जेम्स वेब टेलीस्कोप ने फिर भेजी हैरान कर देने वाली तस्वीरें, दूर Galaxy के रहस्यों का किया खुलासा
जेम्स वेब स्पेस टेलस्कोप में चार वैज्ञानिक उपकरण होते हैं। ये प्रमुख रूप से इंफ्रारेड तरंगों का अवलोकन करता है। जिसमें वह 0.6 से 28 माइक्रॉन की तरंगों को आसानी से पकड़ लेता है।
वाशिंगटन, 30 सितंबर : जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) दूर अंतरिक्ष की फोटो खींचकर दुनिया को हैरान कर दिया है। NASA की इस अद्भुत टेलिस्कोप ने एक बार से आकाश गंगा (Galaxy) की अकल्पनीय तस्वीर खींचकर लोगों को एक बार फिर से अचंभित कर दिया है। इस बार नासा के जेम्स वेब ने जो तस्वीर भेजी है वह दूर की गैलेक्सी की छिपी हुई शानदार गैसीय 'बोन' संरचना का खुलासा किया है। आप इन फोटो को देखेंगे तो कह उठेंगे वाकई में ये गजब की तस्वीरें हैं।

जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने भेजी स्पाइरल गैलेक्सी की नई तस्वीर
नासा की जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने जो ताजा तस्वीरें खींची हैं वह स्पाइरल गैलेक्सी IC 5332 से संबंधित है और पृथ्वी से इनकी दूरी 29 मिलियन प्रकाश वर्ष से भी ज्यादा है। गैस, धूल और तारों से भरे इस ब्रह्मांडीय गुच्छे (cosmic knot of gas) को तस्वीरों में इसके स्पाइरल आकार को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

हबल टेलीस्कोप ने भी भेजी थी तस्वीर
बता दें कि इससे पहले हबल स्पेस टेलीस्कोप आईसी 5332 की तस्वीर दुनिया को दिखाया था। आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि 66 हजार प्रकाश वर्ष चौड़ी यह आकाशगंगा जो कि हमारे गैलेक्सी के आकार का लगभग दो तिहाई है, उसकी तस्वीर को हबल ने सबसे पहले हमें दिखाया था। हबल स्पेस टेलीस्कोप और जेम्स वेब टेलीस्कोप के बीच कुछ अंतर भी है। हबल स्पेस टेलीस्कोप इलेक्ट्रोमैग्नेटिक (विद्युतचुंबकीय-electromagnetic spectrum) स्पेक्ट्रम के इन्फ्रारेड रिजन (infrared region) को नहीं देख सकता है वहीं, जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप इसे देख सकता है। इसलिए जेम्स ने जो अभी अपडेट गैलेक्सी को जी तस्वीर भेजी है वह हबल की खींची हुई तस्वीरों की तुलना में बिलकुल अलग दिखता है।

दोनों की तस्वीरों में अंतर
इस विषय पर यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के प्रतिनिधियों का कहना है कि हबल की तस्वीर अंधेरे क्षेत्रों को दिखाती है जो कि स्पाइरल आर्म्स को अलग करता हुआ प्रतित होता है। वहीं, जेम्स वेब की छवियों में संरचनाओं के एक निरंतर उलझन ( continual tangle) को दिखा रही है जो कि स्पाइरल आर्म्स के आकार को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करती हैं।

तस्वीरों में अंतर आकाशगंगा की धूल के कारण है
हालांकि, ईएसए ने इसे समझाते हुए कहा कि तस्वीरों में अंतर आकाशगंगा की धूल के कारण है। दोनों टेलीस्कोप की तस्वीरों में अलग-अलग तारे भी दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि कुछ तारे दूसरों की तुलना में अलग-अलग आवृतियों पर ज्यादा चमकते हैं। जेम्स वेब ने जो तस्वीरें भेजी हैं उसके लिए उसने मिड-इन्फ्रारेड इंस्ट्रूमेंट का उपयोग किया। इसके उन्नत और विशेष कैमरा, जिसे माइनस 446.8 डिग्री फारेनहाइट (माइनस 266 डिग्री सेल्सियस) तक कुलिंग की आवश्यकता होती है। अगर ऐसा नहीं होता है तो आपको आकाशगंगा की अच्छी तस्वीरें प्राप्त नहीं होंगी।

दुनिया का सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप जेम्स वेब
जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप दुनिया का सबसे शक्तिशाली टेलिस्कोप है जिसे नासा, यूरोपियन स्पेस एजेंसी और कनाडाई स्पेस एजेंसी ने मिलकर बनाया है। इसमें एक गोल्डन मिरर लगा हुआ है जिसकी चौड़ाई करीब 21.32 फीट है। यह मिरर बेरिलियम से बने 18 षटकोण टुकड़ों को जोड़कर बनाया गया है। हर टुकड़े पर 48.2 ग्राम सोने की परत चढ़ी हुई है जिससे यह एक परावर्तक की तरह काम करता है। 10 अरब डालर की लागत से बना हबल स्पेस टेलीस्कोप की तुलना में जेम्स वेब लगभग 100 गुना अधिक शक्तिशाली है। जानकार बताते हैं कि, यह 13.7 अरब साल पहले बने सितारों व आकाशगंगाओं का अध्ययन करने में सक्षम है।

हबल स्पेस टेलीस्कोप
हबल टेलीस्कोप एक ऑप्टिकल टेलीस्कोप है, यानि वह सुदूर अंतरिक्ष से आने वाली प्रकाश की किरणों को पकड़ सकता है। हबल स्पेस टेलीस्कोप को पृथ्वी की निचली कक्षा में साल 1990 में स्थापित किया गया था। हबल ने पिछले 31 सालों में हबल ने 14 लाख अवलोकन किए हैं जिसमें अंतरतारकीय पिंडों के अवलोकन गुरु ग्रह से धूमकेतु टकराने की घटना को भी तस्वीर में कैद करने, और प्लूटो के चंद्रमाओं की खोज करना भी शामिल हैं। इनके 5 प्रमुख उपकरण, विद्युतचुंबकीय स्पैक्ट्रम में पराबैंगनी प्रकाश, दिखाई देने वाला प्रकाश और नियर इंफ्रारेड के तरंगों को पकड़ सकता है। हबल ने गैलेक्सी के विलयों को पकड़ने, सुपरमासिव ब्लैक होल की पड़ताल, और हमारे ब्रह्माण्ड के इतिहास को समझाने में मददगार साबित हुआ है।

हबल और जेम्स टेलीस्कोप के आइने में अंतर
हबल और वेब टेलीस्कोप के मूल आइने में भी अंतर है। वेब का मूल आइना 6.5 मीटर व्यास का है । हबल के व्यास 2.4 मीटर का है। इसलिए वेब का कैमरा हबल के कैमरे की तुलना में ज्यादा बड़े क्षेत्र को देख सकता है। वेब की सूर्य से बचाव करने वाली शील्ड भी बड़ी है जो करीब 22 मीटर लंबी और 12 मीटर चौड़ी है।

जेम्स वेब स्पेस टेलस्कोप
जेम्स वेब स्पेस टेलस्कोप में चार वैज्ञानिक उपकरण होते हैं। ये प्रमुख रूप से इंफ्रारेड तरंगों का अवलोकन करता है। जिसमें वह 0.6 से 28 माइक्रॉन की तरंगों को आसानी से पकड़ लेता है। वहीं हबल की बात करें तो उनके उपकरण 0.8 से लेकर 2.5 माइक्रॉन की तरंगें पकड़ पाते हैं। जबकि विद्युतचुंबकीय स्पैक्ट्रम इंफ्रारेड तरंगों की वेवलेंथ 0.7 से 100 माइक्रॉन तक होती हैं। दिसंबर 2021 में 21 फुट लंबे इस पैनल को टेलीस्कोप की 'गोल्डन आई' कहा गया। जेम्स वेब को पृथ्वी से 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर स्थान पर लॉन्च किया गया था।
(Photo Credit : Twitter)












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