Lok Sabha Speaker: ओम बिरला चुने गये भारत के स्पीकर, बड़े लोकतांत्रिक देशों में कैसे चुने जाते हैं अध्यक्ष?
Lok Sabha Speaker: भारत में आज 18वीं लोकसभा के अध्यक्ष का चुनाव हो रहा है। और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता ओम बिरला सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उम्मीदवार हैं और कांग्रेस के कोडिकुन्निल सुरेश इस प्रतिष्ठित पद के लिए विपक्षी दल के उम्मीदवार हैं।
स्वतंत्र भारत में यह इस तरह का चौथा चुनाव है, जहां स्पीकर चुनाव के राजनीतिक दांव चले गये, लेकिन ध्वनि मत से ओम बिरला को स्पीकर चुना गया है। हालांकि, अभी तक ऐतिहासिक रूप से, लोकसभा अध्यक्ष का चुनाव निर्विरोध होता रहा है, लेकिन अगर विपक्ष को लगता है, कि नंबरगेम में सरकार को धकेला जा सकता है, तो फिर विपक्ष स्पीकर पद के लिए आक्रामक हो जाती है।

संसदीय व्यवस्था में स्पीकर का काफी ज्यादा महत्व होता है और स्पीकर के जरिए सरकार अपने मन के मुताबिक, संसद को चला सकती है। लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि भारत समेत दुनिया के बड़े लोकतांत्रिक देशों में, जहां लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत है, वहां स्पीकर का चुनाव कैसे होता है?
भारत में कैसे होता है स्पीकर का चुनाव?
संविधान का अनुच्छेद 93 लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव से संबंधित है। इसमें कहा गया है, कि "लोकसभा, जल्द से जल्द, अपने दो सदस्यों को क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में चुनेगी।" जब अध्यक्ष का पद रिक्त होता है, तो राष्ट्रपति एक प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति करते हैं, जो नव-निर्वाचित संसद सदस्यों (MP) को शपथ दिलाता है। वर्तमान में, BJP के भर्तृहरि महताब प्रोटेम स्पीकर हैं, जो सात बार सांसद रह चुके हैं और पहले बीजू जनता दल (बीजेडी) के साथ थे।
भारत में लोकसभा स्पीकर का चुनाव साधारण बहुमत से होता है और सदन में सांसदों के आधे से ज्यादा वोट प्राप्त करने वाले उम्मीदवार को यह पद मिल जाता है। यानि, भारत में अगर कोई पार्टी अपने दम पर, या अपने सहयोगियों की बदौलत 272 वोट हासिल कर लेती है, तो स्पीकर उस पार्टी का होगा।
अमेरिकी संसद में कैसे चुने जाते हैं स्पीकर?
अमेरिकी संसद, जिसे कांग्रेस कहा जाता है, वहां भी आधुनिक प्रथा के तहत, स्पीकर का चुनाव साधारण बहुमत से होता है, यानि, जिस पार्टी के पास संसद में बहुमत ज्यादा होता है, उस पार्टी का स्पीकर होता है। मौजूदा अमेरिकी कांग्रेस की बात करें, तो रिपब्लिकन पार्टी के पास संसद में बहुमत है, और स्पीकर रिपब्लिकन पार्टी का है। अमेरिकी कांग्रेस में 435 सांसद होते हैं, जिन्हें प्रतिनिधि कहा जाता है। अमेरिका में भी कानून बनाने का अधिकार संसद के पास होता है और राष्ट्रपति को भी किसी बिल को पास करवाने के लिए संसद पर निर्भर होना पड़ता है, इसलिए अमेरिका में भी स्पीकर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। इस वक्त अमेरिका के स्पीकर माइक जॉनसन हैं।
अमेरिका के संदर्भ में सबसे दिलचस्प बात ये है, कि मतदान के दौरान सांसद अकसर, जिस उम्मीदवार को वोट दे रहे होते हैं, वोट देते समय उनका नाम चिल्लाकर बोलते हैं, जो काफी ज्यादा नाटकीय माहौल बनाता है। इसके अलावा, एक दिलचस्प बात ये भी है, कि अमेरिका में सांसद, अपनी पार्टी के पंसद के ही उम्मीदवार को वोट देने के लिए मजबूर नहीं होते हैं, बल्कि वो अपनी मर्जी से वोट डालते हैं, इसलिए अमेरिकी संसद में स्पीकर का चुनाव काफी दिलचस्प हो जाता है।
स्पीकर बनने के लिए उम्मीदवार को सदन के उन सदस्यों के बहुमत की आवश्यकता होती है, जो उस वक्त संसद में मौजूद होते हैं और मतदान कर रहे हैं। अमेरिकी संसद में 435 सदस्यों में सबसे ज्यादा वोट हासिल कर स्पीकर बनने वाली नेता नैंनी पेलोसी हैं, जिन्होंने 218 वोट हासिल किए थे। ज्यादातर स्पीकर इससे काफी कम वोट पाकर स्पीकर बने हैं।
यूके में कैसे चुना जाता है स्पीकर?
यूनाइटेड किंगडम में भी चुने गये सांसद ही संसद के स्पीकर का चुनाव करते हैं और सदन को आम चुनाव के बाद प्रत्येक नए संसदीय कार्यकाल की शुरुआत में या वर्तमान अध्यक्ष की मृत्यु या त्यागपत्र के बाद नये अध्यक्ष का चुनाव करना होता है। यूके में संसद को हाउस ऑफ कॉमन्स कहा जाता है।
हाउस ऑफ कॉमन्स के स्पीकर, यूनाइटेड किंगडम की संसद के निचले सदन और प्राइमरी चेंबर, हाउस ऑफ कॉमन्स के पीठासीन अधिकारी होते हैं। वर्तमान स्पीकर सर लिंडसे होयल, जॉन बर्को के रिटायर्ड होने के बाद 4 नवंबर 2019 को अध्यक्ष चुने गए थे। होयल ने 17 दिसंबर 2019 को इस भूमिका में अपना पहला पूर्ण संसदीय कार्यकाल शुरू किया, 2019 के आम चुनाव के बाद उन्हें सर्वसम्मति से फिर से चुना गया था।
यूके में भी स्पीकर के पास ज्यादातर वही जिम्मेदारियां हैं, जो भारत में स्पीकर के पास होता है। स्पीकर सदन में होने वाली बहसों की अध्यक्षता करता है, यह निर्धारित करता है कि कौन से सदस्य बोल सकते हैं और किन संशोधनों पर विचार किया जाना है। स्पीकर बहस के दौरान व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी जिम्मेदार होता है, और सदन के नियमों को तोड़ने वाले सदस्यों को दंडित कर सकता है।
यूके में भी सांसद ही स्पीकर का चुनाव करते हैं। सदन को आम चुनाव के बाद प्रत्येक नए संसदीय कार्यकाल की शुरुआत में या मौजूदा स्पीकर की मृत्यु या इस्तीफे के बाद नये स्पीकर का चुनाव करना होता है। एक बार चुने जाने के बाद, एक स्पीकर संसद के भंग होने तक अपने पद पर बना रहता है, जब तक कि वे इससे पहले इस्तीफा न दे दें।
यूके में हाल के वर्षों में स्पीकर के चुनाव की प्रक्रिया बदल गई है।
नई प्रणाली के तहत, उम्मीदवारों को कम से कम बारह सदस्यों द्वारा नामित किया जाना चाहिए, जिनमें से कम से कम तीन उम्मीदवार से अलग पार्टी के होने चाहिए। प्रत्येक सदस्य एक से ज्यादा उम्मीदवार को नामित नहीं कर सकता है। फिर सदन, गुप्त मतदान के जरिए स्पीकर का चुनाव करता है। जीत के लिए पूर्ण बहुमत (यानी डाले गए मतों का 50% से ज्यादा) की आवश्यकता होती है।
यदि कोई भी उम्मीदवार बहुमत (50 प्रतिशत वोट) हासिल नहीं कर पाता है, तो सबसे कम वोट पाने वाले व्यक्ति को स्पीकर पद की रेस से बाहर कर दिया जाता है, साथ ही ऐसे अन्य उम्मीदवारों को भी बाहर कर दिया जाता है, जिन्हें डाले गए मतों का 5% से कम वोट प्राप्त होता है, और ऐसे उम्मीदवारों को भी बाहर कर दिया जाता है जो अपना नाम वापस लेना चाहते हैं।
इसके बाद सदन में फिर से मतदान होता है और तब तक मतदान होता रहता है, जब कोई एक उम्मीदवार 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट हासिल ना कर ले। यदि सिर्फ एक उम्मीदवार ही स्पीकर पद के लिए नामांकन करता है, तो फिर उसे सीधे चुन लिया जाता है और कोई मतदान नहीं होता है, और सदन सीधे उस उम्मीदवार को स्पीकर पद पर नियुक्त करने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ता है।
कनाडा में कैसे होता है स्पीकर का चुनाव?
कनाडा में पहले स्पीकर का चुनाव प्रधानमंत्री की मर्जी पर होता था और स्पीकर को प्रधानमंत्री नामित करते थे, जिससे स्पीकर प्रधानमंत्री के हाथों का रबर स्टांप माना जाता था। लेकिन, 1986 में इस प्रथा को बदल दिया गया और उसके बाद से गुप्त मतदान के जरिए स्पीकर का चुनाव होने लगा। स्पीकर का चुनाव आम चुनावों के बाद लोकसभा की पहली बैठक में किया जाता है। और एक स्पीकर कब तक अपने पद पर रहेगा, ये सदन पर निर्भर करता है। यानि, सदन के सभी तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से लोकसभा में प्रस्ताव पास कर स्पीकर को कभी भी हटाया जा सकता है।
कनाडा में स्पीकर का चुनाव भारत की तरह की किया जाता है और स्पीकर बनने के लिए संसद में उम्मीदवार को साधारण बहुमत हासिल करना होता है। भारत की तरह ही कनाडा में भी अकसर जिस पार्टी की सरकार होती है, उसी पार्टी के स्पीकर होते हैं। हालांकि, कनाडा में ये भी परंपरा रही है, कि अकसर सरकार, विपक्षी दलों से विचार विमर्श के बाद ही उम्मीदवार चुनती है, जिसकी वजह से ज्यादातर बिना मतदान ही स्पीकर चुन लिए जाते हैं। कैबिनेट मंत्रियों और राजनीतिक पार्टी में कोई पद रखने वाला नेता स्पीकर का चुनाव नहीं लड़ सकता है।
पाकिस्तान में कैसे होता है स्पीकर का चुनाव?
पाकिस्तान में भी अकसर उसी पार्टी का स्पीकर बनता है, जिस पार्टी की सरकार होती है। स्पीकर को चुनने के लिए पाकिस्तानी संसद, जिसे नेशनल असेंबली कहा जाता है, उसमें मतदान होता है, और जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वो स्पीकर चुना जाता है। पाकिस्तान में स्पीकर के पास कुछ अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी होती हैं, जैसे अगर देश के राष्ट्रपति की मौत हो जाती है, या अगर राष्ट्रपति अचानक इस्तीफा देता है, तो फिर स्पीकर के पास तत्काल प्रभाव से राष्ट्रपति के अधिकार आ जाते हैं। लेकिन, वरीयता के आधार पर स्पीकर की रैंकिंग, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सीनेट के चेयरमैन के बाद चौथा होता है।
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