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भारत को बिजली प्रोजेक्ट, चीन को टाटा-बाय बाय.. नेपाल के प्रधानमंत्री का कल से दिल्ली दौरा.. कितना अहम?

पिछले कुछ सालों में नेपाल और भारत के संबंधों में दूरी देखने को मिली है, लेकिन पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान संबंधों को फिर से जोड़ने की कोशिश की है।

Nepal PM India Visit

Nepal PM India Visit: नेपाल के प्रधान मंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' का कल से आधिकारिक भारत दौरा शुरू हो रहा है और दिल्ली आने से पहले नेपाल सरकार ने एक भारतीय राज्य के स्वामित्व वाली कंपनी को नेपाल में हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाने की मंजूरी दे दी है।

यानि, नेपाल ने अपने प्रधानमंत्री के दिल्ली दौरे से पहले साफ कर दिया है, कि वो भारत के साथ किस तरह के संबंध चाहता है और इसके साथ ही नेपाल का चीन को लेकर डर भी सामने आ गया है। हालांकि, हाईड्रोपावर प्रोजेक्ट को अभी भी नेपाली कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है, लेकिन नेपाली प्रधानमंत्री का कल से शुरू होने वाले चार दिवसीय भारत दौरा काफी अहम माना जा रहा है।

नेपाल के प्रधानमंत्री का भारत दौरा

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड सदियों पुराने, बहुमुखी और सौहार्दपूर्ण संबंधों को और मजबूत करने के लिए अपने भारतीय समकक्ष नरेंद्र मोदी और अन्य नेताओं के साथ बातचीत के लिए चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बुधवार को भारत की यात्रा करेंगे।

नेपाली प्रधानमंत्री की भारत यात्रा की घोषणा शनिवार को की गई है। दिसंबर 2022 में कार्यभार संभालने के बाद प्रचंड की यह पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। हालांकि, प्रचंड की यात्रा पहले ही होनी थी, लेकिन बार बार उनकी यात्रा कई अन्य वजहों से टल रही थी।

68 साल के प्रचंड के साथ उनकी बेटी गंगा दहल भी भारत दौरे में उनके साथ होंगी। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि वह अपने भारतीय समकक्ष प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। बयान में कहा गया है, कि वह मंत्रियों, सचिवों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।

Nepal PM India Visit

क्या होगा नेपाली पीएम का कार्यक्रम?

अपनी यात्रा के दौरान नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' का भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से शिष्टाचार भेंट करने का कार्यक्रम है।

इसके अलावा, प्रचंड 1 जून को पीएम मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। वार्ता के बाद दोनों प्रधानमंत्रियों द्वारा एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी। नेपाल विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि पीएम मोदी नेपाल के अपने समकक्ष और उनके प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में दोपहर के लंच कार्यक्रम की मेजबानी करेंगे।

नेपाल के प्रधान मंत्री के रूप में यह प्रचंड की भारत की चौथी यात्रा है, जबकि इस बार प्रधानमंत्री बनने के बाद वो पहली बार भारत आ रहे हैं। यह यात्रा नेपाल और भारत के बीच सदियों पुराने, बहुआयामी और सौहार्दपूर्ण संबंधों को और मजबूत करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें चीन की तरफ से भी बुलावा आया था, लेकिन प्रचंड पहले भारत की यात्रा करना चाहते थे, इसीलिए फिलहाल उन्होंने चीन के दौरे का प्लान नहीं बनाया है।

नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा है, कि "प्रधानमंत्री प्रचंड, नेपाली वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (एफएनसीसीआई) और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित नेपाल-भारत व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे और दोनों देशों के व्यापारिक नेताओं के साथ बातचीत करेंगे।"

Nepal PM India Visit

कितना अहम है पीएम प्रचंड का दौरा?

कुछ सालों तक चीन की तरफ झुकने के बाद नेपाल अब फिर से भारत के करीब आ रहा है और नेपाली नेताओं में चीन को लेकर फिर से आशंकाएं बढ़ने लगी हैं। चीन ने नेपाल के भी कुछ गावों पर कब्जा जमा लिया है, लिहाजा नेपाल का भरोसा चीन से टूट रहा है।

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    इसके साथ ही, एक्सपर्ट्स का कहना है कि श्रीलंका और पाकिस्तान का चीन के कर्ज में फंसकर जो हाल हुआ है, उसने दुनिया के कई छोटे देशों को बड़ी सबक दी है और बांग्लादेश के साथ साथ नेपाल भी अब चीन को लेकर अलर्ट हो गया है। बांग्लादेश के कई मंत्री सार्वजनिक तौर पर चीनी कर्ज की आलोचना कर चुके हैं। वहीं, नेपाल भी अब चीन का मोह छोड़कर भारत के साथ वापस आ रहा है।

    इसका सबसे बड़ा उदाहरण, प्रधानमंत्री प्रचंड का चीन में होने वाले बीआरई सम्मेलन में शामिल होने से इनकार करना है। वहीं, इससे पहले जब अप्रैल में पीएम प्रचंड की भारत यात्रा की योजना बनी थी, उस वक्त नेपाली मीडिया में कहा गया, कि इस दौरे के दौरान, भारत और नेपाल के बीच 36 किमी रक्सौल-काठमांडू रेलवे लाइन के निर्माण को लेकर समझौता हो सकता है।

    एक्सपर्ट्स का मानना है, भारत को चीन को लेकर नेपाल के मन मे आई असंतुष्टि का फौरन फायदा उठाना चाहिए और बॉर्डर विवाद, अग्निवीर स्कीम विवाद, नेपाल अर्थव्यवस्था को कैसे फायदा हो, जैसे मुद्दों पर नेपाल के साथ करीब से जुड़ना चाहिए और चीन को हमेशा के लिए नेपाल से बाहर कर देना चाहिए। (सभी तस्वीर- फाइल)

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