Nikhil Gupta: भारत के असली टाइगर हैं निखिल गुप्ता? पन्नून की हत्या की साजिश कैसे हुई नाकाम, आगे क्या होगा?

Nikhil Gupta Extradition Case: पिछले दो सालों में विदेशों में खालिस्तानी आतंकवादियों की बढ़ती सक्रियता ने भारत के लिए चिंता की रेखाएं खींच दी हैं और लगातार भारत में सवाल उठ रहे हैं, कि आखिर इन खालिस्तानी आतंकियों का इलाज क्या है?

लेकिन, पिछले साल एक वाकया होता है। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया जाता है, कि न्यूयॉर्क में रहने वाला खालिस्तानी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नून, जो सिख फॉर जस्टिस (SFI) का प्रमुख है, उसकी हत्या की साजिश भारतीय खुफिया एजेंसी ने रची थी। इस रिपोर्ट से बवाल शुरू हो गया।

Nikhil Gupta Extradition Case

बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया, कि उन्होंने चेक गणराज्य की राजधानी प्राग से एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को गिरफ्तार किया है, जिसने पन्नून की हत्या की सुपारी दी थी। अमेरिका के इस दावे के बाद भारत के साथ उसके संबंध बिगड़ने लगे।

निखिल गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद अमेरिका ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी और कई महीनों के बाद चेक रिपब्लिक की एक अदालत ने उसके प्रत्यर्पण के आदेश दे दिए और अब निखिल गुप्ता को अमेरिका भेज दिया गया है।

ऐसे में सवाल ये हैं, कि क्या निखिल गुप्ता भारत का असली 'टाइगर' है? आइये जानते हैं, कि निखिल गुप्ता को कैसे एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, उनपर इल्जाम क्या हैं और अगर उनके ऊपर लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो उन्हें क्या सजा सुनाई जा सकती है?

निखिल गुप्ता कैसे किए गये गिरफ्तार?

निखिल गुप्ता की उम्र करीब 53 साल है और उन्हें चेक रिपब्लिक की राजधानी प्राग हवाई अड्डे से चेक रिपब्लिक के अधिकारियों ने 30 जून को गिरफ्तार किया था। ऐसा बताया जाता है, कि वह "व्यापार और पर्यटन" के मकसद से चेक गणराज्य गये थे, लेकिन चेक नेशनल ड्रग अधिकारियों को बताया गया था, कि वो एक ड्रग कारोबारी हैं और फिर नशीली दवाओं की तस्करी का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

जिस वक्त वो एयरपोर्ट पर थे, उसी वक्त उन्हें गिरफ्तार किया गया और जानकारी के मुताबिक, अगर थोड़ी देर और हो जाती, तो निखिल गुप्ता प्राग से निकल जाते।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हिरासत मे लेने के बाद निखिल गुप्ता को चेक अधिकारियों ने प्राग में भारतीय दूतावास को 'एक भारतीय नागरिक निक गुप्ता' के बारे में सूचित किया था, जिसे अमेरिकी अदालत के आदेश के आधार पर हिरासत में लिया गया था।

उस समय, भारतीय दूतावास, निखिल गुप्ता के ऊपर अमेरिका ऐसे आरोप लगाने वाला है, या फिर अमेरिका ने उन्हें इन आरोपों में पकड़वाया है, उन बातों से अनजान था। भारतीय दूतावास को निखिल गुप्ता को लेकर कोई जानकारी नहीं थी, लिहाजा भारतीय अधिकारियों ने निखिल गुप्ता के लिए सामान्य कांसुलर सहायता से संबंधित प्रक्रियाओं का पालन किया था। उन्होंने उनकी पहचान और राष्ट्रीयता के प्रमाणीकरण के लिए उसके पासपोर्ट की जानकारी हासिल की थी।

सबसे दिलचस्प बात ये है, कि निखिल गुप्ता ने भारतीय दूतावास से कोई कानूनी सहायता नहीं मांगी, जो आमतौर पर विदेशों में संकट में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए आदर्श समझा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने चेक आपराधिक न्याय प्रणाली के सामने अपना प्रतिनिधित्व करने के लिए, प्राग में अपने खुद के कानूनी वकील की व्यवस्था की थी।

अक्टूबर महीने में निखिल गुप्ता को लेकर खुलासा

पिछले साल मई में निखिल गुप्ता को गिरफ्तार किया गया था और अक्टूबर में पहली बार अमेरिका ने इस मामले का खुलासा किया। इंडियन एक्सप्रेस की ऐसी रिपोर्ट है, अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक एवरिल हैन्स, जो अमेरिकी सरकार के सर्वोच्च खुफिया अधिकारी थे, वो ठोस जानकारी के साथ भारत आए थे, जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इकट्ठा किया था और जो अमेरिकी अभियोग का हिस्सा बनने जा रहा था, उसे अमेरिका के संघीय अभियोजक तैयार कर रहे थे।

अमेरिकी खुफिया अधिकारी हेन्स द्वारा साझा की गई जानकारी में दस्तावेज और विवरण, जिसे बाद में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट द्वारा दायर अभियोग के हिस्से के रूप में सार्वजनिक किया गया था, उसने भारत सरकार को जानकारी पर बारीकी से गौर करने के लिए मजबूर कर दिया है। जानकारी का आकलन करने में उन्हें कुछ सप्ताह लग गए, जिसमें कुछ गंभीर सबूत थे, और उन्होंने जांच करने का फैसला किया।

इस बीच, अमेरिका ने सूचना का उपयोग निखिल गुप्ता के खिलाफ लाए गये अभियोग के लिए किया। चेक अधिकारियों के लिए ये सबूत इतने ठोस थे, कि निखिल गुप्ता को अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया गया और उन्हें एफबीआई को सौंप दिया गया। यह अमेरिका और चेक गणराज्य के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के मुताबिक किया गया था।

FBI के प्राग देश कार्यालय, न्याय विभाग के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के कार्यालय और चेक गणराज्य के राष्ट्रीय औषधि मुख्यालय ने निखिल गुप्ता को अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में ट्रांसफर करने के लिए मिलकर काम किया था।

Nikhil Gupta Extradition Case

अमेरिका में निखिल गुप्ता के साथ क्या होगा?

निखिल गुप्ता को अमेरिका भेजा जा चुका है और फिलहाल उन्हें ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।

निखिल गुप्ता पर भाड़े के बदले हत्या और भाड़े के बदले हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। अगर निखिल गुप्ता पर लगाए गये ये आरोप अमेरिकी अदालत में साबित हो जाते हैं, तो उन्हें इन दोनों मामलों में 10-10 साल, यानि कुल मिलाकर 20 साल जेल की वैधानिक सजा हो सकती है।

मैनहट्टन अदालत में अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने जो अभियोग दायर किया हुआ है, उसके मुताबिक, निखिल गुप्ता एक भारतीय अधिकारी के इशारे पर साजिश रच रहे थे और उनकी लिस्ट में कई निशाने थे। अभियोग के मुताबिक, "भारतीय अधिकारी और निखिल गुप्ता के बीच एक लाख डॉलर का सौदा हुआ था, जो निखिल गुप्ता उस अमेरिकी शूटर को देने वाले थे, जिसे पन्नून की हत्या की सुपारी दी गई थी।"

लेकिन, अमेरिका ने कहा, कि निखिल गुप्ता ने जिस अमेरिकी शूटर को एक लाख की सुपारी दी थी, वो असल में CIA का अंडरकवर एजेंट था। और माना जाता है, कि निखिल गुप्ता उस एजेंट को पहचान नहीं पाए और ये मिशन फेल हो गया, नहीं तो पन्नून की हाल थी हरदीप सिंह निज्जर जैसा ही होता, जिसकी कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में बाइकसवार कुछ लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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