किराए के घर में रहने पर मजबूर Nepal के पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli, 10 दिन बाद आए नजर, इस जगह छुपे
Nepal: Gen-Z आंदोलन के 10 दिन बाद नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री KP Sharma Oli नजर आए। अब उनकी मौजूदा स्थिति ये है कि वे प्रधानमंत्री आवास जैसे आलीशान निवास को छोड़कर किराए के घर में रहने को मजबूर है। साथ ही उन्हें खतरा भी बना हुआ है। लिहाजा उन्होंने सेना की सुरक्षा में रहने के बाद लिया फैसला है।
सेना की छावनी से बाहर आए ओली
नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (CPN-UML) के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली अब सेना की छावनी से बाहर आ गए हैं। नौ दिनों तक सेना की सुरक्षा में रहने के बाद वह एक निजी आवास में चले गए हैं। बताया गया है कि ये आवासा किराए पर लिया गया है।

भक्तपुर में रह रहे हैं ओली
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ओली काठमांडू से करीब 15 किलोमीटर पूर्व भक्तपुर जिले के गुंडू में एक निजी घर में रह रहे हैं। हालांकि उनका सटीक पता आधिकारिक रूप से उजागर नहीं किया गया है।
इस्तीफे के दिन लिया था सेना का सहारा
9 सितंबर को ओली को हेलीकॉप्टर से एक सुरक्षित सैन्य स्थान पर ले जाया गया था, जिसे शिवपुरी वन क्षेत्र में माना जा रहा था। इसी दिन उन्होंने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उसी दिन प्रदर्शनकारियों ने भक्तपुर के बालकोट में उनके घर को आग लगा दी थी, जिससे वह पूरी तरह जल गया।
दूसरे नेता भी रहे सेना की सुरक्षा में
केपी ओली अकेले ऐसे नेता नहीं थे जिन्होंने सेना का संरक्षण लिया। पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड', शेर बहादुर देउबा, झलनाथ खनाल और माधव कुमार नेपाल भी कुछ समय तक सेना की सुरक्षा में रहे। हालांकि अब अधिकांश नेता अपने-अपने घर लौट गए हैं। देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा अभी भी अस्पताल में इलाज करवा रहे हैं और सेना की सुरक्षा में हैं।
सोशल मीडिया प्रतिबंध से भड़के थे Gen Z
नेपाल में केपी शर्मा ओली की सरकार द्वारा 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगे प्रतिबंध के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन बाद में बड़े भ्रष्टाचार विरोधी अभियान में बदल गया। 'हामी नेपाल' नामक युवा समूह के नेतृत्व में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। हिंसा में 72 लोगों की मौत हुई और सरकारी इमारतों व नेताओं के घरों में आग लगा दी गई।
अंतरिम सरकार बनी
बढ़ते दबाव के बीच, 9 सितंबर को ओली ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद नेपाली सेना ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनाई। इस सरकार को मार्च 2026 तक व्यवस्था बहाल करने और नए चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
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