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रुपये में रूस संग कारोबार में क्यों आ रही दिक्कतें? रूस के उप-प्रधानमंत्री ने बताया, जयशंकर ने दिया भरोसा

मंटुरोव ने अपनी ओर से कहा, भारत से आयात की कमी के कारण, रुपये का उपयोग करना पर्याप्त नहीं है। हमें भारत से व्यापार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इस मामले में हम संतुलन देख रहे हैं।

Russian Deputy PM

रूसी उपप्रधानमंत्री और उद्योग व वाणिज्य मंत्री डेनिस ने अधिक से अधिक राष्ट्रीय मुद्राओं और मित्र देशों की मुद्राओं के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि व्यापार घाटे को संतुलित करने के लिए भारत को रूस के साथ व्यापार बढ़ाने की जरूरत है।

रूसी उपप्रधानमंत्री दो दिवसीय भारत दौरे पर आए हुए हैं। वे रूसी-भारत सरकार आयोग की सह-अध्यक्षता करने के लिए यहां आए हुए हैं। इस दौरे का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करना है। भारत और रूस एक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर चर्चा कर रहे हैं। यह एक ऐसी पहल जो द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को बढ़ावा देगी।

रूसी उप प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के ढांचे के भीतर प्रमुख भागीदारों में से एक बन सकता है। उन्होंने कहा कि यूरेशियन आर्थिक आयोग के साथ मिलकर हम भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को तेज करने की उम्मीद कर रहे हैं। इसके अलावा हम निवेश के संवर्धन और संरक्षण के लिए रूस-भारत द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने पर काम कर रहे हैं।

इस दौरान मीडिया से बात करते हुए माटुरोव ने कहा है कि भारत से आयात की कमी के कारण, दोनों देशों के बीच व्यापार में रुपये का उपयोग करना कठिन है। हमें भारत से व्यापार बढ़ाने की जरूरत है। इस मामले में हम ऐसे संतुलन की संभावना तलाश रहे हैं जैसा चीन के साथ है। उन्होंने कहा, "हमारा चीन के साथ 200 बिलियन डॉलर का व्यापार है और यह संतुलित है।"

इस बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए भारत रूस के साथ मिलकर काम करेगा। भारत-रूस व्यापार संवाद को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा- व्यापार असंतुलन के बारे में कुछ चिंताएं हैं और हमें इस असंतुलन को दूर करने के लिए अपने रूसी समकक्षों के साथ काम करने की जरूरत है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आगे कहा कि दोनों तरफ व्यापार को प्रेरित करने की जरूरत है। जयशंकर ने कहा, आप देख सकते हैं कि 'मेक इन इंडिया' जैसे बड़े बदलाव हो रहे हैं। हम भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (ग्लोबल मैन्युफैक्च रिंग हब) बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मैं 'मेक इन इंडिया' पर जोर देना चाहता हूं।

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