Nepal: अंतरिम PM सुशीला कार्की के घर के बाहर प्रदर्शन, हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों ने क्यों किया हंगामा
Nepal Gen-Z Andolan 2025: नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की इन दिनों गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। शनिवार देर रात उनके सरकारी आवास के बाहर मारे गए युवाओं के परिजनों ने नारेबाजी और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। दरअसल, परिजन सुबह से ही मुलाकात का इंतजार कर रहे थे, लेकिन निराश होकर देर रात विरोध जताने लगे। इस बीच पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी है।
नेपाल में हुए Gen-Z आंदोलन की हिंसा में अब तक 51 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों घायल हुए हैं। इन्हीं हालातों के बीच 73 वर्षीय सुशीला कार्की को सत्ता संभालनी पड़ी है।

क्यों नाराज हुए शहीदों के परिजन?
नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के आवास के बाहर जो हंगामा हुआ, उसकी सबसे बड़ी वजह पीड़ित परिवारों की नाराज़गी थी। हिंसा में मारे गए युवाओं के परिजन सुबह से ही कार्की से मिलने के इंतजार में थे, लेकिन जब देर रात तक उन्हें मुलाक़ात का मौका नहीं मिला तो उनका सब्र टूट गया। परिवारों का कहना है कि सरकार ने अब तक पुलिस दमन में दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।
उन्हें लगता है कि सरकार राजनीतिक दलों और नेताओं से तो लगातार संवाद कर रही है, लेकिन सीधे पीड़ितों की सुनवाई नहीं कर रही। इसी अनदेखी और न्याय की मांग पूरी न होने की पीड़ा ने लोगों को नारेबाजी और धरना देने के लिए मजबूर कर दिया।
हिंसा में मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा
बता दें कि, 12 सितंबर को सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। उसके बाद रविरवार को बैठक के बाद उन्होंने Gen-Z आंदोलन में मारे गए 51 लोगों को शहीद घोषित करने और उनके परिजनों को 10-10 लाख नेपाली रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया। कार्की ने स्पष्ट किया कि वह भ्रष्टाचार मिटाने और राजनीतिक स्थिरता लाने के लिए काम करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कार्यकाल केवल 6 महीने का होगा और मार्च 2026 में होने वाले आम चुनाव तक ही वे पद पर बनी रहेंगी। उनके इस फैसले को नेपाल की अस्थिर राजनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे जनता की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
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हिंसा में 1 भारतीय समेत 51 की हुई थी मौत
नेपाल में हुए Gen-Z आंदोलन ने भयावह रूप ले लिया था। इस हिंसक उथल-पुथल में अब तक 51 लोगों की जान गई, जिनमें एक भारतीय महिला भी शामिल थीं। राजधानी काठमांडू से लेकर कई जिलों तक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच भिड़ंत हुई, जिसने पूरे देश को दहला दिया। हालात इतने बिगड़े कि संसद भवन से लेकर पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' के घरों तक प्रदर्शनकारियों का निशाना बन गए। आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा की इन घटनाओं ने प्रशासन को सेना बुलाने और कई इलाकों में कर्फ्यू लगाने पर मजबूर कर दिया। यह पूरी घटना नेपाल की राजनीति और समाज में गहरी हलचल मचा गई।
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