Oil Controversy: खुल्लम-खुल्ला झूठ बोल रहे अमेरिका के वित्त मंत्री बेसेंट, चीन की ऑयल खरीद पर घुमा दी बात
Oil Controversy: अमेरिका ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत पर एक बार फिर निशाना साधा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने आरोप लगाया है कि भारत रूसी तेल खरीदकर मुनाफा कमा रहा है और पश्चिमी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली रूस से कच्चा तेल खरीदकर उसे रिफाइन कर बेच रही है, जिससे अतिरिक्त लाभ हो रहा है।
चीन को लेकर नरम हुए बेसेंट
बेसेंट ने चीन के मामले में अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि चीन ने अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता लाई है, चीन अलग-अलग मुल्कों से तेल खरीद रहा है। हालांकि, अमेरिका ने यह खुलासा नहीं किया कि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से चीन का तेल आयात दोगुना हो गया है। अमेरिका ने ईरान से चीन के तेल आयात का भी जिक्र नहीं किया, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं।

भारत की डील अस्वीकार्य, चीन पर चुप्पी
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने रूस से भारत के कच्चे तेल के आयात को 'अस्वीकार्य' बताया। वहीं, चीन द्वारा रूसी तेल की खरीदारी का उन्होंने बचाव करते हुए कहा कि चीन ने अपने तेल खरीदारी के स्रोतों का विस्तार किया है। यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव के बीच आई है। इसमें रूसी तेल खरीद पर 25% टैरिफ भी शामिल है, जो 27 अगस्त से लागू होगा।
तेल का आयात बढ़ा- बेसेंट
सीएनबीसी पर एक सवाल के जवाब में बेसेंट ने कहा, "रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से चीन का तेल आयात केवल 3% बढ़ा है, जबकि भारत का आयात 40% से अधिक बढ़ गया है।" उन्होंने बताया कि 2022 से पहले रूस से चीन का 13% तेल आता था, जो अब 16% है।
बेसेंट ने आगे कहा कि यूक्रेन पर रूसी हमले से पहले भारत का "एक प्रतिशत से भी कम" तेल रूस से आता था, जो अब 42% तक पहुंच गया है।
भारत पर लगाया मुनाफा कमाने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया, "भारत बस मुनाफा कमा रहा है, वे इसे दोबारा बेच रहे हैं। उन्होंने 16 अरब डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा कमाया. जिसमें भारत के कुछ सबसे अमीर परिवार शामिल हैं। यह बिल्कुल अलग बात है।" बेसेंट ने इसे "भारतीय मध्यस्थता" और "युद्ध के दौरान सस्ता तेल खरीदकर उसे उत्पाद के रूप में दोबारा बेचना" करार दिया, जिसे उन्होंने "बिल्कुल अस्वीकार्य" बताया।
कहां गलत बोल गए बेसेंट?
चीन द्वारा रूसी तेल आयात पर अमेरिका का बयान जानबूझकर भ्रम पैदा करने वाला दिखता है। वॉयस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2022 (रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले) में चीन रूस से औसतन 5.4 मिलियन टन कच्चा तेल आयात करता था, जो मई 2023 में बढ़कर 9.71 मिलियन टन हो गया, यानी लगभग दोगुना। 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, चीन रूस का सबसे बड़ा कच्चा तेल खरीदार बना हुआ है।
चीन कितना तेल खरीद रहा रूस से?
ताजा आंकड़ों की मानें तो जून 2025 में चीन की रूस से कच्चे तेल खरीद 3.5 अरब यूरो में हो रही है। रॉयटर्स और ऑफशोर टेक्नोलॉजी के मुताबिक, 2024 में चीन ने रूस से 108.5 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया, जो चीन के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 20% है, जबकि अमेरिकी वित्त मंत्री इसे 16% बता रहे हैं।
अमेरिकी वित्त मंत्री ने चीन द्वारा ईरान से कच्चे तेल आयात का जिक्र नहीं किया, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं। जून 2025 में चीन ने ईरान से औसतन 1.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन (BPD) कच्चा तेल खरीदा, जो अब तक का सबसे बड़ा आयात था। चीन ईरानी तेल को "डार्क फ्लीट" टैंकरों के माध्यम से आयात करता है, जिससे प्रतिबंधों से बचा जा सके।
चीन के रास्ते मलेशिया पहुंचा ईरानी तेल
उदाहरण के लिए, 2023 में मलेशिया से चीन के तेल आयात में 54% की वृद्धि हुई, जो वास्तव में ईरानी तेल था। रॉयटर्स के अनुसार, चीन अपने कुल तेल आयात का 13.6% ईरान से लेता है। हालांकि, बीबीसी के मुताबिक चीनी कस्टम डेटा ने जुलाई 2022 के बाद से ईरान से किसी तेल आयात को रिकॉर्ड नहीं किया है। चीन इन अमेरिकी प्रतिबंधों को 'गैरकानूनी और एकतरफा' बताता है।
भारत पर और लगेगा सेंक्शन- बेसेंट
बेसेंट ने पिछले सप्ताह ट्रंप-पुतिन मुलाकात से पहले भी इसी तरह की टिप्पणी की थी। ब्लूमबर्ग को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि अगर शिखर सम्मेलन में "चीजें ठीक नहीं रहीं", तो रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। भारत ने अमेरिका की इन टैरिफ धमकियों को "अनुचित" बताया है और कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
अमेरिका के इस दोहरे रवैये पर अपनी राय हमें, कमेंट में बताएं।












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