कोरोना का अगला वेरिएंट ज्यादा घातक हो सकता है, ओमिक्रॉन पर कैंब्रिज के एक्सपर्ट की चेतावनी
लंदन, 6 जनवरी: ओमिक्रॉन वेरिएंट का कम खतरनाक होना अच्छी खबर है, लेकिन यह 'विकासवादी गलती' की वजह से है, क्योंकि यह बहुत ही तेजी से फैल रहा है और इसके हल्के होने का कोई कारण नही हैं। यानी यह संकेत दे रहा है कि अगला वेरिएंट बहुत ही ज्यादा घातक हो सकता है। यह चेतावनी भारतीय मूल के क्रैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक वैज्ञानिक ने दी है। शोध के आधार पर इसमें चेताया गया है कि अगर ओमिक्रॉन हल्का लग रहा है तो इस मौके का फायदा उठाना चाहिए और वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाना चाहिए, जिसमें तीसरी डोज भी शामिल है। इस शोध के आधार पर यह भी चेतावनी दी गई है कि ओमिक्रॉन को नैचुरल वैक्सीन समझ लेने की गलती भारी पड़ सकती है।

ओमिक्रॉन को हल्का समझने की भूल मत करना- शोध
क्रैंब्रिज में क्लिनिकल माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर रवींद्र गुप्ता की अगुवाई में हाल में ओमिक्रॉन वेरिएंट पर एक शोध किया गया है। शोध में यह पता चला है कि नया वेरिएंट जो अभी यूके में कहर मचाए हुए है और अब भारत में तेजी से फैल रहा है, वह फेफड़ों की कोशिकाओं को कम संक्रमित कर रहा है, लेकिन इससे यह वायरस हल्का पड़ गया है ऐसा नहीं है। गुरुवार को प्रोफेसर गुप्ता ने पीटीआई को एक इंटरव्यू में कहा है, 'यह धारणा है कि समय के साथ वायरस अधिक हल्के होते जाते हैं, लेकिन यहां ऐसा नहीं हो रहा है, क्योंकि ये लंबे समय के लिए विकासवादी रुझान हैं।' उनका कहना है कि खासकर उन इलाकों में भी यह तेजी से फैल रहा है, जहां काफी वैक्सीनेशन हो चुकी है। 'इसलिए मुझे लगता है कि यह एक विकासवादी गलती है। यह जानबूझकर कुछ नहीं है कि वायरस अपनी बायोलॉजी को बदलने की कोशिश कर रहा है। '

ओमिक्रॉन को नैचुरल वैक्सीन समझना खतरनाक-एक्सपर्ट
इसके बाद उन्होंने जो कहा है वह बहुत ही गंभीर चेतावनी की तरह है। उनके मुताबिक, 'ओमिक्रॉन के संबंध में कम गंभीरता की यह खोज स्पष्ट रूप से अभी के लिए अच्छी खबर है, लेकिन आगे जो वेरिएंट आएगा, और ऐसा आएगा, जरूरी नहीं है कि उसमें भी यही लक्षण हों और वह गंभीर रूप धारण कर सकता है जैसा हम पहले देख चुके हैं।' उन्होंने ओमिक्रॉन को नैचुरल वैक्सीन बताए जाने लेकर भी बहुत बड़ी बात कह दी है। उनके मुताबिक, 'संक्रमण को रोकना संभत: जरूरी चीज है, उसकी जगह मैंने क्या सुना है कि लोग इसे नैचुरल वैक्सीन के तौर पर देख रहे हैं। यह बात समझी जा सकती है, लेकिन है खतरनाक चीज, क्योंकि हम अपने स्वास्थ्य पर विभिन्न वेरिएंट के पूर्ण प्रभाव को नहीं समझते हैं। '

वैक्सीनेशन कवरेज बढ़ाने का है मौका- विशेषज्ञ
ब्रिटेन में जन्मे और मूल रूप से उत्तर प्रदेश से जुड़े परिवार से संबंधित वैज्ञानिक ने बहुत ही पते की बात कही है, जिसके बारे में वह ब्रिटिश सरकार को तो सलाह दे ही रहे हैं, दुनिया में बाकी जगह भी उसे अमल में लाया जा सकता है। वह चाहते हैं कि अगर ओमिक्रॉन अभी हल्का है तो इस समय का बेहतर इस्तेमाल किया सकता है। उन्होंने कहा है, 'हमारे पास हल्के वेरिएंट वाली परिस्थिति है, हमें इसका इस्तेमाल वैक्सीनेशन कवरेज को बढ़ाने के मौके के लिए करना चाहिए।'

टीकाकरण पर जोर दे रहे हैं वैज्ञानिक
भारत के बारे में उनका कहना है कि, 'भारत में बहुत ज्यादा डेल्टा संक्रमण हुआ था, इसलिए वहां कुछ इम्यूनिटी मौजूद है। वैक्सीन का बहुत अच्छे से इस्तेमाल किया गया है। हम जानते हैं कि ओमिक्रॉन वैक्सीन के प्रतिरोध से बच सकता है और तीसरी डोज लगाना जरूरी है।' जिन्हें कोविड के टीके नहीं लग पाए हैं, उसपर जोर देते हुए उनका कहना है कि, 'इसलिए सावधानी बरतने की जरूरत है और संक्रमण के फैलाव को रोकने और टीकाकरण पर ध्यान देना इतना महत्वपूर्ण है।'












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