Oi Defence: IWI Tavor राइफल कैसे बनी इंडियन फोर्सेज की पहली पसंद? एक मिनिट में दागती है इतनी गोलियां
Oi Defence: भारत की विशिष्ट स्पेशल फोर्स यूनिट्स-मार्कोस (मरीन कमांडो), गरुड़ स्पेशल फोर्सेस और पैरा स्पेशल फोर्सेस-अपनी असाधारण दक्षता, कठोर प्रशिक्षण और राष्ट्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रसिद्ध हैं। ये यूनिट्स बेहतरीन हथियारों और टैक्टिकल वेपन्स से लैस हैं, जो उन्हें हाई रिस्क वाले ऑपरेशन्स को सटीकता से अंजाम देने में सक्षम बनाते हैं। उनके हथियारों के जखीरे में, IWI Tavor राइफल अपने डिज़ाइन, मल्टी टास्क और विश्वसनीयता के कारण एक पसंदीदा विकल्प के रूप में उभर कर सामने आती है।
Tavor राइफल और स्पेशल फोर्सेस
IWI Tavor राइफल भारत के स्पेशल फोर्सेस का पर्याय बन चुकी है। नौसेना की स्पेशल ऑपरेशन यूनिट मार्कोस समुद्री अभियानों, Amphibious warfare और आतंकवाद-रोधी गतिविधियों में माहिर है। उनका प्रशिक्षण दुनिया में सबसे कठिन में से एक माना जाता है, जिसमें गहरे समुद्र में गोताखोरी से लेकर करीबी मुकाबले तक के कौशल शामिल हैं। वहीं, इंडियन एयर फोर्स की स्पेशल यूनिट गरुड़ स्पेशल फोर्सेस युद्ध खोज और बचाव, आतंकवाद-रोधी अभियान और हवाई अड्डों की सुरक्षा जैसे मिशनों को पूरा करती है। भारतीय सेना की प्रमुख इकाई पैरा एसएफ diverse terrains-रेगिस्तान से लेकर पहाड़ों तक-में ऑपरेशन को सफलतापूर्वक करने में सक्षम है।

हथियारों लेकर नई पसंद
भारतीय स्पेशल फोर्सेस में हथियारों का इतिहास समृद्ध और विकसित रहा है। 1990 के दशक से पहले, इन इकाइयों में SLR बैटल राइफल्स और AK सीरीज की अलग-अलग हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। 1990 के दशक में Vz.58 को अपनाना एक बड़ा बदलाव था। वहीं, 1980 के दशक में स्टायर AUG भारत का पहला बुलपप हथियार बना। इसके बार-बार बदलने वाले बैरल और बुलपप कॉन्फ़िगरेशन ने बाद में INSAS राइफलों के विकास को प्रभावित किया और भारत की भविष्य की प्राथमिकताओं को दिशा दी।
भारत और इज़राइल की साझेदारी
इज़राइली इंजीनियरिंग का उत्पाद, IWI Tavor, एक दशक से भी पहले भारतीय स्पेशल फोर्सेस को दी गई थी। Tavor के विकास में भारत की भागीदारी, भले ही क्लासिफाइड हो, लेकिन यह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के लिए बेहतर विकल्प है। प्रारंभ में, स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (SFF) और पैरा एसएफ में Tavor की शुरुआत चुनौतियों से भरी रही, लेकिन बाद के सुधारों ने इसे एक विश्वसनीय हथियार बना दिया।
Tavor राइफल के डिज़ाइन की खासियत
Tavor राइफल का बुलपप डिज़ाइन इसकी सबसे बड़ी विशेषता है। इसमें रिसीवर, मैगज़ीन और बोल्ट कैरियर को पिस्तौल ग्रिप के पीछे रखा जाता है। इससे बैरल की लंबाई से समझौता किए बिना हथियार छोटा और कॉम्पैक्ट हो जाता है। यह विशेष रूप से करीबी मुकाबले (CQB) में बेहद फायदेमंद है, क्योंकि यह तेजी से लक्ष्य साधने और बेहतर गतिशीलता की सुविधा देता है।
कितनी सटीक है Tavor?
Tavor का संतुलन और हैंडलिंग असाधारण है। इसका डिज़ाइन कंधे पर रखने पर अधिक स्थिरता हो जाते हैं, जिससे ऑपरेटर सटीक निशाना साध सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर इसे एक हाथ से भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ट्रिगर ग्रुप के पीछे गुरुत्वाकर्षण केंद्र होना इसे उच्च दबाव वाली स्थितियों में भी स्थिर और सटीक बनाता है। क्योंकि सारा वजन नीचे की तरह फोकस हो जाता है।
कितनी भरोसेमंद है?
Tavor एक लॉन्ग-स्ट्रोक गैस पिस्टन प्रणाली का उपयोग करता है, जो M1 और AK-47 जैसी राइफलों की तरह विश्वसनीय मानी जाती है। इसके विपरीत, M4 कार्बाइन जैसी राइफलें डायरेक्ट इम्फिंगमेंट (DI) प्रणाली पर आधारित होती हैं, जो बेहतर नियंत्रण तो देती हैं लेकिन जटिलता और कम विश्वसनीयता की समस्या भी पैदा करती हैं।
दुनिया ने माना लोहा
Tavor की विश्वसनीयता केवल भारत तक सीमित नहीं है। इसे युद्धक्षेत्र में अपने प्रदर्शन के लिए वैश्विक पहचान मिली है। सैन्य विशेषज्ञ रसेल सी. टिल्स्ट्रा ने अपनी पुस्तक "The Battle Rifle: Development and Use Since World War II" में लिखा है कि Tavor ने इज़राइली रक्षा बलों (IDF) के मूल्यांकन के दौरान M4 और M16 को पछाड़ दिया था। इस रिकॉर्ड ने इसे भारतीय स्पेशल फोर्सेस के बीच और अधिक लोकप्रिय बना दिया।
स्पेशल फोर्सेस की पहली पसंद?
IWI Tavor राइफल आज भारतीय स्पेशल फोर्सेस का एक वरदान बन गई है। इसके हाईटैक डिज़ाइन, बेहतर हैंडलिंग और कभी न अटकने वाले भरोसे ने इसे ऑपरेशन में सबसे पसंदीदा हथियार बना दिया है। जैसे-जैसे भारतीय स्पेशल फोर्सेस राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जटिल मिशनों को अंजाम देते रहेंगे, Tavor राइफल उनके लिए एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद हथियार बनी रहेगी।
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