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MP Bahadur Rayamajhi को बड़ी राहत, नेपाल की संसद ने निलंबन का बयान वापस लिया

नेपाल की जिला अदालत से सजा के बाद संसद से निलंबित किए गए सांसद Bahadur Rayamajhi को राहत मिली है। संसद ने इनका निलंबन वापस लेने का फैसला लिया है। आरोप 800 से अधिक लोगों को चूना लगाने का है।

MP Bahadur Rayamajhi

MP Bahadur Rayamajhi की सस्पेंशन पर रोक लग गई है। समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के संघीय संसद सचिवालय ने नेपाल के सांसद शीर्ष बहादुर रायमाझी के निलंबन के बयान को वापस ले लिया है।

इससे पहले संघीय संसद सचिवालय ने नेपाल के सांसद शीर्ष बहादुर रायमाझी को निलंबित कर दिया था। बता दें कि फर्जी शरणार्थी घोटाला मामले में काठमांडू जिला अदालत ने सांसद को 3 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

काठमांडू जिला अदालत के प्रवक्ता ने सांसद बहादुर रायमाझी पर कार्रवाई की जानकारी दी। नेपाल की संघीय संसद सचिवालय के निलंबन के बयान को वापस लेने से पहले समाचार एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, फर्जी शरणार्थी घोटाला मामले में अदालत ने नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का फरमान सुनाया था।

काठमांडू जिला अदालत ने सोमवार को पूर्व उप प्रधानमंत्री और यूएमएल (Unified Marxist Leninist) नेता बहादुर रायमाझी को शरणार्थी घोटाले में लगे आरोपों के तहत तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजकर आगे की जांच का आदेश दिया।

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    रिपोर्ट के मुताबिक रायमाझी 11 दिन से फरार थे। रविवार को काठमांडू के बाहरी इलाके बुधानिलकांठा में उसके रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार किया गया। उन्हें एक नकली भूटानी शरणार्थी घोटाले में आरोपित किया गया है जो नेपाल के हाई-प्रोफाइल घोटालों में से एक बन गया है।

    विपक्षी सीपीएन-यूएमएल (कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल- यूनिफाइड मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट) के मौजूदा सांसद रायमाझी के खिलाफ कथित रूप से भूटानी शरणार्थियों के भेष में लोगों को अमेरिका भेजने के रैकेट में शामिल होने क आरोप है।

    नेपाली ढाका-टोपी (टोपी), एक नीला ब्लेज़र, एक सफ़ेद शर्ट और आसमानी-नीली जींस पहने, रायमाझी को पुलिस अधिकारी पहले जिला सरकार के अटॉर्नी ऑफिस तक ले गए। इसके बाद सांसद को काठमांडू जिला अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

    रायमाझी को गिरफ्तारी वारंट जारी होने के 12वें दिन पुलिस ने गिरफ्तार किया, जबकि उनके बेटे संदीप पर भी घोटाले में संलिप्त होने का आरोप है। बेटे को वारंट जारी होने के दिन ही गिरफ्तार कर लिया गया था।

    रिपोर्ट के अनुसार, कुल 106 पीड़ितों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि जालसाजों ने अलग-अलग समय में उनसे 232.5 मिलियन रुपये से अधिक की ठगी की है। अब तक, पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है।

    पकड़े गए लोगों में नेपाल के पूर्व गृह मंत्री बाल कृष्ण खांड, पूर्व गृह मंत्री राम बहादुर थापा के सुरक्षा सलाहकार इंद्रजीत राय और पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे जैसे कुछ हाई-प्रोफाइल व्यक्ति भी शामिल हैं।

    सेंटर फॉर इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म- नेपाल के अनुदान के माध्यम से एक खोजी अंश के प्रकाशन के बाद यह मामला पिछले महीने सुर्खियों में आया था। बढ़ते दबाव के साथ, तत्कालीन गृह मंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ने पुलिस को जांच करने का निर्देश दिया।

    पुलिस ने जांच के दौरान पूर्व गृह सचिव टेक नारायण पांडे को गिरफ्तार किया। इसके बाद मामला तूल पकड़ने लगा। बरामद दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि कैसे नेपालियों को भूटानी शरणार्थियों के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका भेजने के बदले में लाखों रुपये की ठगी की गई।

    यह मामला तब और सुर्खियों में आया जब मुख्य विपक्षी दल सीपीएन-यूएमएल के सचिव शीर्ष बहादुर रायमाझी, उनके बेटे संदीप और पूर्व गृह मंत्री राम बहादुर थापा के बेटे प्रतीक थापा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया।

    संदीप 10 मिलियन नेपाली रुपये रिश्वत लेने के आरोप में न्यायिक हिरासत में है। नेपाल पुलिस ने पूर्व गृह मंत्री राम बहादुर थापा के सलाहकार इंद्रजीत राय को भी गिरफ्तार किया है। राय गृह मंत्रालय से फर्जी दस्तावेज प्राप्त करने में मदद करने का आरोपी है।

    करीब एक साल पहले 14 जून, 2022 को गृह मंत्रालय और नेपाल पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में शामिल एक आपराधिक समूह की जांच शुरू की। समूह कथित तौर पर लोगों को भूटानी शरणार्थियों के रूप में अमेरिका भेजने का वादा करके वर्षों से घोटाला कर रहा था।

    समूह ने कथित तौर पर नेपाल में विभिन्न स्थानों से 875 से अधिक लोगों से लाखों रुपये की ठगी की है। पुलिस जांच में पाया गया कि संदिग्ध आरोपी एक आदमी से एक से पांच मिलियन नेपाली रुपये तक चार्ज करते थे। उन्हें भूटानी शरणार्थियों के रूप में अमेरिका भेजने का वादा करते थे।

    गौरतलब है कि 1990 के बाद, नेपाल ने नेपाली-भाषी भूटानी नागरिकों की भारी संख्या में बाढ़ देखी, जिन्हें भूटानी सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर जातीय रूप से उनके देश से निकाल दिया गया था।

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