ईसाई नर्सों ने बदला कैलेंडर, उसपर लिखी थी आयत, लगा ईशनिंदा का आरोप, हुई पिटाई, अब मिलेगी मौत की सजा!

पाकिस्तान में आयत लिखी कैलेंडर का पन्ना बदलने पर दो ईसाई नर्सों पर ईशनिंदा का आरोप लगा है।

फैसलाबाद: अगर पाकिस्तान को अजीब देश कहा जाए तो इसमें शायद ही किसी को आपत्ति होनी चाहिए। क्या किसी की कैलेंडर बदलने के लिए पिटाई की जा सकती है? क्या किसी की कैलेंडर बदलने के लिए पिटाई की जा सकती है? और क्या । क्या किसी को सिर्फ कैलेंडर का एक पन्ना बदलने के लिए मौत की सजा मिल सकती है? इन सवालों को सुनकर आप हैरान होंगे लेकिन पाकिस्तान में सबकुछ हो रहा है। दो नर्सों की जमकर पिटाई सिर्फ इसलिए की गई है क्योंकि उसने कैलेडर बदला और कैलेंडर पर दो इस्लामी आयतें लिखी हुईं थीं।

ईसाई नर्सों पर आरोप

ईसाई नर्सों पर आरोप

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक पाकिस्तान के फैसलाबाद में एक अस्पताल की ये पूरी घटना है। जहां आरोप है कि ईसाई नर्सों ने ईशनिंदा की है। यानि, ईसाई नर्सों ने खुदा का अपमान किया है। रिपोर्ट के मुताबिक दो ईसाई नर्सों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया गया है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक दो नर्सों के खिलाफ अस्पताल के अधिकारियों ने शिकायत की थी। नर्सों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अस्पताल के एक वार्ड में दीवार पर इस्लामी आयतों को हटाया है। जिसके बाद अस्पताल में ही दोनों महिला नर्सों की जमकर पिटाई गई। अस्पताल के जिस वार्ड की ये घटना है, वो मानसिक बीमार यानि पागलों का वार्ड है।

बदला था कैलेंडर का पेज

वहीं कई पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि नर्सों ने दीवार पर टंगे हुए कलेंडर का पन्ना बदला था क्योंकि महिला खत्म हो गया था। लेकिन चूंकी उस कैलेंडर पर इस्लामी आयतें लिखीं थी इसीलिए अस्पताल में मौजूद मुस्लिम नर्सों को गुस्सा आ गया और उन्होंने दोनों ईसाई नर्सों की जमकर पिटाई कर दी। पुलिस के मुताबिक फैसलाबाद के जिला मुख्यालय अस्पताल में कार्यरत नर्सों मरियम लाल और नेविश अरूज के खिलाफ अस्पताल के उप चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर मोहम्मद अली की शिकायत के बाद ईशनिंदा का मामला दर्ज किया गया है। अस्पताल के डॉक्टर मोहम्मद अली ने पुलिस के सामने कहा है कि अस्पताल की समिति ने दोनों नर्सों को ईशनिंदा के आरोप में दोषी पाया है, लिहाजा दोनों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

नर्सों को मारने की कोशिश

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के फैसलाबाद के अस्पताल में सुरक्षा के इंतजाम किए गये हैं। वहीं, दोनों ईसाई नर्सों की जमकर पिटाई की गई है और दोनों की जान लेने की कोशिश की गई। हालांकि, मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों नर्सों को अपने कब्जे में लेकर जान बचा ली। जिसके बाद अस्पताल के बाहर मौजूद भीड़ ने अस्पताल परिसर में खड़े पुलिस की गाड़ी पर हमला कर दिया लेकिन किसी तरह से पुलिस ने दोनों नर्सों की जान बचा ली। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक अस्पताल के बाहर प्रदर्शन में कई मुस्लिम नेता भी शामिल हुए थे जो दोनों नर्सों को अपने कब्जे में लेना चाहते थे।

वहीं, पाकिस्तान की पत्रकार नायला इनायत ने कहा है कि पहले दोनों नर्सों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया था और पुलिस ने पहले जांच में पाया था कि दोनों नर्सों को फंसाया जा रहा है। लेकिन बाद में पब्लिक प्रेशर में आकर दोनों नर्सों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, दोनों नर्सों ने पहले बयान दिया था कि चूंकी वो अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, लिहाजा मु्स्लिम नर्सों की तरफ से उन दोनों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा जाता था लेकिन उन्हें पैसों की जरूरत थी, लिहाजा उन्होंने नौकरी करना जारी रखा। नर्सों ने कहा था कि वो ईशनिंदा जैसा कुछ कर ही नहीं सकती हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि ये कानून कितना खतरनाक है।

ईशनिंदा कानून है हथियार

एक मानवाधिकार रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की जेलों इस वक्त हजारों की तादाद में अल्पसंख्यक ईशनिंदा कानून के आरोप में जेल में बंद हैं। पिछले हफ्ते पाकिस्तान में विपक्षी नेता बिलावल भुट्टो ने कहा था कि पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और लोग अपने विरोधियों को ठिकाना लगाने के लिए इस कानून का इस्तेमाल करते हैं। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने के लिए उद्येश्य से ही ईशनिंदा कानून को बनाया गया था। तानाशाह शासक जिया-उल-हक ने पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून को लागू किया था। पाकिस्तान में सैकड़ों लोगों को ईशनिंदा कानून के तहत फांसी की सजा हो चुकी है। 2010 में चार बच्चों की मां आसिया बीबी पर पड़ोसियों ने विवाद के बाद ईशनिंदा का आरोप लगाया था जिसके बाद उन्हें 8 सालों तक जेल में बंद रखा गया। लेकिन 2018 में पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, जिसके बाद आसिया बीबी अपने बच्चों के साथ पाकिस्तान छोड़कर कनाडा चली गईं।

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