शुरू की। शोध में पता चला कि एक व्यक्ति के खून में ओमेगा-3 फैटी एसिड का ज्यादा स्तर फेफड़ों के बिगड़ने की संभावना को कम करने में कारगर साबित हुआ।

इन मछलियों में उपलब्ध है डीएचए
शोधकर्ताओं ने पाया कि डॉकोसैहेक्साइनॉइक एसिड (डीएचए) जो कि एक ओमेगा-3 फैटी एसिड है, फेफड़ों को सेहतमंद रखने के लिए बहुत उत्तरदायी है। सैमन, ट्यूना और सार्डीन जैसी मछलियों में यह पर्याप्त मात्रा में मौजूद रहता है। जैसे कि डीएचए डाइइटेरी सप्लिमेंट में भी उपलब्ध होता है। शोधकर्ताओं ने एक और भी शोध किया है और उसका भी परिणाम यही रहा है कि डीएचए समेत अन्य ओमेगा-3 फैटी एसिड फेफड़ों के अच्छे तरीके से कार्य करने के लिए जिम्मेदार हैं।

फेफड़ों के पुराने मरीजों और धूम्रपान करने वालों पर रिसर्च बाकी
हालांकि, इस शोध की एक सीमा अभी यह है कि इसमें सिर्फ स्वस्थ व्यस्कों को शामिल किया गया है। अब शोधकर्ता इस चीज की तसल्ली करने में जुटे हैं कि क्या ओमेगा-3 फैटी एसिड बहुत अधिक धूम्रपान करने वालों समेत फेफड़ों में लंबे समय तक रुकावट या सीओपीडी के मरीजों के लिए भी कारगर है।

इसी रिसर्च पेपर की पहली लेखक और कॉर्नेल टीम की नूट्रिशनिस्ट पीएचडी बोन्नी के पैचेन ने कहा, 'हम नूट्रिशनल रिसर्च में एक बदलाव शुरू कर रहे हैं और वास्तव में फेफड़ों की बीमारियों के इलाज के लिए सटीक नूट्रिशन की ओर बढ़ रहे हैं।' उनके मुताबिक, 'भविष्य में जो फेफड़ों की क्रोनिक बीमारी की वजह से बहुत ज्यादा जोखिम वाले लोगों हैं, उनके निजी आहार में इसको लेकर सलाह देने में इसे शामिल किया जा सकता है।'

इन सभी चीजों में उपलब्ध है ओमेगा-3 फैटी एसिड
इस शोध को इस आवश्यकता के साथ जोड़ा गया है कि बहुत सारे अमेरिकी ओमेगा-3 फैटी एसिड को आहार में शामिल करने में फिसड्डी हैं। रिसर्च में इस बात की ओर ध्यान दिलाया गया है कि अमेरिका का कृषि विभाग आहार संबंधी गाइडलाइंस में कहता है कि लोगों को हर हफ्ते कम से कम दो बार मछली खानी चाहिए, लेकिन बहुत सारे अमेरिकियों के लिए यह कम है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक ऊपर बताए गए सीफूड के अलावा ओमेगा-3 फैटी एसिड अलसी के बीज, चिया के बीच और अखरोट में पाया जाता है। इसके अलावा यह अलसी के तेल, सोयाबीन के तेल और कैनोला ऑयल में भी उपलब्ध होता है। यही नहीं ये अंडों, दही, जूस दूध, सोया से बने पेय और बच्चों के आहार में भी उपलब्ध होता है। (इनपुट-एएनआई)

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