भड़के मधेशी और थारुओं को इस तरह से मनाएगी नेपाल की प्रचंड सरकार

नेपाल में संविधान बनने और लागू किए जाने के बाद से ही मधेशी समुदाय मांगे पूरी न होने के कारण भड़का हुआ है।

काठमांडू। संविधान लागू होने के बाद से भड़के मधेशियों को नेपाल की सरकार मनाने का कई दिन से प्रयत्न कर रही है। इसके लिए सरकार ने योजना भी बनाई है।

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड की योजना है कि 13 जिलों वाले देश के 5वें प्रांत को विभाजित किया जाए। कहा जा रहा है कि मधेश आधारित दलों को खुश करने के लिए यह फैसला लिया जाएगा।

हालांकि देश में मुख्य विपक्षी दल नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी ने इस योजना पर आपत्ति जताई है। पीएम प्रचंड के करीबी सहयोगियों के अनुसार इस प्रस्ताव के जरिए मधेशी और थारू, दोनों समुदाय की समस्याओं को हल किये जा सकने में आसानी होगी।

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ये है मांग

मधेशियों की मांग है कि प्रांत 2 में मैदानी इलाके के अलावा, बिना पहाड़ी जिलों वाला प्रांत बनाया जाए वहीं थारू समुदाय का कहना हैकि थरुहट प्रांत बनाया जाए।

नेपाल के अंग्रेजी अखबार काठमांडू पोस्ट ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि 'एक आधिकारिक बैठक में पीएम प्रचंड इस योजना की चर्चा मधेशी नेताओं करेंगे।'

नेपाल सरकार को उम्मीद है कि मधेशी दलों से चर्चा के बाद इस योजना को पूर्ण रूप से बनाकर अगले हफ्ते इस प्रस्ताव पर संविधान संशोधन के लिए इस हफ्ते के आखिरी तक तैयारी की जाएगी।

मधेशी नेताओं से किया परामर्श

प्रचंड के ही एक अन्य करीबी के मुताबिक 'पीएम की योजना है कि प्रांत 5 के पहाड़ी जिलों को प्रांत 6 और 4 में शामिल किया जाएगा। कहा कि प्रचंड ने यह प्रस्ताव कुछ वरिष्ठ मधेशी नेताओं से परामर्श के बाद बनाया।'

प्रचंड के मुताबिक नवलपारसी, रुपनदेही,कपिलवस्तु, दंग, बंके और बर्दिया के प्रांत 5 में शामिल हो जाने से मधेशी और थारू समुदायों की समस्या का हल हो जाएगा। बताया जा रहा है कि प्रांत 5 के 7 पहाड़ी जिलों को प्रांत 4 और 6 में जोड़ा जाएगा।

इस मसले पर तराई मधेश सद्भावना पार्टी के अध्यक्ष महंत ठाकुर वो इस प्रस्ताव को देखने के बाद ही इस पर कोई टिप्पणी करेंगे।

अब भी है भ्रम की स्थिति

बकौल ठाकुर 'शुरूआत में वो यह कह रहे थे कि प्रांत 4,5, और 6 की सीमाओं में कुछ बदलाव किए जाएंगे लेकिन अब कह रहे हैं कि सिर्फ प्रांत 5 को विभाजित किया जाएगा। अब भी भ्रम की स्थिति है।'

उन्होंने आगे कहा कि हमें इस बात की जानकारी दी गई कि यह प्रस्ताव चार विवादास्पद मुद्दों संघीय सीमाओं, उच्च सदन में प्रतिनिधित्व, नागरिकता और प्रांतों के कामकाज की भाषा की समस्या को हल करेंगे।

हालांकि संघीय समाजबादी फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेंद्र यादव ने धमकी दी है कि उपरोक्त मामलों में यदि यह संविधान संशोधन सभी मांगों को पूरा करने में अक्षम रहा तो वो इसें अस्वीकार कर देंगे।

कहा कि जब तक हमारी 26 मांगे पूरी नहीं हो जाएंगी तब तक हम संविधान को स्वीकार नही करेंगे।

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