भारत के इस पड़ोसी ने दो और पेट्रोलियम पाइपलाइन के लिए मांगी मदद, जानिए कैसे होगा फायदा
काठमांडू, 2 सितंबर: नेपाल ने भारत से दो और पेट्रोलियम पाइपलाइन बिछाने में मदद की गुहार लगाई है। भारत की सहायता से तैयार नेपाल की एक पेट्रोलियम पाइपलाइन पहले से ही चालू अवस्था में है। लेकिन, हिमालय की गोद में बैठा यह देश पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई पर होने वाले खर्चों को और घटाना चाहता है। दरअसल, नेपाल चारों ओर से दूसरे देशों की जमीन से जुड़ा देश है। वह समुद्री रास्ते से तेल की सप्लाई नहीं मंगवा सकता। लिहाजा उसके लिए सड़क मार्ग से ही इसकी ढुलाई करवानी पड़ती है, जिसकी लागत काफी ज्यादा आती है।

नेपाल ने पेट्रोलियम पाइपलाइन के लिए मांगी मदद
भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल ने सरकार से सरकार के बीच समझौते के तहत दो और पेट्रोलियम पाइपलाइन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए भारत से तकनीकी मदद के साथ-साथ अनुदान की सहायता मांगी है। बिहार के मोतिहारी और नेपाल के बारा जिले के अमलेखगंज के बीच भारत की मदद से बनी 69 किलोमीटर लंबी पेट्रोलियम पाइपलाइन पहले से ही चालू है। इसका उद्घाटन 10 सितंबर, 2019 को हुआ था। इसका इस्तेमाल इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को डीजल भेजने के लिए किया जाता है।

दो नई परियोजनाओं का प्रस्ताव भेजा है
नेपाल के अधिकारी ने बताया है कि मोतिहारी-अमलेखगंज पाइपलाइन का निर्माण पूरा होने के बाद नेपाल सरकार ने भारत के साथ दो और पेट्रोलियम पाइपलाइन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए सरकार से सरकार के बीच समझौते की तैयारी की है। इस संबंध में नेपाल ने भारत सरकार के पास प्रस्ताव भी भेजे हैं। नेपाल के वाणिज्य, उद्योग और आपूर्ति मंत्रालय की अंडर सेक्रेटरी उर्मिला केसी ने कहा है कि नेपाल ने हाल ही में दो अलग-अलग प्रस्ताव भेजे हैं। एक पश्चिम बंगाल की सिलीगुड़ी से नेपाल के झापा तक 52 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के निर्माण के लिए और दूसरी 69 किलोमीटर की पाइपलाइन जो नेपाल के चितवन जिले में अमलेखगंज से लोतहर को जोड़ती है। यह मोतिहारी-अमलेखगंज पाइपलाइन का ही विस्तार है।

300 करोड़ रुपए से ज्यादा का है प्रोजेक्ट
उर्मिला केसी ने कहा है, 'हम दो पाइपलाइन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।' उन्होंने यह भी कहा है कि 'नेपाल और भारत की एक संयुक्त तकनीकी टीम की ओर से दोनों परियोजनाओं का विस्तृत सर्वेक्षण पहले ही पूरा कर लिया गया है।' सिलीगुड़ी-झापा पाइपलाइन की अनुमानित लागत 288 करोड़ रुपए और अमलेखगंज चितवन पाइपलाइन की अनुमानित लागत 128 करोड़ रुपए है। उनके मुताबिक, 'हमने भारत से पाइपलाइन प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए तकनीकी मदद के साथ-साथ अनुदान सहायता दोनों के लिए कहा है।' (ऊपर की तस्वीरें सौजन्य: डीडी ट्विटर)

दो स्टोरेज टैंकों का भी होना है निर्माण
प्रस्ताव में झापा और चितवन में 41,000 किलो लीटर की अलग-अलग स्टोरेज टैंक का निर्माण भी शामिल है, जिसमें भी नेपाल को भारत की सहायता की दरकार है। नेपाल की अधिकारी ने कहा, 'हमने 41,000 किलोलीटर की क्षमता वाले दो भंडारण टैंक भी प्रस्तावित किए हैं, एक भारत की सहायता से और दूसरा नेपाल सरकार की ओर से ही बनाया जाएगा।' (ऊपर की तस्वीर सौजन्य: ट्विटर)

नेपाल को ऐसे मिलेगा फायदा
उन्होंने उम्मीद जाहिर करते हुए कहा है कि इन पाइपलाइनों के जरिए विमानों के लिए इंधन की सप्लाई हो पाएगी और नेपाल तक बाकी पेट्रोलियम उत्पाद भी पहुंच पाएंगे। जाहिर है कि एक बार सारी पाइपलाइन चालू हो जाने के बाद नेपाल को पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई पर लगने वाले सारे खर्चों की बचत हो सकेगी। इसलिए नेपाल भारत से बहुत उम्मीद लगा रहा है। (इनपुट-पीटीआई)












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