वैज्ञानिकों को एक और महा-पृथ्वी का पता चला, अंदर हो सकते हैं गहरे समुद्र, हमसे इतनी है दूरी
नई दिल्ली: जब भी स्पेस सेक्टर की बात होती है तो सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या किसी दूसरे ग्रह पर भी जीवन संभव है? अगर हां, तो हम उनकी खोज से कितनी दूर हैं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए दुनियाभर की स्पेस एजेंसियां दिन-रात लगी हुई हैं, लेकिन अभी तक किसी एलियंस सभ्यता से संपर्क नहीं हो पाया। इस बीच खगोलविदों को एक ऐसा ग्रह मिला है, जिस पर काफी मात्रा में पानी हो सकता है। ऐसे में इस पर रिसर्च तेज कर दी गई है।

दो सूर्य हैं ग्रह के पास
मॉन्ट्रियल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक महा-पृथ्वी खोज निकाली है, जिसको TOI-1452 b नाम दिया गया। इस ग्रह के पास दो विशाल तारे यानी सूर्य हैं, जिसमें से ये एक की परिक्रम करता है। इसकी विस्तार से जांच करने पर पता चला कि ये हमारे ग्रह से 70 प्रतिशत ज्यादा बड़ा है और इसका द्रव्यमान 5 गुना ज्यादा होगा। खास बात तो ये है कि इस पर पानी होने के भी कुछ संकेत मिले हैं।

कितनी है दूरी?
शोधकर्ताओं के मुताबिक इस नए ग्रह की दूरी हमसे 100 प्रकाश वर्ष दूर है। संभावना जताई जा रही कि इस पर गहरे महासागर होंगे, जो ग्रह के 30 प्रतिशत द्रव्यमान के लिए जिम्मेदार हैं। अगर इसकी तुलना हम पृथ्वी से करें तो हमारे ग्रह के 70 प्रतिशत जल क्षेत्र कुल द्रव्यमान का केवल 1 प्रतिशत बनाते हैं। वहीं ये ग्रह अपने सूर्य का चक्कर 11 दिनों में ही पूरा कर लेता है, ऐसे में यहां पर एक साल में सिर्फ 11 दिन ही होते हैं।

सूर्य से कम प्रकाश मिलता है
वहीं मामले में नासा ने कहा कि इसके जांच से ये संकेत मिलता है कि महा-पृथ्वी के पास मौजूद लाल-बौना तारा (सूर्य) हमारे सूर्य से छोटा और ठंडा है। ऐसे में महा-पृथ्वी को अपने सूर्य से उतनी ही मात्रा में प्रकाश प्राप्त होता है जितना कि शुक्र हमारे सूर्य से प्राप्त करता है। जिससे ये तरल पानी के अस्तित्व का मामला बन जाता है। वहीं कक्षा में मौजूद दूसरा तारा एक चक्कर पूरा करने में करीब 1400 साल का समय लेता है।

चट्टानी ग्रह होने की भी संभावना
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह पर पानी के अस्तित्व को एकदम पुख्ता करने के लिए अभी ज्यादा रिसर्च की जरूरत है। अभी तक के अनुमान के मुताबिक ये ग्रह एक विशाल चट्टान हो सकता है, जिसमें बहुत कम या फिर कोई वातावरण नहीं है। ये हाइड्रोजन और हीलियम के वातावरण वाला एक चट्टानी ग्रह भी हो सकता है। ट्रांजिटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (टीईएसएस) और ग्राउंड-आधारित टेलीस्कोप के जरिए इस ग्रह की खोज हुई थी।

खगोलीय दृष्टि से काफी करीब
खगोलविदों को उम्मीद है कि वे जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप के साथ ग्रह का विस्तार से अध्ययन करेंगे, क्योंकि TOI-1452 b हमसे सिर्फ 100 प्रकाश वर्ष दूर है, जो खगोलीय दृष्टि से काफी करीब है। इसके अलावा ये अपेक्षाकृत चमकीला है, जो वेब टेलीस्कोप को अपने वायुमंडल के माध्यम से चमकने वाले स्टारलाइट के एक स्पेक्ट्रम को पकड़ने की अनुमति देता है। आसान भाषा में कहें तो नासा का टेलीस्कोप इसे किसी भी वक्त देख सकता है।

एक और महा-पृथ्वी मिली थी
हाल ही में जापान के सुबारू टेलीस्कोप का उपयोग करने वाले खगोलविदों की एक टीम ने पृथ्वी जैसे एक्सोप्लैनेट की खोज की है। इस टीम का नेतृत्व हिरोकी हरकावा कर रहे थे। ये सुपर अर्थ एक तारे की परिक्रम कर रहा है, जिसका नाम Ross 508 है। वहीं इस खोजे गए नए ग्रह की दूरी हमसे 36.5 प्रकाश वर्ष है।












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